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सन 1778 का मंदार पर्वत

सन 1778 का मंदार पर्वत

 

 

बौंसी/बांका। तब भी मंदार पर्वत बहुत प्रसिद्ध था। इसे आप नीचे दिए गए चित्र में स्नान कर रहे लोगों की संख्या से भी जान सकते हैं।

 

उस समय यह सघन वन क्षेत्र था। काले चीतों और बाघों का यहां बसेरा था। गैंडे, हाथी, तेंदुए, सांप तो बहुतायत में थे ही दस्युओं का भय भी चरम पर था। तब मंदार पर्वत के नीचे का नगर #मंदारपुरी या #अपर_मंदार की यह राजधानी उजड़ चुकी थी। यहां छत्रपति नामक राजपूत के वंशजों के दो-चार घर थे। सभी संयुक्त परिवार थे। दो घर उन्होंने मजदूर वर्गों के बसाए थे।

 

उन दिनों 4 किलोमीटर दूर तक यहां नगर सभ्यता के साक्ष्य स्थल पर फैले थे। 1.8 मीटर व्यास के दर्जनों कुएं, मंदिरों के स्तंभों, अमलकों के अलावा देवता-देवियों-यक्षों की सैकड़ों मूर्तियां यत्र-तत्र बिखरे थे। मोर, साही, जाँघिल, गिद्ध, बाज जैसे जंतु तो सर्वाधिक थे।गिद्धों के विशाल सेमल वृक्षों पर निवास के कारण कई गांवों का नाम गिद्धासेमर था।

 

मंदार पर्वत के समीप से इस क्षेत्र का सबसे ज्यादा चलताऊ मार्ग गुजरता था जिसे बोगलीपुर-सूरी मार्ग कहते थे। यह मुख्य मार्ग गंगा के सुदूर उत्तरी हिस्से को दक्षिणी पठारी भाग से जोड़ता था। चीन, नेपाल और #मिथिला क्षेत्र से बैजनाथ या देघुर (देवघर), हज़ारीबाग़ तथा दक्षिण भारत तक जाने के लिए यह सर्वाधिक प्रचलन में आनेवाला मार्ग था।

 

विदित हो कि #देवघर के बैद्यनाथ मंदिर के सभी तीर्थपुरोहितों व मठ-प्रधानों/सरदार पंडा के पूर्वज मिथिला के इसी मार्ग से देवघर पहुंचे। यह बंगाल को #भागलपुर (तब बोगलीपुर) से जोड़ने वाला दूसरा मुख्यमार्ग था। इस सड़क की पहचान के लिए इसके दोनों ओर मुगलों के समय से ही ताड़ के वृक्ष लगाए गए थे ताकि विशाल जंगल के बीच किसी ऊंचे टीले पर खड़े होकर भी इन पेड़ों को देखकर रास्ते का पता लगाया जा सके। इन रास्तों पर बीच-बीच में इमली के पेड़ थे जिन्हें देखकर यह समझा जा सकता था कि यहां जलस्रोत है।

 

ऐसे सघन प्रांत का सर्वे करने के लिए अंग्रेजों ने सन 1772 में जेम्स रेनेल को नियुक्त किया। रेनेल इस जंगली इलाकों को जानने वाले लोगों तथा कुछ हथियारबंद सोवर रक्षकों के साथ पालकी से निकला। वह नदी-नालों-गांवों तक पहुंचा और उसका विवरण लिखा। साथ-साथ मानचित्र भी तैयार करता रहा। नित्य सायंकाल को वह दिनभर की क्रियाविधि का अवलोकन कर अपने टेंट में सो जाता। उसने मुर्शिदाबाद, वर्धमान, वीरभूम, पंचेत, हज़ारीबाग़, मुंगेर तक के प्रक्षेत्रों में सघन वन पाया जिसकी उत्तरी सीमा में गंगा बहती थी। इसे #जंगलतरी डिस्ट्रिक्ट कहा। मंदार और देवघर जैसे ख्यात तीर्थक्षेत्र इसके अंदर थे। हालांकि, आज के नक़्शे की तुलना अगर रेनेल के बनाए नक्शे से करें तो 90 प्रतिशत विकृतियां मिलेंगी।

 

इन दोनों तीर्थक्षेत्रों में भी अंग्रेज अफसरों की रूचि बढ़ी। वे पेंटरों को लेकर आए ताकि इन स्थलों की पेंटिंग बनाई जाए। तब कैमरों का आविष्कार नहीं हुआ था कि क्लिक किया, शटर तेजी से गिरकर कर्र-कर्र खटाक की आवाज़ के साथ फोटो खींचे जाने का संकेत मिल गया।

 

यह वो समय था जब पेंटिंग्स बनाने वाले जलरंग (वाटर कलर) से कागज़ के मोटे बोर्ड या कपड़े पर दृश्य उकेरते थे। फिर उन फाइनल पेंटिग्स के नीचे या पीछे की ओर दृश्य, वर्ष और अपना नाम लिख देते थे। यह सब माहिर लोगों के द्वारा सुघड़ हाथों से बनाया जाता था।

 

जेम्स बार्टन सन 1773 से 1779 तक भागलपुर का कलक्टर था। इसी के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा पहली बार एक पेंटर सैम्युएल डेविड को कुछ विशिष्ट स्थानों की पेंटिंग्स बनाने के लिए भेजा गया। डेविड ने एक चित्र सन 1778 में मंदार पर्वत का बनाया।

 

नवंबर 1779 में ऑगस्ट्स क्लीवलैंड बार्टन की जगह आया तो यहां पेंटिंग्स तैयार करने के लिए विलियम होजेज़ को भेजा गया। होजेज़ द्वारा तैयार की गई सभी पेंटिंग्स में सर्वाधिक चर्चित वैद्यनाथ (देवघर) की पेंटिंग है। यह पेंटिंग उसने 1782 में तैयार की। वह यहां राजमहल के एक गांव से #बारकोप होते हुए आया था। विदित हो कि यही बारकोप अब योगिनी स्थान के नाम से प्रसिद्ध है। बारकोप में वह रुका भी मगर वहां कोई पेंटिंग तैयार की; इसका वर्णन नहीं मिलता है। न ही, पेंटिंग मिलती है।

 

इसके बाद तो कई पेंटर आए। चार्ल्स डॉयली, कैप्टन जेम्स क्रोकेट, एच. एच. विल्सन, रॉबर्ट स्मिथ, कॉलिन मैकिंजे, हेनरी सॉल्ट, एम्मा रॉबर्ट्स, हैरियट मैरी वुडकॉक, सीता राम (पटना स्कूल) जैसे दर्जनों पेंटर्स आये। किसी ने पेंसिल स्केच बनाए तो किसी ने वाटरकलर पेंटिंग्स।

 

19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध ( सन 1876) में इस इलाके में पहली बार #कैमरा लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई) का सर्वेयर जेम्स डेविड बेगलर आया। उसने अपने सर्वे के क्रम में बहुत सारे फोटोज़ लिए और स्केच बनानेवाले से रेखांकन भी बनवाए। उनमें से चुनिंदा कुछ को अपनी पुस्तक में भी शामिल कराया। इनकी खींची गई तस्वीरें पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है।

 

 

सन 1810-11 में इस क्षेत्र का सर्वे करने के लिए फ्रांसिस बुकनन हैमिल्टन को भेजा गया। तब भागलपुर के कलक्टर थे एस.आर.एफ. हैमिल्टन। यह भागलपुर का दूसरा सर्वे था। बुकनन को खनिज पदार्थों और छिपे हुए खजाने को ढूंढने के लिए भेजा गया था मगर वह बॉटनिस्ट यानी वनस्पति शास्त्री था। उसने अपना काम बंगाली दुभाषिए के साथ रहकर सावधानी से किया। यह नोबल वर्क के तौर पर जाना जाता है।

 

 

सन 1778 में मंदार पर्वत की जो पेंटिंग सैम्युएल डेविड ने बनाई उसके अनुसार अब यहां बहुत कुछ बदल गया।

 

244 वर्ष पूर्व के मंदार में शीर्ष पर एक फ्लैट रूफ मंदिर दृष्टिगोचर होता है। इस मंदिर में #भगवान_मधुसूदन निवास करते थे। मुरारी गुप्तेर काड़चा और चैतन्य चरितावली से जानकारी मिलती है कि सन 1507 में इस मंदिर में उन्होंने मधुसूदन का दर्शन किया। नाथद्वारा मंदिर समिति द्वारा प्रकाशित 84 वैष्णवन की कथा से भी यह जानकारी मिलती है कि जब वल्लभाचार्य यहां आए थे तब उन्होंने रात्रिकाल शीर्ष के मधुसूदन मंदिर में विग्रह के समक्ष बिताया था। इस बारे में कई दर्ज़न ऐतिहासिक पुस्तकें बताती हैं कि शीर्ष के मंदिर में भगवान मधुसूदन विराजते थे। मगर अब यहां झक्क सफेद जैन मंदिर नज़र आता है।

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मंदार के पाद स्थित #पापहरणी सरोवर इस चित्र में बहुत फैला हुआ है। आज पापहरणी सरोवर इसका 8वां हिस्सा भी नहीं है।

 

इस पेंटिंग के निर्माण के 36 वर्षों बाद जब विलियम फ्रेंकलिन यहां आए तब उन्होंने पैराम्ब्युलर की मदद से इसकी परिधि ज्ञात किया। वे लिखते हैं कि 4 फर्लांग 40 यार्ड इसकी परिधि है। अगर मीटर में इसकी गणना की जाए तो यह 420.62 मीटर है। कहा जाए तो आधा किलोमीटर के लगभग। मगर यह पापहरणी अब कहाँ जो पाप धो ले! यह बहुत गंदा है और सरकारी अधिकारियों की कमाई का सिर्फ जरिया भर है। इसके बीच में सन 1999 में लक्ष्मीनारायण का एक मंदिर बना दिया गया। दुख इस बात का है कि इस वैष्णव क्षेत्र में यहां चोरी छिपे मत्स्यपालन भी होता है जिसे खाने के लिए धर्म-अपराधियों द्वारा अफसरों को निमंत्रित भी समय-समय पर किया जाता है। जन- मानस में इसके लिए रोष है।

 

इस सरोवर को गुप्तवंशी राजा आदित्यसेन ने 7वीं सदी में बड़ा कराया। कुछ इतिहासकार इसे वह पुष्करणी मानते हैं जिसके जल से उनका राज्याभिषेक किया गया। बुकनन के समय इसे मनोहर कुंड भी कहा जाता था।

 

पेंटिंग में दृष्टिगोचर इस सरोवर के दूसरी ओर बायीं तरफ जो बरगद का पेड़ नज़र आ रहा है वो अब विशालकाय हो गया है। इसकी भुजाओं को काटकर यहां समीप में सरकार ने धर्मशाला विकसित किया है।

 

इस बाल बरगद के दाहिनी ओर विशाल शिला पर एक मंदिर नज़र आ रहा है। जिसमें आगे का वरांडा 4 स्तंभों पर टिका हुआ दृष्टिगोचर है, वह अब बड़ा हो गया है। उसके मंदिर स्वरूप वाले गुम्बज को समाप्त कर उसे #सफाधर्म का मंदिर/धर्मशाला बना दिया गया है। 1956 में प्रकाशित ‘मंदार परिचय’ में डॉ. अभयकांत चौधरी लिखते हैं कि इस जगह पर सन 1949 में श्यामसुंदर धर्मशाला का निर्माण बाघमारी ग्राम की गूँजेश्वरी देवी ने अपने पुत्र की स्मृति में करवाया। इस बारे में उस समय एक शिलालेख भी था।

 

हो सकता है कि पेंटिंग में नज़र आ रहे इस मंदिर का किसी कारण से ध्वंश हुआ हो और वहां पहले धर्मशाला और बाद में सफाधर्म का पीठ निर्माण कर दिया गया हो।

अखंड सौभाग्य के लिए सौभाग्य सुंदरी व्रत

अखंड सौभाग्य के लिए सौभाग्य सुंदरी व्रत

 

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अशोक “प्रवृद्ध”

भारतीय पंचांग के अनुसार महीने में दो बार, पूर्णिमा और अमावस्या के बाद तीसरे दिन आने वाली तीसरी तिथि को तृतीया तिथि कहते हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली तृतीया को कृष्ण पक्ष की तृतीया और अमावस्या से आगे आने वाली तृतीया को शुक्ल पक्ष की तृतीया कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं में तृतीया तिथि माता गौरी अर्थात देवी पार्वती की जन्म तिथि मानी जाती है। तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी हैं। तृतीया तिथि कार्यों में विजय प्रदान करने वाली होने के कारण इस तिथि को जया तिथि के अन्तर्गत रखा गया है। किसी भी कार्य में विजय प्राप्त करने के लिए इस तिथि का चयन अतिशुभ और पूर्णतः अनुकूल माना जाता है। इस तिथि में सैन्य, शक्ति संग्रह, न्यायालयीन कार्यों के निष्पादन, शस्त्र क्रय, वाहन क्रय आदि कार्य करना शुभ माना जाता है। दोनों ही पक्षों की तृतीया तिथि को भगवान शिव के क्रीड़ारत रहने के कारण तृतीया तिथि में भगवान शिव का पूजन नहीं करने की मान्यता है। इसीलिए तृतीया तिथि को शिवपत्नी माता गौरी की पूजा का विधान है। यही कारण है कि माता गौरी अथवा भगवान शिव और उनकी अर्द्धांगिनी पार्वती की संयुक्त पूजन से संबंधित अनेक व्रत, पर्व व त्योहार तृतीया तिथि को मनाई जाती है। कज्जली तृतीया, गौरी तृतीया, हरितालिका तृतीया, सौभाग्य सुंदरी आदि अनेक व्रत और पर्वों का आयोजन किसी न किसी माह की तृतीया तिथि के दिन ही संपन्न होता है। चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर तृतीया, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन अक्षय तृतीया, ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया के दिन रम्भा तृतीया, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को तीज उत्सव, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को वाराह जयंती मनाए जाने की परंपरा है। इस तिथि में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए भी माता गौरी की पूजा करना कल्याणकारी माना गया है। मान्यता है कि मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को देवी पार्वती ने अपनी कठिन तपस्या के बल पर भगवान शिव को वर के रूप में प्राप्त किया था।

 

 

तत्पश्चात गणेश और कार्तिकेय नामक दो पुत्रों की माता बनी। उसी समय से माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए मार्गशीर्ष अर्थात अगहन महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को सौभाग्य सुंदरी व्रत की परंपरा शुरू हुई। सौभाग्य सुंदरी नामक यह व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को अखंड सौभाग्य की सौंदर्य की कामना से विशेषकर महिलाओं के द्वारा किया जाता है। सनातन धर्म में मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीया को मनाई जाने वाली सौभाग्य सुंदरी व्रत का महिलाओं के लिए बहुत ही खास महत्व है। मान्यता है कि यह महिलाओं को पुण्य फल प्रदान करता है और जीवन में आने वाले संकटों से भी बचाता है। इस वर्ष 2023 में मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 नवम्बर बृहस्पतिवार के दिन पड़ने के कारण इस दिन सौभाग्य सुंदरी व्रत मनाई जाएगी। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से भगवान शिव, माता पार्वती और उनके पुत्र गणेश व कार्तिकेय का पूजन करती हैं। दांपत्य जीवन में प्रसन्नता और संतान की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलने की मान्यता होने के कारण इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर विधि-विधान से भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन करती हैं।

 

 

सौभाग्य सुंदरी व्रत के दिन ब्रह्म बेला में जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर हाथ में जल ले व्रत का संकल्प लेकर और मंदिर की साफ-सफाई करना चाहिए। तत्पश्चात एक चौकी पर लाल अथवा पीले रंग का वस्त्र बिछ़ाकर उस पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति स्थापित करना चाहिए। फिर माता पार्वती को सिंदूर का तिलक लगाना और भगवान शिव व गणेश को हल्दी अथवा चंदन का तिलक करना चाहिए। एक जल से भरा कलश स्थापित कर धूप -दीप जलाकर पूजा आरम्भ करना चाहिए। सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा करना चाहिए। उनको जल से छींटे लगा फिर रोली से तिलक कर अक्षत लगाना चाहिए। मौली मोली चढ़ा चंदन व सिंदूर लगाना चाहिए। फिर फूलमाला और फल अर्पित करना चाहिए। गणेश को भोग के साथ सूखे मेवे, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और दक्षिणा भी चढ़ाना शुभ माना गया है। फिर नवग्रह की पूजा करना चाहिए। भगवान कार्तिकेय की पूजा करना चाहिए। तत्पश्चात देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा करना चाहिए।

 

माता पार्वती की पूजा के लिए देवी पार्वती की प्रतिमा को दूध, दही और जल स्नान कराकर उन्हें वस्त्र पहनाकर रोली चावल से तिलक करना चाहिए, मौली चढ़ाना चाहिए। उन्हें पुष्प अर्पित कर एक पान में दो सुपारी, दो लौंग, दो हरी इलाचयी, एक बताशा और एक रुपए रख चढ़ाकर माता पार्वती को सोलह श्रृंगार का सामान अर्पित करना चाहिए, घी का दीपक जलाना चाहिए और फिर मीठे का भोग लगा व्रत कथा का पठन अथवा श्रवण करना चाहिए। व्रत कथा पठन अथवा श्रवण के बाद चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है। माता पार्वती को अर्पित किया गया सोलह श्रृंगार बाद में व्रती महिलायें स्वयंके उपयोग में ला सकती है। देवी पार्वती की पूजा करते समय माता पार्वती से हाथ जोड़कर माता से दुखों और पापों का नाश करने, आरोग्य, सौभाग्य, ऋद्धि -सिद्धि और उत्तम संतान प्रदान करने की प्रार्थना करते हुए इस मंत्र का जाप करना चाहिए –
ॐ उमाये नम:।
देवी देइ उमे गौरी त्राहि मांग करुणानिधे माम् अपरार्धा शानतव्य भक्ति मुक्ति प्रदा भव।।

 

तत्पश्चात भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करना चाहिए। बेलपत्र, आंकड़े और धतुरा अर्पित करना चाहिए। रोली-चावल से तिलक करना चाहिए। फल- फूल अर्पित कर भोग लगाना चाहिए, सूखे मेवे, और दक्षिणा अर्पित करना चाहिए। भगवान शिव की पूजा करते समय ॐ नम: शिवाय- इस मंत्र का जाप करना चाहिए। माता पार्वती के तीज माता से संबंधित कथा का पाठ व श्रवण करना चाहिए। फिर उसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव की आरती करना चाहिए। पूजा के बाद अपने परिवार की खुशहाली की कामना करना चाहिए।

 

तीज और करवा चौथ की भांति महत्वपूर्ण सौभाग्य सुंदरी व्रत जीवन में सकारात्मकता और सौभाग्य लाने के लिए मनाया जाता है। महिलाएं पति और संतान सुख के लिए पूजा-अनुष्ठान कार्य करती हैं। विवाह दोष से मुक्त होने और विवाह में देरी को दूर करने के लिए अविवाहित कन्याएं भी इस व्रत को करती हैं। मांगलिक दोष और कुंडली में प्रतिकूल ग्रह दोषों को समाप्त करने के लिए भी यह व्रत किया जाता है। सौभाग्य सुंदरी व्रत महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान होता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से विवाहित महिलाओं के घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अखंड सौभाग्य बना रहता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार सौभाग्य सुंदरी व्रत करने से वैवाहिक जीवन का दोष भी दूर होता है और पति-पत्नी में प्रेम बना रहता है। यदि किसी लड़की के विवाह में देरी हो रही हो तो वो परेशानी भी ये व्रत करने से दूर हो सकती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सौभाग्य सुंदरी व्रत करने से पति और संतान की उम्र बढ़ती है और उनके जीवन में खुशियां बनी रहती हैं। जिन महिलाओं को वैवाहिक जीवन में कष्टों का सामना करना पड़ रहा है और जिन अविवाहित लड़कियों के विवाह में देरी हो रही हो उन्हें ये व्रत अवश्य करना चाहिए।

बेहतर न्यायिक व्यवस्था के लिए संघर्ष के संकल्प के साथ तीसरा ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन अधिवेशन संपन्न

बेहतर न्यायिक व्यवस्था के लिए संघर्ष के संकल्प के साथ तीसरा ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन अधिवेशन संपन्न

AILU का तीसरा महाराष्ट्र राज्य सम्मेलन मुंबई में संपन्न हुआ। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एवं राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट. पी.वी. सुरेंद्रनाथ ने उद्घाटन करते हुए कहा कि – “देश में सांप्रदायिक विचारधारा पनप रही है और इसे आरएसएस और प्रतिक्रियावादी ताकतें बढ़ावा दे रही हैं। इससे लोकतंत्र को खतरा पैदा हो गया है. भारत ने विश्व का सबसे बड़ा संविधान अपनाया है। यह लोकतंत्र, समाजवाद, समानता, धर्मनिरपेक्षता और समान न्याय मूल्यों पर आधारित है। ऐसा समावेशी सहिष्णु लोकतांत्रिक भारतीय संविधान और भारतीय कानूनों की भाषा बदलने का काम शासकों द्वारा किया जा रहा है। यह बेहद खतरनाक और देश की एकता को तोड़ने का संकेत है. हम वकील लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं, न्याय के साथ ही इस देश के लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए लड़ना हमारा काम है। इसके लिए हमेशा तैयार रहें’।

बाबासाहब वावलकर

ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन के महाराष्ट्र राज्य सचिव चंद्रकात बोजगर ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि, राज्य में संगठन के कार्यों की समीक्षा, कार्यक्रमों और आंदोलनों, जिलेवार कार्य समीक्षा, संगठनात्मक अवलोकन और आगे की चुनौतियों और कार्यों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट पर 12 प्रतिनिधियों ने चर्चा की. इसमें उन्होंने वकीलों और न्यायपालिका की समस्याओं और सुधारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किये। एड. प्रदीप साल्वी, एड. बाबासाहेब वावलकर और एड.चंद्रकांत बोजगर ने अध्यक्ष मंडल के कार्यों का संचालन किया। इस सत्र में पांच महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश व पारित किये गये.

पहला प्रस्ताव केरल राज्य सरकार और केरल बार काउंसिल से संबंधित था, जो 30 साल से कम उम्र के, तीन साल से कम अनुभव वाले और ₹1 लाख से कम की वार्षिक आय वाले कनिष्ठ वकीलों को ₹5000 का मासिक वजीफा दे रहे हैं। इसी आधार पर यह मांग करने का निर्णय लिया गया कि महाराष्ट्र में कनिष्ठ वकीलों को भी कुछ वर्षों के लिए वजीफे के रूप में वित्तीय सहायता दी जानी चाहिए।

 

 

राजस्थान विधानसभा ने पेशेवर कामों के दौरान हिंसा, धमकी, उत्पीड़न और कदाचार मुकदमेबाजी के शिकार अधिवक्ताओं के लिए राजस्थान अधिवक्ता संरक्षण विधेयक, 2023 पारित किया है। इस सम्मेलन में उनका स्वागत किया गया। एड. मोहन कुरापति ने प्रस्ताव रखा कि महाराष्ट्र सरकार को भी राज्य में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट 2023 लागू करना चाहिए, इस प्रस्ताव का अनुमोदन एड. अनिल वासम ने किया। अध्यक्ष मंडल की ओर से एड. चंद्रकांत बोजगर ने इजराइल के गाजा युद्ध को रोकने और फिलिस्तीन को आजाद कराने के लिए शांति प्रस्ताव रखा.

हजारों लोग सर्वोच्च न्यायालय में अपील नहीं करते हैं और इस प्रकार न्याय से वंचित रह जाते हैं क्योंकि दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय में मामला दायर करना दूरी, लागत और समय के मामले में आम आदमी के लिए अप्राप्य है। इसलिए देश के अलग-अलग राज्यों में सुप्रीम कोर्ट की बेंच का होना जरूरी है. यह प्रस्ताव त्वरित, सस्ते और प्रभावी न्याय के लिए महाराष्ट्र के मुंबई में सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ की स्थापना के लिए लड़ने के लिए सभी वकीलों के एक साथ आने के संबंध में पारित किया गया था।

करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुरेन्द्रनाथ

 

अदालत के परिसर में प्रशासनिक कार्यालयों, मध्यस्थता केंद्र, उचित पार्किंग स्थान, कैंटीन और वातानुकूलित पेयजल की कमी है, पुरुष और महिला,  तृतीयपंथी और विकलांग व्यक्तियों के लिए पर्याप्त शौचालय, महिला वादियों द्वारा नवजात शिशुओं को स्तनपान करा सकने के लिए अलग कमरे की भी आवश्यकता है। जजों और स्टाफ की कमी से अदालती कामकाज और गति पर असर पड़ता है. खराब बजटीय आवंटन, धन की कमी, धन का कम उपयोग और जिम्मेदारी लेने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के कारण, न्यायपालिका में एक बड़ा ढांचागत अंतर और आवश्यक सुविधाओं की कमी है। न्यायिक बुनियादी ढांचे और धन के उपयोग को बढ़ावा देने की कोई योजना नहीं है। बुनियादी ढांचे की समस्याओं को प्राथमिकता देने के लिए, एड.विशाल जाधव ने कोर्ट में वकीलों की बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे एकमत से पारित किया गया।

 

 

सचिव ने प्रतिनिधि सत्र का उत्तर दिया जहां रिपोर्ट पर चर्चा की गई। इसके बाद सचिव की रिपोर्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गयी. साथ ही उच्चन्यायालय का कामकाज अंग्रेजी के साथ-साथ मराठी में भी हो, इसके लिए संगठन ने आगे संघर्ष करने की घोषणा की. अगले तीन वर्षों के लिए 21 सदस्यों का एक नया राज्य समिति पदाधिकारी और कार्यकारी बोर्ड चुना गया। अध्यक्ष के रूप में एड. बाबासाहेब वावलकर, उपाध्यक्ष एड.आदिनाथ तिवारी, महासचिव एड. चंद्रकांत बोजगर, संयुक्त सचिव एड. प्रदीप साल्वी और कोषाध्यक्ष एड.विश्वास अवघाड़े के रूप में नए पदाधिकारी चुने गए एड. किशोर सामंत, एड. विशाल जाधव, एड.सुरेश वाघचौरे, एड.रवीन्द्र शिरसाट, एड. रवीन्द्र भवर, एड.संजय पांडे, एड.अनिल वासम, एड.संध्या पाटिल, एड.स्वर शेखर को राज्य कमेटी सदस्य के रूप में चुना गया. 28, 29, 30 दिसंबर को कोलकाता में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए 5 प्रतिनिधियों का चयन किया गया. सत्र का समापन एआईएलयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल चौहान ने किया।

– एड. अनिल वासम (महाराष्ट्र राज्य समिति सदस्य, एआईएलयू)

तेजी से बढ़ती वैश्विक जनसंख्या चिंता का विषय

तेजी से बढ़ती वैश्विक जनसंख्या चिंता का विषय

 

 

सिंह वैस सुरेश सिंह बैस शाश्वत
सुरेश सिंह बैस ’शाश्वत’

प्राचीन काल में संसार के सभी देशों में विवाह और संतान की उत्पत्ति को महत्व दिया जाता था। भारत में विवाह पर अग्नि की परिक्रमा करते समय वर कन्या कहा करते थे- पुयान विन्दावहे। अर्थात् बहुत प्राप्त करें। उस समय जनसंख्या कम रहती थी, अतः जनसंख्या में वृद्धि आवश्यक थी, लेकिन आज सारे संसार की स्थिति, बदल गई है, फलतः इस पर रोक लगाना अति आवश्यक हो गया हैं, खासकर भारत जैस विशाल जनसंख्या वाले देश में जिसकी आबादी विश्व में सर्वाधिक पहले नंबर पर है। उस पर विकासशील (हालांकि अब अर्ध विकसित देशों की श्रेणी में आ चुका है भारत ) देश होने के नाते जनसंख्या की अतिशय वृद्धि से अनेक प्रकार की समस्यायें उत्पन्न हो रही हैं।
आज तो समस्या यह है कि अगले कुछ दशकों में विश्व की जनसंख्या विस्फोट के कगार पहुँचने वाली है। इस बढ़ती हुई जनसंख्या को लेकर विश्व के विचारक चिर्तित है कि इस अतिरिक्त जनसंख्या के लिए काम, भोजन, वस्त्र, आवास और शिक्षा की व्यवस्था कैसे की जा संकेगी ? आइये इसे सिर्फ भारतीय परिप्रेक्ष्य में ही देखे। हमारे देश की जनसंख्या सुरसा के मुंह अथवा द्रौपती के चीर हरण की तरह लगातार बढ़ती चलनी जा रही है। यों तो संपूर्ण विश्व इस समस्या से घिरा है, किंतु भारत तो इस समस्या से बुरी तरह आंक्रांत है।

 

 

1981 की जनगणना के समय भारत की जनसंख्या अड़सठ करोड़ अड़तालीस लाख दस हजार अंठ्ठावन थी अर्थात् 1971 की जनसंख्या की तुलना में चौबीस दशमलव सात पांच प्रतिशत की वृद्धि। स्वंतंत्रता के पूर्व अखंड भारत की जनसंख्या एकत्तीस करोड़ सत्तासी लाख थी, किन्तु 1971 की जनगणना में विभाजित भारत की जनसंख्या छत्तीस करोड ग्यारह लाख हो गयी। भारत की पहली जनसंख्या गणना सन् आजादी पूर्व 1872 में की गई थी उस समय अखण्ड भारत की जनसंख्या अठ्ठारह करोड़ चार लाख थी, लेकिन भारत की जनसंख्या 1991 की जनगणना के अनुसार चौरासी करोड़ चार लाख अंट्ठावन हजार हो गई। और 1999 दिनांक 11 जुलाई को यह अंट्ठानबे करोड़ से भी अधिक हो गई और आज सन 2023 में तकरीबन एक अरब 41 करोड़ को पार कर रही है।

 

भारत एंव विश्व की जनसंख्या वृद्धि दर को देखते हुए एक वैज्ञानिक विश्लेषण में कहा गया है कि भारत की जनसंख्या वृद्धि दर इसी प्रकार बढ़ती रही, तो वह शीघ्र सर्वाधिक जनसंख्या के वाले देश के साथ जनसंख्या विस्फोट वाला देश बन जायेगा और भारत की आबादी 2050 में एक अरब 60 करोड़ से भी अधिक हो जायेगी, जबकि आज चीन सर्वाधिक जनसंख्या में दूसरे नंबर का देश है। साथ ही विश्व की जनसंख्या भी उस समय पचास अरब के आसपास पहुंच जायेगी। इस संबंध में माल्थस्(वैज्ञानिक ) का कहना है कि जनसंख्या को यदि रोका न गया तो काफी असामान्य स्थिति उत्पन्न हो जाएगी और ऐसी स्थिति तो निरंतर उस समय तक बनी रहेगी जब तक उस पर सीमित स्थान और सीमित भोजन के कारण स्वयं रोक नही लग जाती। इसलिए एक निश्चित सीमा के पश्चात् जनसंख्या वृद्धि रुक जायेगी। किन्तु आज के वैज्ञानिक एवं आधुनिक युग में उत्पादन के अत्याधुनिक तकनीको द्वारा भोजन निरंतर उपलब्ध हो रहा है, वहीं रोग भी कम हो रहे हैं।

 

यदि होते भी हैं तो उनका उपचार संभव हो गया है। इस प्रकार मृत्युदर कम हो गई है। फलस्वरुप जीवन क्षमता बढ़ जाने के कारण जनसंख्या वृद्धि दर तेज होती जा रही है। इसी प्रकार यह जनसंख्या वृद्धि बढ़ती रही तो हमारी पृथ्वी पर रहने का स्थान, प्राकृतिक स्त्रोत, खाद्यान्न की कमी, पर्यावरण का संतुलन इत्यादि की कमी हो जायेगी, एक  असंतुलन पैदा हो जाएगा, गरीबी अपनी चरमोत्कर्ष में पहुंच जायेगी, रोजगार के अवसर बिल्कुल समाप्त प्रायः हो जायेंगें। उपचार के साधन कम हो जायेगें। इत्यादि अनेक प्रकार से मनुष्य का सामान्य जीवन पृथ्वी से खत्म हो जायेगा। जनसंख्या के इस प्रकार से विस्फोट, वृद्धि दर से सारा विश्व चिंतित है और इसके लिए आज से ही नहीं वरन पिछले कई सालों से कई देशों ने अपने यहां प्रतिबंधात्मक उपाय अपनाने शुरु कर दिये हैं ,इस पर कुछ सफलतायें भी मिली हैं लेकिन पर्याप्त सफलता नहीं मिल सकी है। भारत सरकार ने भी इस संबंध में कुछ कठोर कदम उठाये हैं, जैसे युवक युवतियों के विवाह की उम्र अब युवक के लिए 21 वर्ष और युवती के लिए 18 वर्ष की होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे कम उम्र में  विवाह करने वालों पर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही का प्रावधान है। साथ ही भारत सरकार ने परिवार नियोजन का राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक कार्यक्रम चला रखा है, जिस की सफलता के लिए दो उपाय है।

 

आत्मसंयम और जन्मनिरोध के कृत्तिम साधनों का उपयोग। कृत्तिम साधनों के प्रयोग में त्रुटि असावधानी हो सकती है, इसलिए नसबंदी और बंध्याकरण, गर्भनिरोध का अधिक सुरक्षित साधन अपनाया जा रहा है। यद्यपि हम अनेक विधियों से जनसंख्या पर रोक लगा सकते है, लेकिन इसके अतिरिक्त आम नागरिकों को भी इस ओर गंभीरता से प्रयास एवं अपनी सोच पर भी परिवर्तन लाना होगा। कुछ समाजिक तथा धार्मिक विश्वासों में भी परिवर्तन लाना आवश्यक है जैसे- 1. यह सोचना कि संतान भगवान की देन है , इस भावना पर मनुष्य को रोक लगाना चाहिए। 2. छोटी उम्र में विवाह नहीं करना चाहिए। 3. एक मनुष्य को एक से अधिक स्त्रियों के साथ विवाह नहीं करना चाहिए। 4. एक या दो से अधिक बच्चों का जन्म देने से स्त्री स्वास्थ्य तथा शिशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उसे ध्यान रखना चाहिए। नियोजित परिवार समृद्धसंसार अर्थात इस मूलमंत्र को गांठ बांधकर हम आप सभी को रख लेना होगा। तभी तो मनुष्य सुखी रह सकता है अन्यथा नहीं।

दूसरे देशों मे दी जाने वाली सज़ा पर जरा गौर फरमाए- लव जिहाद 

दूसरे देशों मे दी जाने वाली सज़ा पर जरा गौर फरमाए- लव जिहाद 

वीना आडवाणी तन्वीनागपुर, महाराष्ट्र
वीना आडवाणी तन्वी नागपुर, महाराष्ट्र
आज बहुत ही गहरी सोच मे डूबी थी और मैं यही सोच रही थी कि आखिर, क्या कारण है कि हमें कभी भी विदेशों से बलात्कार, लड़कियों की हत्या बलात्कार के बाद, क्यों इस प्रकार की खबर सुनने को नहीं मिलती है कि फलाने देश में लड़कियों का बलात्कार हुआ या लड़की का बलात्कार करने के बाद बहुत ही बुरी तरीके से सरेआम कत्ल कर दिया गया। बलात्कार के लिए लड़कियों का कहीं पर भी अपहरण किया गया। लड़कियों ने शादी करने से मना कर दिया हो तो उन्हें सरेआम रास्ते पर मार देना इस तरह की खबर भी हमने कभी नहीं सुनी, चलती बस में लड़की का बलात्कार कर कर निर्भया हत्याकांड जैसी खबर तो केवल भारत देश में ही सुनने को मिली सरे राह पर पेट्रोल जलाकर एक पशु चिकित्सक जो कि महिला थी उसको भी जला दिया गया आखिर क्यों? सिर्फ आतंकी क्षेत्रों को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों से इस तरह की या यह कहें कि दूसरे देशों से इस तरह की खबर नहीं आती उदाहरण के तौर पर चीन जापान सिंगापुर आदि ऐसे कई प्रतिष्ठित देश है जहां से इस तरह की खबर नहीं आती।
यदि वर्ष 2022 से देखा जाए तो 2023 के आते आते ही न जाने कितनी बेटियां बलात्कार के बाद मौत के घाट उतार दी गई। और फिर इस तरह के जघन्य हत्याकांड को नाम दे दिया गया लव जिहाद। जब इस तरह के हत्याकांड हुए तो दोष हिंदू बेटियों को दिया गया कि वह छोटे-छोटे तंग कपड़े पहनती हैं खुले विचारों की है देर रात तक घूमती हैं वगैरह-वगैरह। जबकि इसके विपरीत है देखा जाए तो विदेश में रहने वाली महिलाएं भारतीय महिलाओं से भी अधिक खुले विचारों की है। देर रात तक पबों में जाना, शराब पीना, छोटे-छोटे बहुत ही ज्यादा तंग कपड़े पहनना, देर रात तक सड़कों पर घूमना इत्यादि पर अगर हम गौर फरमाए तो भारतीयों से अधिक तो विदेश में रहने वाली महिलाएं आजाद हैं या यह कहें कि खुले विचारों वाली है तो वहां महिलाएं इतनी बेफिक्र होकर कैसे घूम सकती हैं। हमारे भारत देश में चलिए पूरी तरह नहीं मानते हैं परंतु 60% महिलाएं आज भी भारतीय परंपराओं को अपनाते हुए अपने तन को ढक कर रखती है। उसके बावजूद भी भारत देश में इस तरह के जघन्य अपराध होते हैं विदेशी महिलाओं के साथ इस तरह के जघन्य अपराध क्यों नहीं होते हैं। जानते हैं इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है। उसका कारण है हमारे देश की न्याय प्रक्रिया में कमी हमारे देश मे बलात्कार के अपराधी को सजा देने में कमी।
आज मैं इसी खोज में गूगल पर सर्च करने लगी कि हर देश में बलात्कारी के लिए क्या सजा तय की गई है। सबसे अधिक जो सजा मैंने इस्लाम धर्म में पाई है, वह यह है कि यदि कोई इस्लाम धर्म का किसी महिला के साथ बलात्कार करता है तो उसके गुप्तांग को ही काट दिया जाता है या क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है ताकि वह जिंदगी भर किसी के भी काबिल ना रहे और इस तरह का जघन्य अपराध ना कर सके।
जब मैंने चीन देश के बलात्कार के संबंध में दी जाने वाली सजा को पढ़ा तो चौंकाने वाला तथ्य सामने यहां आया कि बलात्कारी को फांसी की सजा दी जाती है साथ ही उसके गुप्ता को भी क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है।
मिस्र देश में भी सरेआम दुनिया के सामने गोली मार दी जाती है और गुप्तांग को क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है।
इस्लाम धर्म में बलात्कार के बदले में दी जाने वाली सजा को सुनकर कोई भी बलात्कार करने से पहले लड़का दस बार सोचता है। उसकी रूह सोच कर ही कांप उठती है कि मैं बलात्कार कैसे कर सकता हूं यदि मैंने अपने जिस्म की भूख मिटाने के लिए बलात्कार किया तो मेरा गुप्तांग ही काट दिया जाएगा। जिसके डर से वह ऐसा अपराध कर ही नहीं पाता है।
हमारे हिंदू समुदाय में ऐसी कोई भी सजा तय नहीं की गई है खास करके भारत देश में जिसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि इस्लाम धर्म के लड़के अपना नाम बदलकर लड़कियों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और उनके साथ बलात्कार कर उन्हें बहुत ही बुरी तरीके से मार रहे हैं और नाम दे रहे हैं लव जिहाद जानते हैं इसका कारण क्या है इसका कारण है हारमोंस, आज की नव युवा पीढ़ी मे हर किसी को अपनी एक गर्ल्फ्रेंड चाहिए। सभी को पता है कि इस्लाम धर्म में यदि उन्होंने अपने ही धर्म की किसी लड़की को फसाया और उसके साथ कोई ऐसा अपराध किया तो उनके गुप्तांग को काट दिया जाएगा या उन्हें फांसी की सजा दी जाएगी। इसलिए अब क्यों वह अपने ही धर्म की लड़कियों को नहीं फंसाते। इस विषय पर गहराई से सोच कर देखिए गा और मेरी तरह आप भी गूगल पर एक बार सर्च करिएगा कि विभिन्न देशों में बलात्कार की सजा क्या है और हमारे भारत देश में बलात्कार की सजा क्या है जमीन आसमान का अंतर पाएंगे दूसरी कमी हमारे देश में मिलने वाले न्याय की प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चलती है जबकि दूसरे देशों में न्याय प्रक्रिया बहुत ही तेजी से चलती है जिसके चलते वहां पर बहुत सारे केस सालों साल तक नहीं चलते।
जैसा कि मैंने आपको बताया था की बलात्कार का कारण हारमोंस है, जी हां जैसे-जैसे नव युवकों की उम्र बढ़ती जाती है उनके शरीर में हारमोंस बदलते रहते हैं इसी हारमोंस के बदलने के कारण लड़कों का या लड़कियों का विपरीत लिंग की तरफ आकर्षित होना स्वभाविक है। इसे तो कोई भी नहीं बदल सकता बस यह है कि हिंदुओं में बलात्कार के लिए कोई कड़ा नियम ना होने के कारण आए दिन कभी श्रद्धा, कभी साक्षी, तो कभी कोई ओर इस बलात्कार की सूली पर चढ़ती ही रहेंगी हिंदु बेटियां और ऐसे ही हिंदू लड़कियों की हत्याएं होती भी रहेंगी। इस्लाम धर्म की लड़कियों के साथ ऐसा इसलिए नहीं होता है क्योंकि इस्लाम धर्म के अंतर्गत हर कोई जानता है कि यदि हमने इस तरह का अपराध किया तो हमारे या तो गुप्तांग काट दिए जाएंगे या तो हमें फांसी के तख्ते पर चढ़ा दिया जाएगा या तो हमें ऐसा बना दिया जाएगा की हम ताउम्र अपनी औलाद के लिए तरसते रहें मतलब नपुंसक।
अब आप सोचिएगा, हार्मोन्स का बदलना या उसे रोकना हमारे हाथ में नही है। परंतु हिंदु धर्म मे भी बलात्कार के लिए कड़ी सज़ा को लाना बहुत ही जरूरी है। ताकी फिर कोई भी, किसी भी धर्म का लड़का हिंदू बेटियों को छूने से पहले कतराए और ना हो फिर से कोई भी कहीं भी बेटी लव जिहाद का शिकार।
फिर आप ही सभी देखियेगा दूसरे धर्म कि बेटियों बेटों की तरह भी हिंदु धर्म की बेटी बेटों की तरफ कोई भी आंख उठाकर नहीं देखेगा। देखने से पहले वो दी जाने वाले क्रूरता से भरी दी जाने वाली सजा के बारे में सोचेगा। जिस तरह एक इस्लाम धर्म का लड़का अपने ही धर्म की लड़कियों की ओर सजा के डर से नज़र उठा के नहीं देखता ठीक उसी तरह हमारे हिंदुओं में भी ऐसी ही सजा दी जाए की कोई भी धर्म का लड़का हिंदु न्याय प्रक्रिया की ओर पहले ध्यान दे और उसकी रूह कांप उठे किसी अपराध मतलब बलात्कार को करने से पहले।
वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
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Education News : बिहार में शिक्षक नियोजन के लिए नई नियमावली जारी l New rules issued for teacher planning in Bihar

Education News : बिहार में शिक्षक नियोजन के लिए नई नियमावली जारी l New rules issued for teacher planning in Bihar

 

Patna : बिहार सरकार ने सूबे में शिक्षक नियुक्ति की सारी प्रक्रिया ही बदल दी है। नियोजित शिक्षक नियुक्त करने का जो सिलसिला नीतीश कुमार ने शुरू किया था। उसे नीतीश कुमार की कैबिनेट ने ही समाप्त कर दिया। सोमवार को नीतीश कैबिनेट की बैठक में राज्य में नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली को मंजूरी दे दिया गया। इसके बाद शिक्षक नियुक्ति की सारी प्रक्रिया ही बदल गयी।राज्य सरकार अब खुद आयोग के जरिये शिक्षकों की नियुक्ति करेगी। शिक्षक राज्य के कर्मचारी होंगे। यानि अब नियोजन पर नियुक्ति नहीं होगी बल्कि नियमित बहाली होगी। सबसे बड़ी बात ये है कि अब मार्क्स के आधार पर नियुक्ति नहीं होगी बल्कि परीक्षा लेकर शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी। फर्स्ट बिहार आपके सामने राज्य सरकार की नयी शिक्षक नियुक्ति नियमावली को रख रहा है। देखिये कब कैसे होगी नियुक्ति और क्या सब होंगी नियम और शर्तें।

 

संवर्ग का गठन

बिहार सरकार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग का गठन करेगी. इसके जरिये ही पूरे बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी. बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के नियंत्रणाधीन राजकीय, राजकीय बुनियादी विद्यालय, राजकीयकृत और प्रोजेक्ट कन्या विद्यालय में नियुक्त होने वाले विद्यालय अध्यापक का संवर्ग होगा. प्राथमिक और मध्य विद्यालय के मूल कोटि और स्नातक कोटि के विद्यालय अध्यापक तथा माध्यमिक विद्यालय और उच्च माध्यमिक विद्यालय में विषयवार विद्यालय अध्यापक का अलग-अलग संवर्ग होगा. यह संवर्ग जिला स्तर का होगा।बिहार सरकार शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग का गठन करेगी. इसके जरिये ही पूरे बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी. बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के नियंत्रणाधीन राजकीय, राजकीय बुनियादी विद्यालय, राजकीयकृत और प्रोजेक्ट कन्या विद्यालय में नियुक्त होने वाले विद्यालय अध्यापक का संवर्ग होगा. प्राथमिक और मध्य विद्यालय के मूल कोटि और स्नातक कोटि के विद्यालय अध्यापक तथा माध्यमिक विद्यालय और उच्च माध्यमिक विद्यालय में विषयवार विद्यालय अध्यापक का अलग-अलग संवर्ग होगा. यह संवर्ग जिला स्तर का होगा।नयी नियमावली के मुताबिक विद्यालय अध्यापक के सभी पद सीधी नियुक्ति से भरे जाऐंगे. विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए ये सब योग्यता होनी चाहिये.

 

आवेदन करने वाला भारत का नागरिक हो और बिहार राज्य का स्थायी निवासी हो 

विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् द्वारा समय-समय पर निर्धारित शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक योग्यता होनी चाहिये. विशेष विद्यालय अध्यापक के लिए अर्हता भारतीय पुनर्वास परिषद् के अनुरूप होनी चाहिये.

आवेदन करने वाले को राज्य सरकार और केन्द्र सरकार द्वारा समय-समय पर आयोजित होने वाले शिक्षक पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण होना चाहिये. हालांकि साल 2012 से पहले नियुक्त और कार्यरत शिक्षक, जो दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण होंगे, के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा में उत्तीर्णता अनिवार्य नहीं होगी.

विषय विशेष के लिए अलग से विशेष अर्हता का निर्धारण विभाग द्वारा समय-समय पर किया जायेगा।

 

आवेदक की उम्र 

प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय में विद्यालय अध्यापक की नियुक्ति के लिए नियुक्ति वर्ष की पहली अगस्त को अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं कोटिवार अधिकतम आयु सीमा वही होगी जो राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर तय की जायेगी. इसी प्रकार माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्ति हेतु नियुक्ति वर्ष की पहली अगस्त को अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष एवं कोटिवार अधिकतम आयु सीमा वही होगी जो राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर विहित की जाय।

 

इस नियमावली के लागू होने के पहले पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को इस नियमावली के लागू होने के पश्चात् नियुक्ति के प्रथम समव्यवहार में अधिकतम आयु सीमा 10 वर्ष की छूट देय होगी. जिस विनिर्दिष्ट विषय या विषय समूह में पात्रता परीक्षा नहीं ली गई है, उस विनिर्दिष्ट विषय या विषय समूह के पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को नियुक्ति के प्रथम समव्यवहार में अधिकतम आयु सीमा में 10 वर्षों की छूट देय होगी।

लेकिन पंचायतीराज संस्था और नगर निकाय संस्था के तहत नियुक्त और कार्यरत शिक्षकों के लिए अधिकतम आयु की सीमा शिथिल करने हेतु राज्य सरकार द्वारा अलग से निर्णय लिया जा सकेगा.

 

आरक्षण

राज्य सरकार के अधीन सीधी नियुक्ति में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा लागू आरक्षण का प्रावधान प्रभावी होगा. लेकिन प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय के मूल कोटि एवं स्नातक कोटि के विद्यालय अध्यापक के पद पर प्रत्येक विषय में न्यूनतम 50 प्रतिशत महिला अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जायेगी. विषम संख्या रहने पर अंतिम पद महिला अभ्यर्थी के लिए चिह्नित किया जायेगा। प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय के मूल कोटि एवं स्नातक कोटि के विद्यालय अध्यापक के लिए विषयवार आरक्षण रोस्टर का संधारण समेकित रूप से जिला स्तर पर किया जायेगा. इसी प्रकार माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यालय अध्यापक के लिए विषयवार आरक्षण रोस्टर का अलग-अलग संधारण जिला स्तर पर किया जायेगा. विद्यालय अध्यापक का आरक्षण- समाशोधन से संबंधित कार्य जिला पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा. इस नियमावली के लागू होने के बाद प्रथम समव्यवहार में विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति हेतु आरक्षण बिन्दु 01 से रोस्टर प्रारंभ होगा।

 

नियुक्ति की प्रक्रिया 

शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालय अध्यापक के पद पर सीधी नियुक्ति हेतु जिला स्तर पर रिक्त पदों की गणना कर रोस्टर क्लीयरेंस के साथ आरक्षण कोटिवार अधियाचना आवश्यकतानुसार आयोग को भेजी जायेगी. सीधी भर्ती हेतु प्राप्त अधियाचना के आलोक में आयोग रिक्तियों की संख्या विज्ञापित करेगा. आयोग द्वारा विज्ञापित आवेदन पत्र में विद्यालय अध्यापक-अभ्यर्थी द्वारा योग्यता से संबंधित स्वघोषणा के आधार पर उनकी उम्मीदवारी का मूल्यांकन किया जाएगा।

 

परीक्षा लेकर होगी नियुक्ति, तीन बार मिलेगा मौका

शिक्षक नियुक्ति के लिए बना आयोग परीक्षा लेकर शिक्षकों की नियुक्ति करेगा. परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम का निर्धारण आयोग द्वारा प्रशासी विभाग के परामर्श से किया जाएगा. निर्धारित पाठ्यक्रम के आलोक में परीक्षा का आयोजन, प्रश्न पत्रों का निर्धारण, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन तथा परीक्षाफल का प्रकाशन आयोग द्वारा किया जाएगा. परीक्षा के पैटर्न का निर्धारण आयोग द्वारा किया जायेगा, जिसमें आवश्यकतानुसार विभाग से परामर्श लिया जा सकेगा। उक्त परीक्षा के लिए अर्हतांक नियत करने का विवेकाधिकार आयोग को होगा. कोई अभ्यर्थी इस नियमावली के अन्तर्गत अधिकतम तीन बार परीक्षा में भाग ले सकेगा।

 

आयोग द्वारा ली गयी उक्त परीक्षा के आधार पर की गई अनुशंसा के आलोक में नियुक्ति की जायेगी. आयोग द्वारा की गई अनुशंसा, नियुक्ति का अधिकार तब तक नहीं प्रदान करेगी, जब तक की यथा आवश्यक प्रमाण पत्रों की जांच के उपरांत प्रशासी विभाग संतुष्ट न हो जाए कि अभ्यर्थी विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए सभी दृष्टियों से उपयुक्त है।

 

नियोजित शिक्षकों के लिए अलग प्रावधान

सरकार ने नयी नियमावली में कहा है कि पंचायतीराज संस्था एवं नगर निकाय संस्था अंतर्गत नियुक्त एवं कार्यरत शिक्षक इस संवर्ग में नियुक्ति के लिए जरूरी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र होंगे. उनके संबंध में आवश्यकतानुसार प्रक्रिया का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा अलग से किया जायेगा।

 

प्रमाण पत्रों की जाँच

आयोग द्वारा चयनित शिक्षक जिलों में नियुक्ति प्राधिकार के पास भेजे जायेंगे. नियुक्ति प्राधिकार का यह दायित्व होगा कि वे नियुक्ति पत्र निर्गत करने के पहले शैक्षणिक / प्रशैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव संबंधी प्रमाण पत्रों सहित अन्य प्रमाण पत्रों की यथाआवश्यक जाँच करा लेंगे. लेकिन कार्यहित में औपबंधिक नियुक्ति पत्र निर्गत किया जा सकता है एवं विभाग द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अन्दर प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा सकता है. प्रमाण पत्र जाली या गलत पाए जाने की स्थिति में नियुक्ति रद्द कर करते हुए वेतनादि के मद में दिए गए राशि की वसूली बिहार एण्ड उड़िसा पब्लिक डिमान्ड रिकॉवरी एक्ट 1914 के प्रावधानों के तहत करते हुए अन्य कानूनी कार्रवाई की जायेगी।

 

परिवीक्षा अवधि :

सीधी भर्ती से नियुक्त किए जाने वाले विद्यालय अध्यापकों के लिए परिवीक्षा अवधि, योगदान की तिथि के प्रभाव से दो वर्षों के लिए होगी. परिवीक्षा अवधि संतोषजनक नहीं पाये जाने की दशा में परिवीक्षा अवधि का विस्तार एक वर्ष के लिए किया जा सकेगा. यदि विस्तारित अवधि में भी सेवा संतोषजनक नहीं पायी जायेगी तो नियुक्ति प्राधिकार ऐसे विद्यालय अध्यापक को सुनवाई का एक अवसर देते हुए उन्हें सेवामुक्त कर सकेगा. परिवीक्षा अवधि में विद्यालय अध्यापक को विभाग द्वारा विहित सांस्थिक या अन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करना होगा. प्रशिक्षण का कैलेंडर एवं पाठ्यक्रम विभाग द्वारा अलग से निर्धारित किया जायेगा।

 

सेवा की सम्पुष्टि 

परिवीक्षा अवधि संतोषजनक रूप से पूरा करने, प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने और शैक्षणिक / प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र आदि की जांच होने पर सेवा में सम्पुष्टि की जा सकेगी.

 

शिक्षकों की वरीयता सूची

प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के विद्यालय अध्यापक की विषयवार समेकित वरीयता सूची होगी. माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के विद्यालय अध्यापक की विषयवार वरीयता सूची अलग-अलग होगी. आपसी वरीयता सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा निर्धारित सिद्धांत के अनुरूप होगी. विद्यालय अध्यापक की वरीयता सूची जिला स्तर पर संधारित की जाएगी।

 

ऐसे होगी ट्रांसफर पोस्टिंग

विद्यालय अध्यापक का पद स्थानान्तरणीय होगा. मंत्रिमण्डल सचिवालय विभाग एवं शिक्षा विभाग द्वारा स्थानान्तरण के निमित्त समय-समय पर निर्गत दिशा-निर्देश के आलोक में स्थानान्तरण की कार्रवाई संबंधित संवर्गीय पद पर संबंधित नियुक्ति प्राधिकार के द्वारा किया जा सकेगा. विद्यालय अध्यापक का अन्तर जिला स्थानान्तरण ऐच्छिक / प्रशासनिक / शैक्षणिक दृष्टिकोण से हो सकेगा. दूसरे जिले में ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय के संदर्भ में सक्षम प्राधिकार निदेशक, प्राथमिक शिक्षा होंगॉ. वहीं माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय के संदर्भ में सक्षम प्राधिकार निदेशक, माध्यमिक शिक्षा होंगे. अन्तर जिला स्थानान्तरण के फलस्वरूप संबंधित स्थानान्तरित विद्यालय अध्यापक की वरीयता स्थानान्तरित जिला में उनके नियुक्ति वर्ष से संबंधित विद्यालय अध्यापक की विषयवार वरीयता से निम्न वरीयता के रूप में निर्धारित की जाएगी।

 

अनुशासनिक कार्रवाई 

बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 में निहित प्रावधान इस नियमावली के अधीन नियुक्त होने वाले विद्यालय अध्यापक पर प्रभावी होगा.

 

सेवा संबंधी शर्तें

विद्यालय अध्यापक के पद का वेतनादि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किए जायेंगे. विद्यालय अध्यापक के विभिन्न संवर्गों का पद बल वही होगा जो सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जायेगा. अन्य सेवा शर्तें राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जायेगीं.

 

अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति

इस नियमावली के अधीन नियुक्त विद्यालय अध्यापकों के सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके आश्रित की अनुकंपा पर नियुक्ति के संबंध में अलग से प्रावधान अधिसूचित किया जा सकेगा.

 

शिक्षकों के लिए आचरण संहिता

शिक्षकों को निर्धारित पाठ्यक्रम को सुगम एवं सुलभ ढंग से पूर्ण करना / कराना होगा. उन्हें समय पर विद्यालय आना और निर्धारित रूटीन के अनुसार कक्षा का संचालन करना / कराना होगा. उन्हें बाल अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करते हुए बच्चों को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित नहीं होने देना होगा. उन्हें किसी प्रकार के नशा का सेवन नहीं करना होगा. उन्हें सामाजिक कुरीतियों विशेषकर बाल-विवाह एवं दहेज प्रथा को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाना होगा.

 

शिक्षकों को वार्षिक माध्यमिक परीक्षा एवं उच्च माध्यमिक परीक्षा के सफल संचालन हेतु बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले निदेशों का अनुपालन करना होगा. विद्यालय अध्यापक पर बिहार सरकारी सेवक आचार संहिता 1976 में तय प्रावधान प्रभावी होंगे.

 

शिकायत एवं अपील 

इस नियमावली के अधीन नियुक्ति संबंधी शिकायत / अपील तथा इस नियमावली के अधीन कार्यरत विद्यालय अध्यापक की सेवाशर्त से जुड़े मामलों पर अपील सुनकर विनिश्चय करने की शक्ति क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक को होगी।

 

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नियमावली के प्रभावी होने की तिथि के उपरांत किसी दूसरे तरीके से कोई नई नियुक्ति नहीं की जा सकेगी. जिला संवर्ग के सहायक शिक्षक एवं प्रमंडलीय संवर्ग के सहायक शिक्षक, जिसे मरणशील संवर्ग पूर्व में घोषित किया जा चुका है, पर यह नियमावली प्रभावी नहीं माना जायेगा. शिक्षा विभाग इस नियमावली के किसी भी प्रावधान को स्पष्ट कर सकेगी तथा इसे लागू करने में उत्पन्न कठिनाई को दूर कर सकेगी।

किसान का वास्तविक दर्द

किसान का वास्तविक दर्द

 

 

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भवेश मंडल

स्कूल प्रिंसिपल ने बहुत ही कड़े शब्दों मे जब किसान की बेटी ख़ुशी से पिछले एक साल की स्कूल फीस मांगी। तो ख़ुशी ने कहा मैडम मे घर जाकर आज पिता जी से कह दूंगी। घर जाते ही बेटी ने माँ से पूछा पिता जी कहाँ है ? तो माँ ने कहा तुम्हारे पिता जी तो रात से ही खेत मे है, बेटी दौड़ती हुई खेत मे जाती है, और सारी बात अपने पिता को बताती है। ख़ुशी का पिता बेटी को गोद मे उठाकर प्यार करते हुए कहता है की, इस बार हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है। अपनी मैडम को कहना अगले हफ्ता सारी फीस आजाएगी।

 

क्या हम मेला भी जाएंगे? ख़ुशी पूछती है,

हाँ हम मेला भी जाएंगे और पकोड़े, बर्फी भी खाएंगे। ख़ुशी के पिता कहते है, ख़ुशी इस बात को सुनकर नाचने लगती है और घर आते वक्त रस्ते मे अपनी सहेलियों को बताती है की, मै अपने माँ-पापा के साथ मेला देखने जाउंगी। पकोड़े, बर्फी भी खाउंगी। ये बात सुनकर पास ही खड़ी एक बजुर्ग कहती है, बेटा ख़ुशी मेरे लिए क्या लाओगी मेले से?

काकी हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है, मे आपके लिए नए कपडे लाऊंगी। ख़ुशी कहती हुई घर दौड़ जाती है।

 

अगली सुबह ख़ुशी स्कूल जाकर अपनी मैडम को बताती है की, मैडम इस बार हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है। अगले हफ्ते सब फसल बिक जाएगी और पिता जी आकर सारी फीस भर देंगें।

प्रिंसिपल : चुप करो तुम, एक साल से तुम बहाने बाजी कर रही हो।

ख़ुशी चुप चाप क्लास मे जाकर बैठ जाती है और मेला घूमने के सपने देखने लगती है, तभी ओले पड़ने लगते है,

तेज बारिश आने लगती है। बिजली कड़कने लगती है, पेड़ ऐसे हिलते है मानो अभी गिर जाएंगे,

ख़ुशी एकदम घबरा जाती है।

ख़ुशी की आँखों मे आंसू आने लगते है। वोही डर फिर सताने लगता है डर सब खत्म होने का, डर फसल बर्बाद होने का, डर फीस ना दे पाने का, स्कूल खत्म होने के बाद वो धीरे धीरे कांपती हुई घर की तरफ बढ़ने लगती है। हुआ भी ऐसा कि सभी फसल बर्बाद हो गई और खुशी स्कूल में फीस जमा नही करने के कारण ताना सुनने लगी।

उस छोटी सी बच्ची को मेला घुमने और बर्फी खाने का शौक मन में ही रह गया।

छोटे किसान और मजदूरों के परिवार में जो दर्द है उसे समझने में पूरी उम्र भी गुजर जाएगी तो भी शायद वास्तविक दर्द को महसूस नही कर सकते आप।

भारत के आम किसान का वास्तविक दर्द यह है।

खान सर ने तंगी से जूझ रहे स्टूडेंट्स की सुनाई ऐसी दास्‍तान, सुन भावुक हुए कपिल, हैरान हुईं अर्चना

खान सर ने तंगी से जूझ रहे स्टूडेंट्स की सुनाई ऐसी दास्‍तान, सुन भावुक हुए कपिल, हैरान हुईं अर्चना

खान सर ने तंगी से जूझ रहे स्टूडेंट्स की सुनाई ऐसी दास्‍तान, सुन भावुक हुए कपिल, हैरान हुईं अर्चना

 

 

कॉमेडी चिट-चैट शो ‘द कपिल शर्मा शो’ हर वीकेंड सबके पेट में हंसी के गुब्बारे छोड़कर जाता है। इस बार भी इस शो में कुछ ऐसा ही होने वाला है। साथ ही कुछ भावुक पल भी आएंगे, जिसे देखकर जजेस के साथ-साथ आपकी भी आंखें नम हो जाएंगी। क्योंकि 7 जनवरी को प्रसारित होने वाले एपिसोड में आ रही है ज्ञानियों की टोली। इसमें मोटिवेशनल स्पीकर्स गौर गोपाल दास, विवेक बिंद्रा, खान सर और सिंगर्स अल्ताफ राजा, श्वेता शेट्टी, शब्बीर कुमार और सुनीता राव अपनी-अपनी बातों से कभी हंसाएंगे, कभी रुलाएंगे और कभी ज्ञान के मोती बाटेंगे।

सोनी एंटरटेनमेंट चैनल पर ‘द कपिल शर्मा शो’ (The Kapil Sharma Show) का प्रोमो आया, जिसमें खान सर अपने और स्टूडेंट्स के बारे में ऐसी-ऐसी बातें बता रहे हैं, जिसको सुनकर सबके रोंगटे खड़े हो गए। खान सर UPSC एग्जाम्स के बारे में कहते हैं- देश का सबसे कठिन एग्जाम है यूपीएसी। इसकी साल भर की फीस होती है 2.5 लाख रुपये। लेकिन उस चीज को हमने 7.5 हजार रुपये में कर दिए। ये सुनत ही अर्चना पूरन सिंह हक्का-बक्का रह जाती हैं और ताली बजाने लगती हैं।

 

 

खान सर ने सुनाया दंग करने वाला किस्सा

खान सर ने कहा कि हम लोगों को ये साढ़े सात हजार भी बहुत कम रकम लगती है लेकिन एक लड़की ने कहा कि सर शाम वाले बैच को मॉर्निंग में कर दीजिए। तो मैंने कहा कि सबके अकेले के हिसाब से बैच ट्रांसफर नहीं होगा। दिक्कत क्या है? तो उसने बताया कि शाम में मुझे दूसरे के यहां बर्तन माजने जाना होता है। एक लड़का बेचारा नदी से बालू निकालता था और फिर उस बालू को भरता था। फिर नाव बालू को किनारे लेकर बेचती थी। उस बालू को भरने से वो मेरी फीस ले आया।

 

 

खान सर की बातों पर कपिल और अर्चना का रिएक्शन

खान सर ने कहा- हमारा हाथ कांप गया, कैसे फीस ले लेंगे हम? ये सुनकर कपिल भी इमोशनल हो जाते हैं और अर्चना भी हैरान हो जाती हैं। उनकी तारीफ करते हुए पूरा सेट तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है। खान सर ने बताया कि उसी दिन उन्होंने ये प्रण लिया था कि भारत का कोई भी बच्चा, उसकी सफलता में पैसा उसकी बाधा नहीं बनेगा। फिर चाहे उसको जितना भी पढ़ना रहे। ये सुनने के बाद कपिल और अर्चना पूरन सिंह दोनों ही दंग रह जाते हैं।

 

 

 

नकली ब्रांड : “जालसाजी में फंँसे हुए ग्राहक”

नकली ब्रांड : “जालसाजी में फंँसे हुए ग्राहक”

नकली ब्रांड : “जालसाजी में फंँसे हुए ग्राहक”

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पूजा गुप्ता,  मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)

रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली उपयोगी सामानों की संख्या की कमी नहीं है, हर सामान की आवश्यकता समय-समय पर होती है और डिब्बे पर लगे हुए सुंदर-सुंदर ब्रांड देखकर लोगों के मन में उसे लेने की इच्छा होती है, भले ही वह सामान कैसा हो इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं होती है। चाय पत्ती, नहाने का साबुन, खाने का तेल, सौंदर्य प्रसाधन, शैंपू पाउच या बोतल डिटर्जेंट पाउडर के पाउच अथवा पैकेट या टिकिया, मिर्च मसाले नमकीन ना जाने कितने प्रकार के समान मशहूर ब्रांड का नाम देख कर लाए हो, पर वास्तव में वह मूल कंपनी के ना होकर किसी जालसाज कंपनी के भी हो सकते हैं। घरेलू सामानों को तो आम ग्राहक इतना महत्व नहीं देता है पर बिजली के कई सामान ऐसे होते हैं जिस पर आईएसआई की मुहर छपी होती है, वह भी नकली हो सकता है। यह जानकर हैरानी होगी आजकल जो लोग अच्छा खा पी रहे हैं उन्हें भी नकली असली की पहचान नहीं होती है और वह गलत सामानों को खरीदने के लिए एक दूसरे को प्रेरित करते रहते हैं खास तौर पर दुकानदार खुद उन सामानों को ग्राहक के सामने पेश कर देता है जिसे देखकर ग्राहक के मन में उसे लेने की चाहत होती है, सीधा-साधा उपभोक्ता इसी में उलझ कर रह जाता है। जिस प्रकार के समान की ग्राहक मांग करता है वह ब्रांड पर वह सामान दूसरे तरह का होता है और उसके अंदर रखा हुआ सामान कितना शुद्ध है, यह दुकानदार ही जानता है क्योंकि उसे सस्ता और महंगा दोनों तरह का माल रखने की आदत होती है और जैसे ग्राहक होते हैं उनकी हैसियत देखकर वैसा ही समान उनके सामने प्रस्तुत करते हैं। गरीब और आम जनता इस जालसाजी के भंवर में फंसती चली जाती है, जो पढ़े-लिखे नहीं होते हैं वो जनता को बेवकूफ बनाने में दुकानदार माहिर होते हैं। मिलती-जुलती कंपनी का माल बेचकर उन मेहनत करने वाले मजदूरों को भी यह पैसा कम देते हैं। मिलते जुलते नाम नकली ब्राण्ड की कंपनियों का समान बहुतायत में मिलता है। देश भर में थोक व खुदरा विक्रेता यहां से खरीदारी करने आते हैं बिजली के कई सामान से लेकर लाइट, झालर सभी प्रकार के बिजली उपकरण ग्राहकों को डुप्लीकेट दिया जा रहा है।

 

आम जनता बेवकूफ बनने के बाद ब्रांड के नाम पर गलत समान कर ले आती हैं और जब उसे उपयोग करते हैं तो उन्हें पता चलता है कि वह लूट लिए गए हैं। जालसाजी कंपनियां सेल्समैन और सप्लायर के माध्यम से नकली समान गली मोहल्ले में फेरी लगवाकर बिकबाते है, घर-घर जाकर सेल्स गर्ल और महिलायें नकली सामान सस्ते में बेचकर चली जाती हैं। नकली को असली का टेग लगाकर इतनी खूबसूरती से मार्केट में लाया जाता है कि इसका सूक्ष्मता से फर्क करने पर भी समान असली है या नकली यह पता नहीं लग पाता है। कोई फर्क भी उसे समझ सके वह भी उनकी जालसाजी में आ जाते हैं। अधिक मुनाफे की खातिर दुकानदार अपना सामान ग्राहकों को बेच देता है मार्केट में कई प्रकार के ब्यूटी प्रोडक्ट भी आते हैं जब यह सारे सामान ब्यूटी पार्लर जाते हैं और कुछ सामान नकली होने के कारण उसका साइड इफेक्ट औरतों की स्किन पर हो जाता है इस पर किसे दोष दिया सकता है।

 

सस्ते सामान को नकली रैपर में लपेट कर उसकी पैकेजिंग की जाती है और मार्केट में रद्दी माल को ब्रांडेड कंपनियों के नाम से बेचने वाले लोगों का एक गैंग होता है और यही रात के अंधेरे में छुपकर नकली माल तैयार करते हैं और उन्हें ब्रांडेड रैपर मैं डाल कर लोगों को बेवकूफ बनाते हैं और यह ब्रांडेड रेफर इतनी सुरक्षात्मक तरीके से बनाए जाते हैं लोगों को यह लगे कि यह रेपर असली है। कई बार उपभोक्ता बिजनेस प्लान के उत्पाद को इस्तेमाल करने के बाद उसके रैपर को बिना नष्ट किए फेंक देते हैं और तेल के डिब्बे शीशियों को पैकेजिंग के लिए भेज देते हैं फलस्वरुप इनके जरिए नकली सामान बनाने वाले यह सब प्राप्त कर इनमें से अपना सामान भर कर पैक कर देते हैं और बाजार में भेज देते हैं। काफी दुकानदार घी या तेल को खुला बेचते हैं और खाली टीन के डिब्बों में बेच देते हैं इनमें भी समान पैक होकर बाजार आ जाता है। घी तेल के डिब्बे पर व्यापक तो मूल कंपनी का ही होता है लेकिन उत्पाद किसी दूसरी कंपनी का होता है। तेल के टीन के साथ तो और भी सुविधा है कि यह केवल सील वाली जगह से ही खोले जाते हैं लगता है वहीं से तेल भरकर सील लगा देते हैं।

 

आजकल ऑनलाइन जो भी सामान बेचे जाते हैं फेसबुक इत्यादि पर वो सभी अधिकतम नकली होते हैं। किसी ब्रांडेड कंपनी का नाम रखकर लोगों में भ्रामकता फैलाई जाती है मशहूर और बड़ी कंपनियों के अपने खर्चे बहुत होते हैं। कंपनियां अपने अधिकारियों को बड़ी रकम देते हैं विज्ञापनों और अन्य साधनों पर भी खुलकर यह कंपनियां खर्च करती है इनकी अपनी तकनीक अच्छी और महंगी होती है इसलिए उनका सामान महंगा पड़ता है। कुछ अपने नाम प्रचार के बलबूते पर अपना उत्पाद भेजते हैं और बिकता भी है जैसे उदाहरण के लिए यदि कोई चिप्स का पैकेट खरीदते हैं उस चिप्स की कीमत ₹2 के लगभग होती है लेकिन बाजार में आते आते वह ₹10 में बिकता है और इसके विपरीत जो छोटी कंपनियां है उनके फालतू खर्चे कम होते हैं और इनका विज्ञापनों पर भी कोई खर्च नहीं होता है, इसलिए इनके समान सस्ते पड़ते हैं परिणाम स्वरूप थोक और खुदरा विक्रेता यह सभी कमीशन पाते हैं। दुकानदारों को जालसाज कंपनियों का सामान बेचने पर यानी ब्रांडेड नाम से नकली सामान बेचने पर अच्छी बचत होती है इसलिए दुकानदार जानबूझकर नकली ब्रांड का सामान रखते हैं। कुछ थोक विक्रेताओं के पास अनजाने में सेल्समैन के द्वारा नकली ब्रांड आ जाते हैं सभी समान अपने मूल रुपए से डबल दामों में बेच दिया जाता है जिसका कमीशन कंपनी से लेकर दुकानदार पूर्णतः खाता है। घरेलू उद्योगों के सामान गुणवत्ता के हिसाब से नकली ब्रांडों के थोक मूल्य से भी अलग होते हैं निम्न क्वालिटी का मूल्य कम होता है उससे कुछ अच्छी क्वालिटी का थोक मूल्य कुछ अधिक। लेकिन नकली ब्रांड में सबसे अच्छी व महंगी क्वालिटी फिर भी असली ब्रांड का मुकाबला नहीं कर पाती है क्योंकि उसकी तकनीक बड़ी कंपनी जैसी नहीं होती वैसे भी सभी बड़ी कंपनियों में अपने उत्पाद प्रक्रिया व फार्मूले के रहस्य होते हैं जिन्हें कंपनियां छिपाए रखती है।

 

जालसाजी के भंवर से उपभोक्ताओं को सचेत होने की आवश्यकता है जो बड़ी कंपनियों के ब्रांड का नाम लगाकर समान बेचते हैं उन पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए यह देश की अर्थव्यवस्था को भी क्षति पहुंचाते हैं। उपभोक्ता हो या सरकार सबको सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है। उपभोक्ता को भी चाहिए कि जानबूझकर नकली ब्रांड बेचने वाले दुकानदारों का बहिष्कार करें और ब्रांड की मूल कंपनी को इसकी जानकारी अवश्य भेजें ताकि वह कार्यवाही कर सके तथा इस्तेमाल किए गए ब्रांड का पैकिंग सामान नष्ट करके फेंक दे ताकि दूसरा कोई उसे इस्तेमाल नहीं कर पाए। नकली सामान की खरीदारी से ग्राहक बचने का प्रयास करें किसी के बहकावे में ना आए अपने अनुभव से सही सामान लेने का प्रयास करें। यदि कोई नकली ब्रांड का समान बेच रहा है तो उसकी शिकायत जरूर करें ।नकली सामानों का बहिष्कार करें लोग जागरूक बने, तभी देश का विकास हो सकता है।

 

पूजा गुप्ता

मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)

सम्राट चौधरी ज़रा याद करें कि आपने इसी उम्र में अब तक कितने लोगों को धोखा दिया : उमेश सिंह कुशवाहा

सम्राट चौधरी ज़रा याद करें कि आपने इसी उम्र में अब तक कितने लोगों को धोखा दिया : उमेश सिंह कुशवाहा

सम्राट चौधरी ज़रा याद करें कि आपने इसी उम्र में अब तक कितने लोगों को धोखा दिया : उमेश सिंह कुशवाहा
नीतीश की सरकार न किसी को फँसाती है और न ही किसी को बचाती है

 

पटना। जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने भाजपा नेता सम्राट चौधरी पर आज पलटवार करते हुए कहा की सम्राट चौधरी, याद करें कि इसी उम्र में आपने अब तक कितने लोगों को धोखा दिया है। कितनी बार पार्टी बदला हैl स्वाभाविक है। आपको चारो ओर रबड़ स्टांप ही नजर आएगा, क्योंकि आज आप जिस दल में हैं, वहाँ तो सभी लोग नागपुर के रबड़ स्टांप मात्र ही हैं।

 

उमेश कुशवाहा ने कहा कि हमारे नेता नीतीश कुमार ने आज तक कभी किसी के इशारे पर काम नहीं किया और इसे आपके वर्त्तमान दल से ज्यादा कौन समझता है? आपने तो संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार करते हुए स्वास्थ्य को भी राजनीति का मुद्दा बना डाला है। हमारी सरकार संवैधानिक संस्थाओं को पूरा सम्मान देती है, आपकी पार्टी की तरह उनका दुरूपयोग नहीं करतीl
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अतिपिछड़ों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाकर राजनीति करना शुरू से भाजपा की नीति रही है। हमारे मुख्यमंत्री जी ने तो बिहार की बागडोर संभालते ही राजनैतिक और सामाजिक आजादी देते हुए त्रिस्तरीय पंचायत एवं निकाय चुनाव में अतिपिछड़ों को आरक्षण देने का काम किया। दलित एवं अतिपिछडे समाज के भाइयों के साथ ही सभी वर्ग की महिलाओं को 50% आरक्षण देकर लगातार चुनाव कराया। आगे भी इनके रहते अतिपिछड़ों को आरक्षण दिए बगैर बिहार में चुनाव नहीं होगा, आपलोग चाहे जितनी साजिश कर लें।

 

उमेश कुशवाहा ने आगे कहा कि भाजपा जब सरकार में थी तभी बनाये गए डीजीपी उन्हें आज भ्रष्टाचारी नजर आ रहे हैं। सम्राट चौधरी आप आंकडा देख लें सर्वाधिक आरोपी व्यक्तियों को आपकी पार्टी चुनाव लडवाती हैl नीतीश जी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार न किसी को फँसाती है और न ही किसी को बचाती है, यह पिछले सत्रह वर्षों का ट्रिक रिकार्ड हैl

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