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करुणा (मुक्तक )

करुणामयी माता मैं द्वार तेरे आई।
प्रेम, श्रद्धा,आस्था झोली मैं लाई।
पूजा,अर्चन उपासना विधि न जानूं-
विनती माॅं नैंनों को तेरी सूरत भाई।

तन,मन से तेरा माॅंकरती हूं वंदन।
परहित सेवा भाव का लगा चंदन।
माॅं तेरी करुणा बरसे जग उजियारा –
दीन दुखियों के दुख हर होयें रंजन।

जगत जननी माता करुणा दायिनी ।
दर दर भटकता माॅं कष्ट निवारनी।
मझधार में नैया मेरी तुझको पुकारे –
जग के संकट दूर करो विघ्ननाशिनी।

(स्वरचित)
___डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर,बिहार

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