Your SEO optimized title

संगत

विभा वर्मा वाची राँची झारखंड
विभा वर्मा वाची
राँची झारखंड

सत संगत ही कीजिए,जग में होता नाम।
बुरे लोग को देखिए ,कर देते बदनाम।।

नित्य कर्म करते रहें,मिले वहाँ सम्मान।
असर बुरा होता तभी ,संगत को पहचान।।

संगत संतों का करें,भरें ज्ञान भंडार।
ज्ञान-ध्यान के जाप से,ख़ुशियाँ मिले अपार।।

संगत दुर्जन का हुआ,नाम हुआ बदनाम।
असर कुसंगति का दिखा,नहीं मिला था दाम।।

संगत विदुषी का रहे,बन जाते विद्वान।
दुष्टों की संगति कहें ,बुराइयों की खान।।

रच प्रपंच शकुनि यहाँ,बिछा झूठ का जाल।
संगत का दिखता असर ,हाल हुआ बेहाल।।

संगति बुरी न कीजिए ,संग बुरी दे हानि।
संतों की संगति भली,अभी उसे अपनानि।।

संगत कीजे साध कर,करते अच्छा काम।
मिले ज्ञान सत्संग से ,जपना हरि का नाम।।

संगत संतों का करें ,जीवन हो खुशहाल।
नीरस जीवन को भला,सकता कौन सँभाल।।

संगत संतों का करें ,कहती वाची जान।
दुष्टों की टोली बुरी, जाने सकल जहान।।

विभा वर्मा वाची
राँची झारखंड

Leave a Comment

error: Content is protected !!