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छठ पूजा

है सूर्य उपासना का महत्वपूर्ण पर्व।
बिहार प्रांत में है विख्यात छठ पर्व।

छत्तीस घंटे का निर्जला उपवास, सुहागन करती।
संतान प्राप्ति, कुशलता, दीर्घायु और समृद्धि पाती।

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से पर्व शुरू होता।
संपन्न चार दिनों तक विधि- विधान से होता।

प्रथम दिवस नहाय-खाय कहलाता।
दूजे दिन “खरना” प्रसाद विशेष विधि से बनता।

तीसरे दिन अस्तांचलगामी सूर्य पूजन होता।
चौथे दिन उगते सूर्य का पूजन, जल भीतर खड़े होकर होता।

पूजन सामग्री बांस के सूप, टोकरी में धरते।
स्टील, कांच के बरतन पूजा में कभी न रखते।

सूर्य है प्रत्यक्ष देव हमारे।
नयनों से देखते हम सारे।
पूजन सूर्य देव और छठी मइया का
भक्ति भाव से सभी करते।
नारियल, गन्ना, केला, ठेकुआ , गुड की खीर प्रसाद चढ़ाते।
कृतज्ञता प्रकृति के प्रति दर्शाते।।

रहना प्रकृति के समीप ,जतन करना।
सिखाता छठ पर्व हम सबको।।

चंद्रकला भरतिया
नागपुर महाराष्ट्र 🙏

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