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देवोत्थान एकादशी

कार्तिक मास शुक्ल पक्ष एकादशी,
कहें प्रबोधिनी या देवोत्थान एकादशी।

भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागे,
इसे हरि वासर या हरि दिन कहते।
दस इंद्रियों का स्वामी 11वाॅं मन है।

एकादशी पूजन से, उपवास से,
मन का निग्रह हो जाता है ।

प्रभु जागरण के बहाने हम सबको,
देवत्व के जागरण का संदेश मिलता।
मान्यता है व्रत के प्रभाव से,
मानव का उत्थान व मोक्ष प्राप्त होता।

गरुण पुराण, पद्मपुराण ग्रंथों में,
वर्णित प्रबोधिनी एकादशी का व्रत ,
पाप,ताप,शाप का नाशक है।
मनोवांछित फलदायक,
भव बंधन,विध्नविनाशक है।

(स्वरचित)
___डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर,बिहार

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