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ऑनलाइन मार्केट ने छनी रजाई, गद्दे की दुकानों की रौनक

 

 

आरा/भोजपुर। ठंड बढ़ते ही गर्म कपड़ो की मांग बढ़ जाती है। मौसम में धीरे धीरे बदलाव दिखने लगा है। सुबह और शाम के समय ठंड का अहसास होने लगा है। बाजारों में रजाई और गद्दे की दुकान सज गयी हैं। बाजार में रजाई और गद्दे तैयार करने वाले कारीगर ग्राहकों के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं।

 

फुटपाथ पर बने रजाई,तोशक के दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगती है लेकिन ऑनलाइन बाजार के बढ़ते प्रचलन के कारण इन दिनों रजाई,तोशक बेचने पर दुकानदार काफी परेशान हैं। कोइलवर प्रखण्ड में रजाई-गद्दा की दुकानें पर सन्नाटा पसरा हुआ है।

 

दुकानदार बताते हैं कि कुछ ग्राहक अपनी पसंद की रूई और फर्द खरीदकर रजाई गद्दे बनवा रहे हैं तो कुछ दुकानदारों की सलाह पर रेडीमेड रजाई गद्दे ऑनलाइन खरीद रहे हैं जिससे हम लोगों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऑनलाइन और फैंसी रजाई, तोशक की बिक्री के कारण ग्राहक फुटपाथी दुकान तक नहीं पहुँच रहे है। जिस कारण छोटे व्यापारियों के लिए यह नुकसान का धंधा साबित हो रहा है।

 

कोईलवर में तीन चार फुटपाथी रुई की दुकानों में रजाई, तोशक की भराई की जाती है। जहाँ दुकानें सज रही है लेकिन आधुनिकता के दौर में ग्राहक नहीं पहुँच रहे है। दुकानदार मुन्ना ने बताया कि 10 वर्ष से इस व्यवसाय से जुड़े है। पहले सीजन और लगन में एक से डेढ़ लाख रुपया का मुनाफा होता था, लेकिन कोरोना काल के बाद व्यवसाय चौपट सा हो गया है।

 

स्थिति ऐसी है कि कारीगर का मजदूरी देना मुश्किल हो गया है। और एक सीजन का व्यवसाय पचास हजार हो गया है। कारीगर कुल्हड़िया के आमिर, बेंदौल के मो. महमूद, शकील ने बताया कि पहले प्रतिदिन आठ से दस नये रजाई, तोशक की भराई होती थी, लेकिन अब एक से दो रजाई का ही ऑर्डर आ रहा है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो रोजगार के लिए हमें दूसरे राज्य में पलायन करना पड़ेगा।

 

आज स्थिति ऐसी हो गई है कि हर कोई ऑनलाइन ही शॉपिंग कर रहा जिससे हमलोगों का रोजगार एकदम ठप से हो गया है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब जीवकोपार्जन के लिए हमें दूसरे राज्य में पलायन करना पड़ेगा।

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