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गज़ल

खुद के पैरों पर कभी, जब मैं खड़ा हो जाऊंगा ।
मां के चरणों में झुकूंगा, और बड़ा हो जाऊंगा ।।

झूंठ कहने का हुनर, आजमा रहा हूं आजकल।
जानता हूं सच कहा, सबका बुरा हो जाऊंगा।।

बेवफाई का अगर, इल्जाम उस पर आएगा ।
दिल ना मेरा सह सकेगा ,मैं फना हो जाऊंगा ।।

बाल भी आधे पके हैं, दांत भी हिलने लगे ।
इश्क गर फिर से हुआ, दिल से जवां हो जाऊंगा ।।

गर यूं ही तप्ता रहा, इन भट्ठियों में दिन ब दिन ।
देख लेना एक दिन, सोना खरा हो जाऊंगा ।।

मैं किसी का हूं ना अपना, जब तलक गर्दिश में हूं ।
सफल जिस दिन हो गया, सबका सगा हो जाऊंगा ।।

जिंदा हूं कुछ इसलिये भी, हूं बुरा कुछ एक का ।
“प्रखर”जब मर जाऊंगा, सबका भला हो जाऊंगा ।।

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