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मन में राम 

 

राम नाम बहुत सुखदाई

जो जाप करे सो ,

अनंत सुख पाई ।।

 

मन में मेरे श्री राम बसे

कण कण में श्री राम बसे

अनन्य भक्ति रस में डूबी नगरी

अयोध्या मेरे भारत में बसे ।।

 

फिर भी धरा पर देखो कितने,

मेरे प्रभु श्री राम पर कष्ट पढ़े।

चौदह बरस का वनवास लेकर,

अयोध्या माता की खातिर छोड़ गए ।।

 

जिसने जन्म लिया भारत में

आज उसका अस्तित्व मिटने को

उमर पड़ी थी भीड़ बहुत ही

जब बाबर मस्जिद बनाने को।।

 

तब सत्य सनातन जगा फिर

राम को न्याय दिलाने को

संघर्ष बहुत था मन में सबके

श्री राम का मंदिर बनवाने को ।।

 

मर्यादा पुरुषोत्तम राम हैं

आज सत्य प्रगट यह होता हैं

अपनी मर्यादा में रहकर ही देखो,

न्ययालय से जीती आज अयोध्या हैं।।

 

©®आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)

मध्य प्रदेश, ग्वालियर

भारत

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