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स्वास्थ्य

भैया दूज

भैया दूज

भारतीय संस्कृति पावन सलिला,
भैया दूज की परंपरा अति रोचक।
श्री कृष्ण ने बध किया था नरकासुर का,
विजय श्री मिली गये बहन सुभद्रा के घर,
प्यारी बहन ने भाई को तिलक लगाया,
आरती उतारी, पुष्पाहार से आदर सत्कार।

भाई दूज को हर बर्ष बहन भाई मनाते।
बहन भाई की सुख समृद्धि की करे दुआ।
थाली में रोली रोली अक्षत मिठाई रख,
बहन भाई को तिलक लगाती,
शुभ, मंगल, दीर्घायु हो भाई कामना उसकी,
भाई भी बहन के ऊपर प्यार लुटाता।
उपहार देकर उसकी रक्षा को तत्पर।

बड़ा पावन अटूट रिश्ता यह है।
हर बहन भाई को होता है गर्व।
यमुना ने भाई यम का किया सत्कार।
तिलक किया था, आरती उतारी थी ।
प्रेम पुष्प सुखमय बना रहे यह संसार।

(स्वरचित)
डॉ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

गोल्ड मेडलिस्ट चर्चित फिजियोथेरेपिस्ट डॉ राजीव ने परिवार संग मनाया दीवाली

गोल्ड मेडलिस्ट चर्चित फिजियोथेरेपिस्ट डॉ राजीव ने परिवार संग मनाया दीवाली

 

देश भर में दिवाली की धूम है। बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में इस पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है। बिहार के जाने माने फिजियोथेरेपिस्ट डॉ राजीव कुमार सिंह ने भी इस वर्ष दीवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाई है। डॉ राजीव ने अपने पूरे परिवार संग दीपावली के दिन पूरे प्रदेश के भाईचारे, खुशहाली, सद्भावना, शांति, विकास और एकजुटता के लिए मनोकामना करते हुए पाटलिपुत्रा स्थित आशा इंक्लेव में दीपोत्सव मनाया है।

 

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डॉ राजीव ने अपने चिर परिचित अंदाज में गाने बजाने की व्यवस्था के साथ अपनेपन का परिचय देते हुए न केवल प्रदेश भर से आए अपने चिर परिचित के साथ दीपावली की खुशियों को साझा किया, बल्कि अपने हाथों से उन्हें मिठाई खिलाकर उन्हें दीपावली की बधाई दी। डॉ राजीव ने राज्य के सुदूर व नजदीकी इलाकों से आए लोगों के सुख दुख में शामिल होते हुए उनके परिवार के बारे में जानकारी भी प्राप्त की।

 

 

सिवान जिले के मूल निवासी डॉ राजीव कुमार सिंह बिहार के जाने माने फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में विख्यात हैं। डॉ राजीव बॉलीवुड के कई जाने माने अभिनेताओं व क्रिकेटर के फिजियोथेरेपिस्ट रह चुके हैं। सुपरस्टार गोविंदा,सोनू सूद,प्रेम चोपड़ा,अमन वर्मा,विराट कोहली इत्यादि सहित कई बड़े सख्सियतों का इलाज कर चुके हैं।

बरवाडीह, लातेहार प्रखंड में एक दिवसीय स्वास्थ्य मेला का हुआ आयोजन

बरवाडीह, लातेहार प्रखंड में एक दिवसीय स्वास्थ्य मेला का हुआ आयोजन

बरवाडीह, लातेहार प्रखंड में एक दिवसीय स्वास्थ्य मेला का हुआ आयोजन

स्वास्थ्य मेले में स्टाल लगाकर सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं से लोगों को लाभान्वित किया गया

लातेहार

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही, विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं व कार्यक्रमों जैसे- आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत मातृ शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, संचारी और गैर- संचारी रोगों की रोकथाम आदि स्वास्थ्य जागरूकता एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को जनमानस तक पहुंचाने तथा उन्हें योजनाओं से लाभान्वित करने के उद्देश्य से जिले में दिनांक 18 अप्रैल 2022 से 22 अप्रैल 2022 तक सभी प्रखंड में एक दिवसीय प्रखंड स्वास्थ्य मेला आयोजित किया जा रहा हैं। इसके तहत सोमवार को जिले के बरवाडीह, लातेहार प्रखंड में एक दिवसीय स्वास्थ्य मेला का आयोजन किया गया।जनजातीय कल्याण अस्पताल मननचोटांग, लातेहार में आयोजित एक दिवसीय स्वास्थ्य मेला का सिविल सर्जन एच.सी महतो द्वारा दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया गया। सिविल सर्जन एच.सी महतो द्वारा जानकारी देते हुए कहा गया कि स्वास्थ्य मेले में उपस्थित ग्रामीणों को सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं से लाभान्वित किया गया तथा निशुल्क जांच केंद्र के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य जांच भी कराए गए। स्वास्थ्य जांच के अनुसार ग्रामीणों के बीच दवाइयों का भी वितरण किया गया।
स्वास्थ्य मेला में सामान्य चिकित्सा, मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, टीकाकरण, यूडीआइडी कार्ड, परिवार नियोजन परामर्श, मोतियाबिंद की जांच, आंख, कान एवं गले से संबंधित बीमारियों की जांच, दंत चिकित्सा जांच, त्वचा की जांच, पोषण के लिए परामर्श, एड्स नियंत्रण के लिए परामर्श, कुष्ठ नियंत्रण, टी.बी. नियंत्रण, मलेरिया, धूम्रपान और तंबाकू के सेवन के बुरे प्रभाव की जानकारी, कैंसर नियंत्रण जागरूकता समेत अन्य संबंधित बीमारियों के इलाज संबंधी सेवाएं प्रदान की गई।

*ज्ञात हो कि दिनांक 19 अप्रैल 2022 को जिले के हेरहंज प्रखंड, मनिका प्रखंड, 20 अप्रैल को बरियातु, बालूमाथ प्रखंड में,21 अप्रैल को गारू प्रखंड में, 22 अप्रैल को चंदवा, महुआटांड प्रखंड में एक दिवसीय प्रखंड स्वास्थ्य मेला आयोजित होगा।*

ब्लड बैंक के द्वारा बरवाडीह में रक्तदान शिविर का किया गया आयोजन

ब्लड बैंक के द्वारा बरवाडीह में रक्तदान शिविर का किया गया आयोजन

ब्लड बैंक के द्वारा बरवाडीह में रक्तदान शिविर का किया गया आयोजन

बरवाडीह/लातेहार :-सोमवार को बरवाडीह प्रखंड मुख्यालय में लातेहार रेड क्रॉस सोसाइटी के द्वारा उपायुक्त के निर्देश पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जहां रक्तदान शिविर के माध्यम से जरूरतमंद लोगों के लिए रक्त संग्रह करने का काम रेड क्रॉस सोसाइटी और सीएचसी की टीम के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। शिविर के दौरान सीएचसी में पदस्थापित चिकित्सक डॉ क्षितिज राज्य के साथ-साथ विनोद कुमार रोहित कुमार वर्मा , रंजीत विश्वकर्मा ,हसीब अहमद , समेत कई लोगों के द्वारा रक्तदान करने का काम किया गया । रक्तदान शिविर को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी राकेश सहाय ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन करने का मुख्य उद्देश जिला प्रशासन का यह होता है की ब्लड बैंक में किसी भी जरूरतमंद को सही समय पर ब्लड मुहैया हो सके और किसी जरूरतमंद की जीवन बचाने का काम किया जा सके, इस उद्देश्य के लिए काम लातेहार ब्लड बैंक कर रही हैं। ऐसे आयोजनों में लोगों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए । वही रक्तदान करने वाले डॉ क्षितिज राज में कहां की प्रत्येक व्यक्ति को 3 माह के अंतराल में रक्तदान करना चाहिए। जिससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति की जान बचाने के साथ-साथ मानव शरीर को स्वस्थ रखने में भी रक्तदान अपनी अहम भूमिका निभाता है। इस दौरान ब्लड बैंक के विनय कुमार सिंह, चंदन कुमार,अनवर समेत कई लोग मौजूद थे ।

स्वास्थ विभाग के द्वारा प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य शिविर का किया गया आयोजन , लगाए गये थे 14 स्टॉल

स्वास्थ विभाग के द्वारा प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य शिविर का किया गया आयोजन , लगाए गये थे 14 स्टॉल

स्वास्थ विभाग के द्वारा प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य शिविर का किया गया आयोजन , लगाए गये थे 14 स्टॉल

बरवाडीह/लातेहार:- सोमवार को प्रखंड मुख्यालय के ब्लॉक परिसर में जिला उपायुक्त के निर्देश पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के द्वारा स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन प्रखंड विकास पदाधिकारी राकेश सहाय के साथ-साथ प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ आशीष रंजन और अन्य चिकित्सकों के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करके करने का काम किया। शिविर के उद्घाटन के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में प्रखंड विकास पदाधिकारी ने शिविर में लगाए गए स्वास्थ्य विभाग के लगभग एक दर्जन स्थलों का बारी-बारी से निरीक्षण करने का काम किया गया। इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी ने स्वास्थ विभाग के कर्मियों के कार्य के बारे में विभिन्न तरह की जानकारियां प्राप्त। शिविर दौरान सामान्य रोग की जांच के साथ-साथ नेत्र रोग जांच को लेकर भी स्टाल लगाए गए थे। वही निशक्त जनों के प्रमाण पत्र बनाने को लेकर भी पलामू के चिकित्सक डॉ अवधेश सिंह की मौजूदगी में निशक्त जनों के जांच करने का काम भी किया गया । शिविर में प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए, लगभग 300 से अधिक ग्रामीणों की इलाज करने के साथ-साथ निशुल्क दवा का वितरण और कई जांच भी निशुल्क किए गए। इस दौरान कोविड-19 के टीकाकरण करने का काम भी स्वास्थ विभाग की टीम के द्वारा किया गया । जहाँ मौके पर डॉक्टर जेपी साहू , डॉ क्षितिज राज,डॉ रश्मि रानी , युवराज सिंह , सीएचओ आभा कुमारी , सीएचओ खुशबू कुमारी , सीमा कुमारी ,ज्याउद्दीन हसन अंसारी , रोहित कुमार , संतोषी खलको , अन्तोषी खलको , अनिता तिर्की , संदीप भगत ,उमाशंकर मिश्रा , समेत स्वास्थ विभाग की 14 स्टॉल पर स्वास्थ्य कर्मी मुस्तैद थे।

ठंड में दिल बेहतर तरीके से काम करे इसके लिए दिल का खास ख्याल रखना जरूरी

ठंड में दिल बेहतर तरीके से काम करे इसके लिए दिल का खास ख्याल रखना जरूरी

डॉ. बलबीर सिंहचेयरमैन, कार्डियक साइंसेसमैक्स हॉस्पिटल, साकेत दिल्लीदिल की बीमारियां भारत में मृत्युदर और बीमारीदर का एक प्रमुख कारण बनी हुईं हैं। लोग अक्सर दिल की बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं, जो कम से कम 25 प्रतिशत मामलों का कारण बनता है। हालांकि, इसका बोझ पहले ही लगातार बढ़ रहा है, लेकिन ठंड ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। ठंड में शरीर गर्म रहने के लिए हीट की मांग करता है, जिसके कारण व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा भूख लगती है और वह जंक फूड की तरफ भागने लगता है। जब शारीरिक सक्रियता न के बराबर हो और शरीर में कैलोरी की मात्रा ज्यादा हो तो व्यक्ति आलसी और मोटा होने लगता है। शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल और लिपिड स्तर बढऩे लगता है। यह सब दिल के काम को बढ़ाते हैं, जिसके कारण दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा महनत करनी पड़ती है। हालांकि, स्वस्थ आबादी बदलते मौसम की इस मार को सहन कर सकती है, लेकिन जो लोग हृदय रोगों से ग्रस्त हैं या हो सकते हैं, उनमें ऐसे लक्षण नजर आने लगते हैं, जिनके लिए मेडिकल हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है।
हृदय रोगों में वृद्धि के प्रमुख कारण
ठंड में शरीर को गर्म रखने की प्रक्रिया में ब्लड वेसल्स सिकुडऩे लगती हैं। इससे बीपी बढ़ता है और दिल पर अधिक दबाव पड़ता है।
शरीर को गर्म रखने के लिए खाने की तलब उठती है, जिसके कारण हम हाई कैलोरी वाली चीजों की तरफ भागते हैं। ये खाना हमारा वजन, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। ये सभी चीजें दिल के काम को बढ़ाकर दिल को खतरे में डालती हैं।
सर्दियों में अत्यधिक शराब और धूम्रपान भी कई समस्याओं का कारण बनते हैं।
ठंड के मौसम में रेस्पायरेटरी संक्रमण बहुत होता है, जो सूजन, जलन और क्लॉट का कारण बनता है। कोविड की बीमारी के दौरान कई मरीज हार्ट अटैक का शिकार बन चुके हैं।
शुरुआती लक्षणों को कैसे पहचानें?
यह जरूरी नहीं कि सभी हृदय रोगियों को सीने में दर्द की समस्या ही होगी। इसके लक्षण हर मरीज में भिन्न हो सकते हैं और दर्द भी हल्का से गंभीर हो सकता है। कुछ मरीजों को न के बराबर दर्द होता है, तो कुछ को थोड़ी और कुछ को असहनीय दर्द के साथ सीने में भारीपन और जकडऩ का अनुभव होता है। ये सभी लक्षण हाथों, जबड़ों, पीठ या पेट तक फैल सकते हैं और साथ ही मरीज को सांस लेने में मुश्किल होती है। चूंकि, शुरुआती निदान के साथ सफल इलाज संभव है, इसलिए हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों की पहचान होना आवश्यक है। सीने में भारीपन और असहजता या सांस लेने में मुश्किल होने पर डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करना जरूरी है।
हार्ट अटैक कब आता है?
जब धमनियां क्लॉट के कारण बंद हो जाती हैं, तो हृदय के उस हिस्से में रक्त प्रवाह रुक जाता है। यह हार्ट अटैक का कारण बनता है।
समय पर निदान सफल इलाज की कुंजी है
शुरुआती निदान के साथ इलाज समय पर हो पाता है। यदि हार्ट अटैक के कुछ ही घंटों में मरीज का इलाज शुरू हो जाता है, तो ऐसे में उसका हृदय सामान्य रूप से काम करने लगता है और मरीज की जान बचाना भी संभव हो पाता है।
ठंड में दिल की समस्याओं का प्रबंधन
हालांकि, कोरोनरी हार्ट डिजीज को ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन सही इलाज के साथ इसके लक्षणों पर काबू पाया जा सकता है, हृदय की कार्यप्रणाली में सुधार आता है और हार्ट अटैक जैसी घातक समस्याओं की संभावना कम हो जाती है। इसके प्रभावी विकल्पों में जीवनशैली में बदलाव, दवाइयां और नॉन-इनवेसिव इलाज शामिल हैं। जीवनशैली में कुछ सरल बदलाव जैसे कि स्वस्थ-संतुलित आहार, शारीरिक सक्रियता, नियमित व्यायाम, धूम्रपान नहीं करना और कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को नियंत्रित करना आदि शामिल हैं। इससे सीएचडी, स्ट्रोक और डिमेंशिया आदि के अलावा अन्य बीमारियों का खतरा भी कम होता है। अपना वजन सही रखें, ओवरईटिंग न करें। हाई कैलोरी और अधिक वसा वाले खाने, शुगर ड्रिंक्स और बहुत ज्यादा मिठाइयों से परहेज करें।
हर दिन 30-40 मिनट एक्सरसाइज या वॉक करें।
शराब का अत्यधिक सेवन न करें और धूम्रपान को पूरी तरह न कह दें।
पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें।
गर्म कपड़े पहनें।
ठंड में बीपी बढ़ता है इसलिए दवाइयों की डोज बढ़ानी पड़ सकती है।
हार्ट फेलियर का सबसे आसान और एकमात्र तरीका स्वस्थ जीवनशैली और स्वस्थ आहार का पालन करना है। मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को बढ़ावा देने वाली जीवनशैली और आहार से दूर रहें। हार्ट फेलियर या कार्डियो वस्कुलर डिजीज का मतलब है कि आपका दिल स्वस्थ नहीं है। दिल बेहतर तरीके से काम करे इसके लिए दिल का खास ख्याल रखना जरूरी है। अधिकांश देशों में हृदय रोग मृत्यदर का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। लेकिन अच्छी बात यह है कि स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसकी रोकथाम संभव है।

  • उमेश कुमार सिंह
झोलाछाप डॉक्टरों के आतंक से परेशान है लोग

झोलाछाप डॉक्टरों के आतंक से परेशान है लोग

  • हालत बिगड़ती पर सदर अस्पताल रैफर कर दिया जाता है

देवघर/शेखर सुमन। जिले के देवीपुर,सारठ व अन्य सभी प्रखंडों में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानों में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं। मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसे आनन-फानन में सदर अस्पताल देवघर रैफर कर दिया जाता है।


बताया जाता है कि सारठ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कूल 30 उप स्वास्थ्य केंद्र विभिन्न पंचायतों में हैं जिनका अपना भवन भी है। लेकिन इन उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कभी कभार एनएम तो आते हैं। लेकिन डॉक्टरों की इन उप स्वास्थ्य केंद्रों पर आने की बात करना ही बेमानी होगी ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को झोला छाप डॉक्टरों पर निर्भर रहना इसकी मजबूरी है। जिस कारण ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

विदित हो कि सरकार किसी भी दल का हो आज भी ग्रामीण क्षेत्र के लोग झोलाछाप डॉक्टर पर ही जिंदा है। स्थानीय लोगों के अनुसार झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है। दुकानों के भीतर कार्टून में दवाओं का अवैध तरीके से भंडारण रहता है। इन दिनों मौसमी बीमारियों का कहर है। झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें मरीजों से भरी पड़ी हैं। मौसम बदलने से उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बीमारियां ज्यादा पनप रही हैं। झोलाछाप डॉक्टर बीमारियों का फायदा उठाकर मरीजों को जमकर लूटा जा रहा हैं।

सारवां: हाइड्रोसील का आॅपरेशन कराने पहुंचे नेत्रहीन व्यक्ति का कर दिया नसबंदी, जांच का आदेश

सारवां: हाइड्रोसील का आॅपरेशन कराने पहुंचे नेत्रहीन व्यक्ति का कर दिया नसबंदी, जांच का आदेश

  • मामले का पदार्फाश देवघर जिला के सारवां प्रखंड में हुआ है

देवघर/संवाददाता। परिवार नियोजन का लक्ष्य पूरा नहीं होने पर अब हाइड्रोसील का आॅपरेशन कराने आए मरीज की नसबंदी कर दी गयी है। इस मामले का पदार्फाश देवघर जिला के सारवां प्रखंड में हुआ है और यह घटना सारवां पीएचसी का है। जानकारी के अनुसार सारवां प्रखंड के मंझलाडीह गांव निवासी हीरा राणा पीएचसी में हाइड्रोसिल का आॅपरेशन कराने आया था।

इस मामले का सबसे दुखद पक्ष यह है कि हीरा राणा नेत्रहीन है। हीरा राणा का आरोप है कि सारवां पीएचसी में चिकित्सकों ने हाइड्रोसील के बदले नसबंदी का आॅपरेशन कर दिया। मरीज इस शिकायत को लेकर जब अस्पताल गया तो कर्मियों ने उल्टे डांट-डपट कर भगा दिया। न्याय मिलते नहीं देख मरीज फरियाद लेकर अब इधर उधर भटक रहा है।


क्या कहते है उपायुक्त
वहीं इस मामले की जानकारी देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री को मिलने पर उन्होंने कार्यवाई की बात कही है। डीसी ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन से रिपोर्ट मांगी जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों पर कार्यवाई की जाएगी।

कहीं आप गर्भवती तो नहीं, इन संकेतों से पहचानें

कहीं आप गर्भवती तो नहीं, इन संकेतों से पहचानें

गर्भधारण करना किसी भी स्त्री के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है। आमतौर पर, जब एक महिलाके पीरियड्स मिस हो जाते हैं तो उसे ऐसा लगता है कि वह गर्भवती हो गई है। यकीनन गर्भावस्था में महिला कोपीरियड्स नहीं आते और इसलिए इसे गर्भधारण का सबसे पहला और प्रमुख लक्षण माना जाता है। लेकिन इसकेअलावा भी ऐसे कई संकेत होते हैं, जो आपके गर्भवती होने की ओर इशारा करते हैं। तो चलिए जानते हैं इन संकेतोंके बारे में−

माहवारी ना आना
डॉक्टर बताते हैं कि जब एक महिला गर्भवती होती है तो उसके पीरियड्स आने खुद ब खुद बंद हो जाते हैं। ऐसे मेंअगर आपके पीरियड की डेट निकल गई हैं और एक सप्ताह बाद तक भी आपको माहवारी नहीं आ रही हैं तोबेहतर होगा कि आप एक बार प्रेग्नेंसी टेस्ट अवश्य कर लें।

सूजे हुए स्तन
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, गर्भावस्था के शुरूआती दौर में महिला में कई तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिसकेकारण उनके स्तन अधिक सेंसेटिव हो जाते हैं। कई बार आपको सूजन का अहसास भी हो सकता है। हालांकि कुछसप्ताह बाद यह होने वाली असुविधा काफी हद तक कम हो जाती है, क्योंकि शरीर हार्मोनल परिवर्तनों कोसमायोजित कर लेता है।

मतली या उल्टी
स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि गर्भावस्था में महिला को मतली या उल्टी हो सकती है। मॉÉनग सिकनेस, जो दिनया रात के किसी भी समय हो सकती है, अक्सर आपके गर्भवती होने के एक महीने बाद शुरू होती है। हालांकि, कुछमहिलाओं को पहले मतली महसूस होती है और कुछ को कभी इसका अनुभव नहीं होता है। जबकि गर्भावस्था केदौरान मतली का कारण स्पष्ट नहीं है, हालांकि ऐसा माना जाता है कि शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों केकारण ऐसा होता है।

अधिक पेशाब करना
यह भी अक्सर एक स्त्री के गर्भवती होने का संकेत देता है। हो सकता है कि इस समय आप सामान्य से अधिकबार पेशाब कर रही हो। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे आपकेगुर्दे अतिरिक्त तरल पदार्थ को संसाधित करते हैं जो आपके मूत्राशय में समाप्त हो जाते हैं। जिससे आपकोबार−बार पेशाब करने की इच्छा होती है।

थकान
गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों की अगर बात की जाए तो इसमें थकान भी शामिल है। प्रारंभिक गर्भावस्था केदौरानए हार्मोन प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे आपको नींद आ सकती है।

थॉयराइड होने पर नजर आते हैं यह लक्षण, तुरंत करवाएं जांच

थॉयराइड होने पर नजर आते हैं यह लक्षण, तुरंत करवाएं जांच

थॉयराइड आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है और महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है। थॉयराइड वास्तव में एक तितली के आकार की ग्रंथि है, जो मेटाबॉलिज्म की स्पीड को नियंत्रित करने वाले हार्मोन का उत्पादन करती है। थायराइड विकार थायराइड हार्मोन के उत्पादन को बाधित करके चयापचय को धीमा या संशोधित कर सकते हैं। ऐसे में जब हार्मोन का स्तर बहुत कम या बहुत अधिक हो जाता है, तो आपको इसके लक्षण भी नजर आते हैं। तो चलिए आज उन्हीं लक्षणों पर चर्चा करते हैं−
वजन का बढ़ना या घटना
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि वजन का बिना किसी विशेष कारण के घटना या बढ़ना थॉयराइड का सबसे पहला व प्रमुख लक्षण माना जाता है। वजन बढ़ना थायराइड हार्मोन के निम्न स्तर का संकेत दे सकता है, एक स्थिति जिसे हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। इसके विपरीत, यदि थायरॉयड शरीर की जरूरत से ज्यादा हार्मोन का उत्पादन करता है, तो आप अप्रत्याशित रूप से अपना वजन कम कर सकते हैं। यह हाइपरथायरायडिज्म के रूप में जाना जाता है।

गर्दन में सूजन
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, थॉयराइड होने पर अक्सर गर्दन में सूजन भी हो सकती है। थॉयराइड होने पर आपको गलगंड भी हो सकता है। कभी−कभी गर्दन में सूजन थायरॉयड कैंसर या नोड्यूल के कारण हो सकती है, एक गांठ जो थायरॉयड के अंदर बढ़ती है।

हार्ट रेट में बदलाव
थायराइड हार्मोन शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करते हैं और इसमें आपका हृदय भी शामिल है। हाइपोथायरायडिज्म से प्रभावित लोगों में हृदय की गति को सामान्य से धीमी हो सकती है। वहीं, हाइपरथायरायडिज्म के कारण हृदय तेज हो सकता है।

ऊर्जा या मूड में परिवर्तन
थायराइड विकार का आपके ऊर्जा स्तर और मूड पर भी प्रभाव पड़ता है। हाइपोथायरायडिज्म लोगों को थका हुआ, सुस्त और उदास महसूस कराता है। हाइपरथायरायडिज्म के कारण चिंता, नींद न आना, बेचैनी और चिड़चिड़ापन हो सकता है।

बालों का झड़ना
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, बालों का झड़ना भी थॉयराइड विकार का एक लक्षण है। हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों के कारण बाल झड़ सकते हैं। ज्यादातर मामलों में, थायराइड विकार का इलाज होने के बाद बाल वापस उग जाते हैं।

बहुत अधिक ठंडा या गर्म महसूस होना
थायराइड विकार शरीर के तापमान को विनियमित करने की क्षमता को बाधित कर सकते हैं। हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों को अक्सर सामान्य से अधिक ठंड महसूस होती है। वहीं, हाइपरथायरायडिज्म का विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे अत्यधिक पसीना और गर्मी का सामना करना पड़ता है।

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