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तुलसी महिमा

नमो नमः तुलसी महारानी।
नमो नमो हरि की पटरानी।।
मातु जागो आई जगाने।
प्रेम भाव के पुष्प चढाने।।

विनती मोरी सुन लो मैया।
सुख की हमको दे दो छैया।।
प्रेम कलश भर नीर चढाँऊ।
धूप दीप सेवा में लाँऊ।।

प्रेम भाव से सिंचन करते।
अन्न-धन के भण्डारे भरते।।
मास कतकी कल्याण प्रदाता।
वरदायक है तुलसी माता।।

दूल्हे सालिगरामजी आए।
एकादश में ब्याह रचाए।।
खुशियों की गूँजी शहनाई।
भक्ति ने मिल गाई बधाई।।

मंगल मोद मुदित मन रीझो।
भक्ति वरदान हमको दीजो।।
दुख दरिद्र निकट नहीं आता।
जो नित मंगल दीप जलाता।

तुलसी माँ सुख संपत्ति दाता।
भक्तों की तुम भाग्य विधाता।।
हाथ जोड़ कर तुम्हें मनाएं।
चरण कमल रज शीश चढाएं।।

मेरे अवगुण बिसरा देना।
माँ आँचल की छैया देना।।
माँ ‘सीमा’ तेरी बालक है।
तू माता सबकी पालक है।।

कृष्ण प्रिया शुभ मंगल दाता।
जो जन मात शरण में आता।।
अंत समय मुख में दल रहता।
यम की त्रास से मुक्ति पाता।।

अक्षत,पुष्प ले थाल सजाए।
करें आरती जन सुख पाएं।।
दास सहज में दर्शन पाता।
मानव जन्म सफल हो जाता ।।

षडरस व्यंजन खूब बनाए।
पकवानों से थाल सजाए।।
छप्पन व्यंजन भोग लगाए।
तुलसी से हरि खूब मनाए।।

राखो मेरी लाज भवानी।
‘सीमा’ महिमा रोज बखानी।।
जीवन में मंगल सुख आता।
चित्त लगा के पाठ जो गाता।।

✍️ सीमा गर्ग मंजरी
मौलिक सृजन
मेरठ कैंट उत्तर प्रदेश
सर्वाधिकार सुरक्षित ©®

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