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सूर्योपासना

हे दिवस सम्राट महामार्तण्ड
तुम्हें शत शत नमन है!

हे अरुणोदय,
नव सृष्टि हित अवतरण तुम्हारा,
जीवन ऊर्जा का संदेश लिए
नदी निर्झर के सप्त स्वर में ,
तेरा मधुर संगीत भरा !

महक उठे हैं वन -उपवन
वृक्षों पर हरियाली छायी है ,
प्रात:तेरी लालिमा से युक्त ,
सकल मानव हित सुखदाई है ,
प्रकृति पर तेरा हो रहा प्रहार !

चंद्र भी तेरी द्युति पर है ,आह्लादित,
दान संस्कार ने कर्ण को किया आभूषित,
कवच कुण्डल का ले दान इन्द्र हुए सम्मानित,
गौरवहीन कर्ण पार्थ से हुआ पराजित ,
दान की यह गाथा,जग को देती नव संस्कार

सच है चंद्र से संलग्न करवा चौथ त्योहार हैं
छठ पर्व की महिमा तो मानव व्रत त्योहार है !
सारी साधना का स्त्रोत बिंदु ही तुम ,
शाम सुबह होता तेरा पूजन ,
हे ज्योति पुंज तप प्रवीण ,
तुम्हें शत -शत नमन करे!

(स्वरचित)
____डॉ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फपुर, बिहार

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