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मनहरण घनाक्षरी छंद – भोले को मनाइये

वर्णिक छंद विधान
8, 8, 8, 7 वर्ण पर यति ।
चार युग्म का एक छंद ।
चारों युग्म में समतुकांत अनिवार्य ।

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(1)

माता सती के हैं नाथ ,
कार्तिक गणेशा साथ ,
शिव जी दोनों के तात ,
भोले को मनाइये ।

जाते हैं अमरनाथ ,
भक्तगण साथ-साथ ,
प्रभु जी दर्शन देने ,
हमको बुलाइये ।

अमरनाथ यात्रा में ,
बर्फ हो भारी मात्रा में ,
बम-बम का मिल के ,
नारा भी लगाइये ।

गुफा में बाबा बर्फानी ,
बर्फ का है ठंडा पानी ,
प्रातः स्नान किया अब ,
दर्शन कराइये ।

(2)

शिव जी बहुत भोले ,
सदा मृदु वाणी बोले ,
विष पीकर सबको ,
अमृत लूटाइये ।

माथे पे चंद्र विराजे ,
गलमाला सर्प साजे ,
हाथ में डमरू बाजे ,
सौंदर्य दिखाइये ।

जटाओं में गंगा भरी ,
कंठ विष से है हरी ,
नन्दी आगे रहे खड़ी ,
भोले को मनाइये ।

सती के हैं पतिदेव ,
शिव हैं देवों के देव ,
धतूरा व बिल्वपत्र ,
भोले को चढ़ाइये ।

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धन्यवाद

©® विकास अग्रवाल “बिंदल” , भारत

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