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विश्व होम्योपैथी दिवस (डॉ सेमुअल हेनीमैन जयन्ती) 10 अप्रैल

विश्व होम्योपैथी दिवस (डॉ सेमुअल हेनीमैन जयन्ती) 10 अप्रैल

 

हर साल 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन को होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के रूप में भी जाना जाता है। आज पूरी दुनिया में लोग होम्योपैथी दवाओं पर भरोसा कर रहे हैं और उसके जरिए अपनी सेहत संबंधी समस्याओं का उपचार करवा रहे हैं।

यह दिन, होम्योपैथी के संस्थापक, जर्मन चिकित्सक डॉ क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है|

होम्योपैथी शब्द का अर्थ क्या है: होम्योपैथी यूनानी शब्द होमो से आया है जिसका अर्थ है समान और पैथोस जिसका अर्थ है दुःख या बीमारी।

होमियोपैथी उपचार| 18 वीं शताब्दी में भारत में आया होमियोपैथी, आज पूरी तरह से भारतीय संस्कृति में आत्मसात हो गया है| जैसे-जैसे होमियोपैथी का दायरा बढ़ रहा है, लोगों में इसके प्रति विश्वास भी बढ़ रहा है| आज दुनिया के कई देशों में होमियोपैथी से इलाज हो रहा है|

विश्व होम्योपैथी दिवस 2023 थीम

2023 विश्व होमियोपैथी दिवस (विश्व होम्योपैथी दिवस) की थीम होम्योपरिवार – सर्वजन स्वास्थ्य “एक स्वास्थ्य, एक परिवार” है, जो चिंता, अवसाद आदि सहित विभिन्न मानसिक स्वास्थ्य निर्देशों के उपचार के लिए होम्योपैथिक के उपयोग पर केंद्रित है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए, जिसमें मानसिक बीमारी के लक्षण और मूल कारण दोनों को शामिल किया गया है, समग्र दृष्टिकोण के महत्व पर जोर देता है।

होम्योपैथी का इतिहास

होम्योपैथी दवाओं और सर्जरी का उपयोग नहीं करती है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि हर कोई एक व्यक्ति है, उसके अलग-अलग लक्षण होते हैं और उसी के अनुसार इलाज किया जाना चाहिए। जर्मन चिकित्सक और केमिस्ट सैमुअल हैनीमैन (1755-1843) द्वारा व्यापक रूप से सफलता पाने के बाद 19वीं शताब्दी में होम्योपैथी को पहली बार प्रमुखता मिली। लेकिन इसकी उत्पत्ति 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व की है, जब ‘चिकित्सा के जनक’ हिप्पोक्रेट्स ने अपनी दवा की पेटी में होम्योपैथी उपचार पेश किया था।

विश्व होम्योपैथी दिवस क्यों मनाया जाता है?

इस दिन को होम्योपैथी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और होम्योपैथी की पहुंच में सुधार करने के लिए मनाया जाता है। होम्योपैथी को बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए आवश्यक भविष्य की रणनीतियों और इसकी चुनौतियों को समझना भी महत्वपूर्ण है। होम्योपैथी की औसत व्यवसायिक सफलता दर को बढ़ाते हुए, शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है।

10 अप्रैल, 1755 को पेरिस में जन्मे, हैनिमैन एक प्रशंसित वैज्ञानिक थे, उन्होंने होम्योपैथी के उपयोग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ करने का तरीका खोजा| 2 जुलाई, 1843 को उनकी मृत्यु हो गई थी।

कैटरेक्ट के ऑपरेशन के लिए किसी भी मौसम या समय का इंतजार नहीं करने की जरुरत डा.महिपाल एस.सचदेव

कैटरेक्ट के ऑपरेशन के लिए किसी भी मौसम या समय का इंतजार नहीं करने की जरुरत डा.महिपाल एस.सचदेव



सेंटर फॉर साइट नई दिल्ली

जब आंख का प्राकृतिक लेंस अपारदर्शी हो जाये तो उसे कैटरेक्ट कहते हैं। सामान्यतः आँखों के लेंस के माध्यम से ही प्रकाश रेटिना पर प्रतिबिम्ब बनाता है। यह प्रतिबिम्ब तंत्रिका तंत्र के द्वारा मस्तिष्क पर प्रकाश पुंज के वास्तविक प्रतिबिम्ब का आभास करता है। लेकिन की अवस्था में प्राकृतिक लेंस अपरदेशी हो जाता है, जिसके कारण प्रकाश रेटिना तक सही ढंग से नहीं पहुँच पाता है। अतः प्रतिबिंब धुंधला दीखता है। अक्सर बढ़ती उम्र के साथ आंख के लेंस के ऊपर का टिश्यू चोट लगने के कारण बदला जाये तो भी कैटरेक्ट जल्दी हो सकता है। कैटरेक्ट कई लोगांे को उनके परिवार हिस्ट्री की वजह से भी होता है, जैसे की परिवार में माता-पिता को डायबिटीज है, तो भी आपके कैटरेक्ट होने के संभावना बढ़ जाती है। कैटरेक्ट होने पर आम तौर पर नजर धुंधली पड़ जाती है, हलकी रौशनी में देखने में परेशानी होती है।

धुंधली एवं अस्पष्ठ नजर-दोहरी नजर-शुरुआती अवस्था में जल्दी-जल्दी चश्मा बदलने की जरुरत- कैटरेक्ट बढ़ने पर ज्यादा पावर वाला चश्मा भी नजर में सुधार नहीं कर पता है-दोनों आँखों के पावर में असंतुलन के चलते सर दर्द। अंधेरे कमरों जैसे कि सिनेमा हॉल जैसी जगहों पर दिखाई देने में परेशानी, रात के समय दिखाई देने में परेशानी, चश्मे का नंबर बार-बार बदलते रहना, बाहरी दृष्टि में हल्की-हल्की परेशानी, धुंधली नजर, आँखों में कुछ भाग से दिखाई न देना, किसी रौशनी के चारों ओर सतरंगी छल्ले दिखाई देना, आँख में तेज दर्द, मिचली, उल्टी या चेहरे में दर्द होना, आँखों में लाली रहना आदि।

एक जिसे हम इंग्लिश भाषा में सफेद मोतिया (वाइट कैटरेक्ट) के नाम से जानते हैं। ये उम्र के बढ़ने के साथ ही आपके आँखों के लेंस को धुंघला कर देता है और आँखों के कुदरती लेंस के ऊपर सफेद झिल्ली आ जाती है, जो की आपकी दृष्टि को दिन प्रति दिन प्रभावित करती है। काला मोतिया एक खतरनाक अवस्था है, जिसमे आँखों की दृष्टि समय के साथ सिमटती जाती है अगर समय पर इलाज न कराया जाये तो ये अंधेपन के करीब ले जा सकता है।
माइक्रो इंसीजन कैटरेक्ट सर्जरी: इस प्रक्रिया में 1.8 चीरे द्वारा कुदरती धुंधले हो चुके लेंस को निकल लिया जाता है और नया लेंस इम्प्लांट किया जाता है।

फेम्टो रोबोटिक कैटरेक्ट सर्जरी: इस प्रक्रिया में बहुत ही काम समय लगता है और मरीज अगले दिन से ही अपने रोजाना के काम करना शुरू कर सकता है। इस प्रक्रिया में लेजर को केवल 30 से 40 सेकंड का समय लगता है, ये बिलकुल सुरक्षित है और बेहद सटीक है, बिना किसी डिस्कम्फर्ट के आप कुछ ही मिंटो में पा सकते है साफ और बेहतर दृष्टि।
ब्लेड रहित लेजर कैटरेक्ट सर्जरी – लेजर को काम पूरा काम करने में बहुत काम समय लगता है। ज्यादा सुरक्षा, शुद्धता एवं सटीकता-लेजर के प्रयोग से कैप्सूलर छिद्र का निर्माण, मोतियाबिंद के टुकड़े करना एवं कॉर्नियल चीरा बनाना-जल्द रिकवरी के साथ बेहतर दृष्टि परिणाम देता है। रोबोटिक फेम्टो के बारे में एयर जाने दुनिया भर में उपलब्ध कैटरेक्ट के इलाज के क्षेत्र में फेम्टोसेकन्ड लेजर एक बिल्कुल नई एवं सर्वोत्तम तकनीक है।

फेम्टो लेजर के फायदे
100 प्रतिशत ब्लेड रहित तकनीक सटीक कटाव देती है एवं हस्त चलित ब्लेड के चीरे से बेहतर होती है। पारम्परिक सर्जरी में हाथ से चलाये जाने वाले उपकरणों से किये गए चीरे का घाव सिमित होता है। इसके विपरीत फेम्टोसेकन्ड लेजर में कॉर्नियल चीरा लगाने के लिए लेजर का प्रयोग किया जाता है। सटीकता से बना चीरा तेजी से भरता है और बाद में होने वाले संक्रमण का खतरा भी काम करता है। लेजर कैटरेक्ट को छोटे छोटे टुकड़ों में काट देता है। फिर रोबोटिक सटीकता से कॉर्नियल चीरे बनाये जाते हैं। यह सभी कार्य ब्लेड या सुईं का प्रयोग किये बिना किये जाते हैं। मरीज को बहता सुरक्षा फेम्टोसेकन्ड लेजर ने हस्तचालित बहुपरक्रियाओं एवं बहुउपकरणी फेको एमुल्सिफिकेशन प्रक्रिया को एक लेजर युक्त एवं कंप्यूटर चलित प्रक्रिया में बदल दिया है। फेम्टोसेकन्ड लेजर का प्रयोग की जाने वाली मोतियाबिंद सर्जरी में हर पहलु कंप्यूटर द्वारा किया जाता है एवं जांचा जाता है। इससे ऑपरेशन सुरक्षित होता है और बेहतर सर्जिकल परिणाम मिलते हैं।

अपने खान पान पर पूरा ध्यान दें और हेल्थी चीजे खाएं ज्यादातर विटामिन सी और विटामिन आई से भरपूर चीजे ले जैसे की पालक, गोभी, शलजम साग और अन्य पत्तेदार साग। स्मोकिंग से बचे। स्मोकिंग करने से अन्य बीमारियों के अलावा आंखों में मुक्त कण (फ्री रेडिकल्स) पैदा हो जाते हैं, जो आंख जो आँखों को नुकसान पहुँचाने हैं। सर्जरी से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? सर्जरी से 12 घंटे पहले कूछ भी खाने या पीने के लिए मन होता है और अगर कोई दूसरी दवा चल रही है, तो डॉक्टर आपको मन करेगा सिमित समय के लिए क्योंकि उससे आपकी सर्जरी में ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है। एंटीबायोटिक आंखों की दवा को आप को आंखों में डालने के लिए बोला जायेगा एक या दो दिन पहले।

आयुष्मान इलाज में टीएमयू हॉस्पिटल यूपी में अव्वल

आयुष्मान इलाज में टीएमयू हॉस्पिटल यूपी में अव्वल

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-आयुष्मान के अंतर्गत मुफ्त में इलाज करके तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने एक नया कीर्तिमान बनाया है। उल्‍लेखनीय है, आयुष्‍मान के अंतर्गत रिकॉर्ड पेशेंट्स का उपचार किया है। नतीजतन टीएमयू हॉस्पिटल यूपी में सरकारी और गैर सरकारी मेडिकल कालेजों में नंबर वन पर आया है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य की हॉस्पिटल टीम ने लगभग 2300 पेशेन्‍ट्स का गंभीर बीमारियों जैसे नी रिप्लेसमेंट, कार्डियक सर्जरी, हिप रिप्लेसमेंट, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और कोविड-19 का फ्री इलाज कराया है । कोरोना की फर्स्ट वेव में भी टीएमयू कोविड- 19 हॉस्पिटल ने यूपी में रिकॉर्ड कोरोना मरीजों को सेहतमंद किया था।

हॉस्पिटल की उत्कृष्ट वर्किंग को लेकर मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ खुद टीएमयू हॉस्पिटल की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने आला प्रबंधन को साधुवाद देते हुए कहा था, टीएमयू हॉस्पिटल कोविड पेंडेमिक के दौरान फर्स्ट डे से यूपी सरकार के साथ खड़ा है। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री सुरेश जैन और ग्रुप वाइस चेयरमैन श्री मनीष जैन के दिशा – निर्देश पर तीर्थंकर महावीर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के आयुष्मान मित्रों – श्री गौरव अग्रवाल, श्री नासिर, श्री रोहित त्यागी और जितेन्द्र चौधरी के उत्‍कृष्‍ट कार्यों पर डायरेक्टर प्लानिंग एंड डवलपमेन्ट श्री विपिन जैन ने प्रोत्साहन स्वरूप उन्‍हें नकद राशि देकर सम्‍मानित किया। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के चांसलर और जीवीसी ने आयुष्मान में भी यूपी में बुलंदी छूने पर इसका श्रेय डायरेक्टर एडमिन श्री अभिषेक कपूर , डायरेक्टर हॉस्पिटल श्री अजय गर्ग, डायरेक्टर हॉस्पिटल प्लानिंग एंड डवलपमेंट श्री विपिन जैन के संग- संग डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ को देते हैं।

कहीं आप गर्भवती तो नहीं, इन संकेतों से पहचानें

कहीं आप गर्भवती तो नहीं, इन संकेतों से पहचानें

गर्भधारण करना किसी भी स्त्री के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है। आमतौर पर, जब एक महिलाके पीरियड्स मिस हो जाते हैं तो उसे ऐसा लगता है कि वह गर्भवती हो गई है। यकीनन गर्भावस्था में महिला कोपीरियड्स नहीं आते और इसलिए इसे गर्भधारण का सबसे पहला और प्रमुख लक्षण माना जाता है। लेकिन इसकेअलावा भी ऐसे कई संकेत होते हैं, जो आपके गर्भवती होने की ओर इशारा करते हैं। तो चलिए जानते हैं इन संकेतोंके बारे में−

माहवारी ना आना
डॉक्टर बताते हैं कि जब एक महिला गर्भवती होती है तो उसके पीरियड्स आने खुद ब खुद बंद हो जाते हैं। ऐसे मेंअगर आपके पीरियड की डेट निकल गई हैं और एक सप्ताह बाद तक भी आपको माहवारी नहीं आ रही हैं तोबेहतर होगा कि आप एक बार प्रेग्नेंसी टेस्ट अवश्य कर लें।

सूजे हुए स्तन
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, गर्भावस्था के शुरूआती दौर में महिला में कई तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिसकेकारण उनके स्तन अधिक सेंसेटिव हो जाते हैं। कई बार आपको सूजन का अहसास भी हो सकता है। हालांकि कुछसप्ताह बाद यह होने वाली असुविधा काफी हद तक कम हो जाती है, क्योंकि शरीर हार्मोनल परिवर्तनों कोसमायोजित कर लेता है।

मतली या उल्टी
स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि गर्भावस्था में महिला को मतली या उल्टी हो सकती है। मॉÉनग सिकनेस, जो दिनया रात के किसी भी समय हो सकती है, अक्सर आपके गर्भवती होने के एक महीने बाद शुरू होती है। हालांकि, कुछमहिलाओं को पहले मतली महसूस होती है और कुछ को कभी इसका अनुभव नहीं होता है। जबकि गर्भावस्था केदौरान मतली का कारण स्पष्ट नहीं है, हालांकि ऐसा माना जाता है कि शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों केकारण ऐसा होता है।

अधिक पेशाब करना
यह भी अक्सर एक स्त्री के गर्भवती होने का संकेत देता है। हो सकता है कि इस समय आप सामान्य से अधिकबार पेशाब कर रही हो। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे आपकेगुर्दे अतिरिक्त तरल पदार्थ को संसाधित करते हैं जो आपके मूत्राशय में समाप्त हो जाते हैं। जिससे आपकोबार−बार पेशाब करने की इच्छा होती है।

थकान
गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों की अगर बात की जाए तो इसमें थकान भी शामिल है। प्रारंभिक गर्भावस्था केदौरानए हार्मोन प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे आपको नींद आ सकती है।

थॉयराइड होने पर नजर आते हैं यह लक्षण, तुरंत करवाएं जांच

थॉयराइड होने पर नजर आते हैं यह लक्षण, तुरंत करवाएं जांच

थॉयराइड आज के समय में एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है और महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है। थॉयराइड वास्तव में एक तितली के आकार की ग्रंथि है, जो मेटाबॉलिज्म की स्पीड को नियंत्रित करने वाले हार्मोन का उत्पादन करती है। थायराइड विकार थायराइड हार्मोन के उत्पादन को बाधित करके चयापचय को धीमा या संशोधित कर सकते हैं। ऐसे में जब हार्मोन का स्तर बहुत कम या बहुत अधिक हो जाता है, तो आपको इसके लक्षण भी नजर आते हैं। तो चलिए आज उन्हीं लक्षणों पर चर्चा करते हैं−
वजन का बढ़ना या घटना
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि वजन का बिना किसी विशेष कारण के घटना या बढ़ना थॉयराइड का सबसे पहला व प्रमुख लक्षण माना जाता है। वजन बढ़ना थायराइड हार्मोन के निम्न स्तर का संकेत दे सकता है, एक स्थिति जिसे हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। इसके विपरीत, यदि थायरॉयड शरीर की जरूरत से ज्यादा हार्मोन का उत्पादन करता है, तो आप अप्रत्याशित रूप से अपना वजन कम कर सकते हैं। यह हाइपरथायरायडिज्म के रूप में जाना जाता है।

गर्दन में सूजन
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, थॉयराइड होने पर अक्सर गर्दन में सूजन भी हो सकती है। थॉयराइड होने पर आपको गलगंड भी हो सकता है। कभी−कभी गर्दन में सूजन थायरॉयड कैंसर या नोड्यूल के कारण हो सकती है, एक गांठ जो थायरॉयड के अंदर बढ़ती है।

हार्ट रेट में बदलाव
थायराइड हार्मोन शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करते हैं और इसमें आपका हृदय भी शामिल है। हाइपोथायरायडिज्म से प्रभावित लोगों में हृदय की गति को सामान्य से धीमी हो सकती है। वहीं, हाइपरथायरायडिज्म के कारण हृदय तेज हो सकता है।

ऊर्जा या मूड में परिवर्तन
थायराइड विकार का आपके ऊर्जा स्तर और मूड पर भी प्रभाव पड़ता है। हाइपोथायरायडिज्म लोगों को थका हुआ, सुस्त और उदास महसूस कराता है। हाइपरथायरायडिज्म के कारण चिंता, नींद न आना, बेचैनी और चिड़चिड़ापन हो सकता है।

बालों का झड़ना
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, बालों का झड़ना भी थॉयराइड विकार का एक लक्षण है। हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों के कारण बाल झड़ सकते हैं। ज्यादातर मामलों में, थायराइड विकार का इलाज होने के बाद बाल वापस उग जाते हैं।

बहुत अधिक ठंडा या गर्म महसूस होना
थायराइड विकार शरीर के तापमान को विनियमित करने की क्षमता को बाधित कर सकते हैं। हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों को अक्सर सामान्य से अधिक ठंड महसूस होती है। वहीं, हाइपरथायरायडिज्म का विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे अत्यधिक पसीना और गर्मी का सामना करना पड़ता है।

हर महीने होने वाली पीएमएस की समस्या से कुछ इस तरह पाएं छुटकारा

हर महीने होने वाली पीएमएस की समस्या से कुछ इस तरह पाएं छुटकारा

पीएमएस जिसे प्री−मेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम भी कहा जाता है, इस स्थित किा सामना अधिक महिलाएं मासिक धर्म शुरू होने से कुछ दिन पहले से ही करने लगती हैं। हालांकि हर महिला में इसके लक्षण अलग−अलग नजर आते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह समस्या महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण होता है। जिन महिलाओं का पीएमएस की समस्या होती है, उन्हें शरीर के अलग−अलग भागों के दर्द के अलावा, स्तनों में सूजन, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, बहुत गुस्सा आना व नींद ना आना जैसी अन्य भी कई समस्याएं होती है। ऐसे में पीएमएस की समस्या को मैनेज करने के लिए आप कुछ आसान उपाय अपना सकती हैं। तो चलिए जानते हैं इन उपायों के बारे में−
लें संतुलित आहार
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि अपनी डाइट में हेल्दी इंग्रीडिएंट्स को शामिल करके आप पीएमएस से काफी हद तक छुटकारा पा सकती हैं। कुछ शोध बताते हैं कि पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी युक्त आहार पीएमएस के खतरे को कम कर सकते हैं। वहीं, थायमिन (विटामिन बी 1) और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी 2) को भी डाइट में पर्याप्त मात्रा में शामिल करने से पीएमएस को आसानी से मैनेज किया जा सकता है।

तनाव को करें कम
तनाव को कम करके भी प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है। यदि चिंता या इरिटेशन आपके पीएमएस पैटर्न का हिस्सा है, तो आप योग, श्वास व्यायाम, या माइंडफुलनेस−आधारित एक्टिविटी करें। तनाव में कमी से आप अपनी नसों को शांत करने का प्रयास करें।

हर दिन करें वर्कआउट
यह भी एक तरीका है, जिसे अपनाकर आप पीएमएस के लक्षणों को कम सकती हैं और कुछ ही समय में उससे छुटकारा पा सकती हैं। यहां इस बात का ध्यान रखें कि जब आपको लक्षण नजर आएं, केवल तभी व्यायाम न करें, बल्कि इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। नियमित व्यायाम से प्रीमेन्स्ट्रुअल सिरदर्द, स्तन में सूजन, मितली, कब्ज, दस्त, सूजन और उल्टी की समस्या को दूर करने में मदद मिल सकती है।

मैग्नीशियम की अधिकता
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि मैग्नीशियम की कमी से चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। इसलिए मैग्नीशियम पूरक लेने से पीएमएस से संबंधित लक्षण जैसे सिरदर्द, सूजन और चिड़चिड़ेपन को दूर करने में मदद मिल सकती है। वहीं अगर आप मैग्नीशियम के साथ बी 6 का सेवन करती हैं तो इससे आपको अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है।

बहुत अधिक आता है गुस्सा तो इन तरीकों से करें उसे कम

बहुत अधिक आता है गुस्सा तो इन तरीकों से करें उसे कम

गुस्सा एक ऐसा मनोभाव है, जो हम सभी में कहीं ना कहीं छिपा होता है। विपरीत स्थितियों में अक्सर हम गुस्सा कर बैठते हैं। हालांकि कुछ हद तक गुस्सा करना ठीक भी माना जाता है। जिस तरह हम अपनी खुशी व दुख को दर्शाते हैं, ठीक उसी तरह गुस्से का बाहर आना भी कई मायनों में अच्छा माना जाता है। इससे आपका मन शांत हो जाता है और आप रिलैक्सड हो जाते हैं। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है, जब आपको बहुत अधिक गुस्सा आता हो। आप हर छोटी बात पर चिढ़कर चिल्लाने लगते हों। ऐसे व्यक्ति के साथ कोई भी नहीं रहना चाहता। हो सकता है कि आपको भी बहुत अधिक गुस्सा आता हो और आप चाहकर भी उसे नियंत्रित ना कर पाते हों। इस स्थिति में आप यहां दिए गए कुछ उपाय अपना सकते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि अक्सर ऐसा होता है कि जब हमें गुस्सा आता है, तब हम एकदम से बोल पड़ते हैं। लेकिन उस समय हमारे मुंह से कड़वे शब्द ही निकलते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि उस वक्त के लिए हम चुप हो जाएं। हो सकता है कि चुप होने पर हम सामने वाले की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ पाएं। इसके अलावा, जब आप थोड़ा शांत हो, तब बोलें।

निकल जाएं बाहर
यह भी एक तरीका है गुस्से को शांत करने का। जब हमें किसी चीज या व्यक्ति पर गुस्सा आ रहा होता है और वह हमारी आंखों के सामने ही रहे तो इससे गुस्सा बढ़ता जाता है। ऐसे में आप कुछ देर के लिए बाहर निकल जाएं। आप चाहें तो एक चॉकलेट या आइसक्रीम खाकर आएं। इससे मन को खुशी मिलती है और गुस्सा भी दूर होता है। देखिएगा, जब आप वापिस लौटकर आएंगे तो आपको खुद में काफी बदलाव महसूस होगा।

करें एक्सरसाइज
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि गुस्सा आने पर फिजिकल एक्सरसाइज करना भी एक अच्छा विचार है। शारीरिक गतिविधि तनाव को कम करने में मदद कर सकती है जिससे आप क्रोधित हो सकते हैं। इसलिए, अगर आपको बहुत अधिक गुस्सा आ रहा है तो तेज चलें या फिर दौड़ें। इसके अलावा आप अन्य शारीरिक गतिविधियां करें।

रिलैक्सेशन तकनीक
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, जिन लोगों को बहुत अधिक गुस्सा आता है, उन्हें नियमित रूप से कुछ रिलैक्सेशन तकनीक को अपनाना चाहिए। मसलन, ऐसे लोगों को डीप ब्रीदिंग, योगा, व ध्यान आदि जरूर करना चाहिए। इससे उनका मन शांत होता है। लगातार इन चीजों के अभ्यास उन्हें धीरे−धीरे गुस्सा कम आने लगता है तो फिर गुस्से को कंटोल करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

आधुनिकता की देन है: वेरिकोज अल्सर

आधुनिकता की देन है: वेरिकोज अल्सर

नई दिल्ली/संवाददाता। कई क्षेत्रों में आधुनिक लाइफस्टाइल के बढ़ते दखल ने कई ऐसे रोगों में इजाफा किया है, जिनका पहले कभी हमने नाम तक नहीं सुना था। ऐसी ही एक बीमारी का नाम है वेरिकोज वेन। इस बीमारी में पैरों की नसें मोटी हो जाती है। यदि वेरिकोज वेन का समय पर इलाज नहीं कराया जाए, तो वह वेरिकोज अल्सर में बदल जाता है जो सीधे तौर पर निष्क्रिय लाइफ स्टाइल का दुष्परिणाम है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत की लगभग 15 से 20 प्रतिशत आबादी इन दिनों वेरिकोज अल्सर से पीड़ित है। इस रोग से पीड़ित महिलाओं की तादाद पुरुषों के मुकाबले चार गुना ज्यादा है। कम उम्र की ऐसी युवतियों में भी वेरिकोज अल्सर पनपने का खतरा बढ़ने लगा है, जो तंग जीन्स और ऊंची एड़ियों वाली जूतियां पहनती हैं। वेरिकोज अल्सर दोनों टांगों में हो सकता है, जहां कई सारे वॉल्व होते हैं और जिनसे हृदय तक रक्तप्रवाह में मदद मिलती है। जब ये वॉल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो टांगों में रक्त जमा होने लगता है जिस वजह से सूजन, दर्द, थकान, बदरंग त्वचा, खुजलाहट और वेरिकोसिटी (नसों में सूजन) जैसी समस्या होती है। यदि समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो टांग में असाध्य अल्सर भी विकसित हो सकता है जो सिर्फ एड़ी के पास ही होता है। वेरिकोज अल्सर के कारकों में मोटापा, व्यायाम का अभाव, गर्भधारण के दौरान नसों पर असामान्य दबाव, बेतरतीब लाइफस्टाइल, लंबे समय तक खड़े रहना तथा अधिक देर तक टांग लटकाकर बैठना शामिल है।

आजकल कंप्यूटर प्रोफेशनल, रिसेप्शनिस्ट, सिक्योरिटी गार्ड, ट्रैफिक पुलिस, दुकानों तथा डिपार्टमेंटल स्टोर्स में काउंटर पर कार्यरत सेल्समैन, लगातार डेस्क जॉब करने वाले लोगों में वेरिकोज अल्सर के मामले सबसे ज्यादा पाए जाते हैं।ह्व महिलाओं के कुछ खास हार्मोन के कारण इन नसों की दीवारें फूल जाती हैं। इसके अलावा गर्भधारण के दौरान टांगों की नसों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ने के कारण ये नसें कमजोर और सूज जाती हैं। डॉप्लर परीक्षण द्वारा सामान्य जांच और अल्ट्रासाउंड कराने से क्षतिग्रस्त वॉल्व और सूजी हुई नसों के रूप में इस रोग का सटीक स्थान देखा जा सकता है। अभी तक वेरिकोज अल्सर के इलाज के लिए उपलब्ध उपचार विकल्पों में लेटने या बैठने के दौरान टांग ऊपर उठाकर रखना, कभी-कभी टांगों को मोड़कर रखना और मामूली रोग के लिए स्क्लेरोथेरेपी शामिल हैं। रोग बहुत ज्यादा बढ़ जाने पर वेन स्ट्रिपिंग जैसी बड़ी सर्जरी करानी पड़ती है जिस वजह से टांगों में भद्दा दाग पड़ जाता है और रिकवरी में भी ज्यादा वक्त लगता है।ह्वआजकल मल्टी-पोलर आरएफए मशीन का इस्तेमाल करते हुए इस रोग के इलाज में रेडियो फ्रिक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) सबसे आधुनिक और प्रभावी पद्धति है। ह्लकलर-डोप्लर अल्ट्रासाउंड विजन के जरिये असामान्य नसों में एक रेडियोफ्रिक्वेंसी कैथेटर पिरोया जाता है और रक्तनलिका का इलाज रेडियो-एनर्जी से किया जाता है जिस कारण इसके साथ जुड़ी नसों पर प्रभाव पड़ता है। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट असामान्य नस में एक छोटा कैन्युला प्रवेश कराते हुए एड़ी के ठीक ऊपर या घुटने के नीचे असामान्य सैफेनस नस तक पहुंच बनाते हैं। एब्लेशन के लिए एक पतले और लचीले ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे कैथेटर कहा जाता है। कैथेटर की नोक पर छोटा-सा इलेक्ट्रोड लगा होता है जो मोटी नसों को क्षतिग्रस्त कर देता है। परंपरागत सर्जिकल उपचार के उलट इस पद्धति में न तो जनरल एनेस्थेसिया, न त्वचा पर सर्जिकल कट के निशान और न ही रक्तस्राव या रक्त चढ़ाने की जरूरत रहती है और इसमें बहुत तेज रिकवरी होती है। आम तौर पर इस रोग के अल्सर बनने में कई वर्ष लग जाते हैं इसलिए अल्सर को भरने में बहुत ज्यादा समय लगने पर भी कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हालांकि ज्यादातर अल्सर 3-4 महीने में भर जाते हैं लेकिन कुछेक अल्सर को ठीक होने में पर्याप्त समय लग सकता है। लेकिन अल्सर ठीक हो जाने का मतलब यह नहीं है कि यह समस्या खत्म हो गई है। भले ही ऊपरी त्वचा दुरुस्त हो जाए लेकिन नसों के अंदर की समस्या बनी रहती है और आपको अल्सर की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सावधानियां बरतनी होंगी। कुछ गंभीर मामलों में आपको दिनभर हमेशा कंप्रेशन स्टॉकिंग या पट्टी लगाकर रहना पड़ सकता है, जहां तक संभव हो पैरों को ऊपर रखना होगा और त्वचा की शुष्कता दूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मॉश्चुराइजिंग क्रीम का इस्तेमाल करते हुए त्वचा को अच्छी स्थिति में रखना होगा। वजन में कमी, ताजा फल का सेवन, व्यायाम करना और धूम्रपान से दूर रहना भी अल्सर को भरने में कारगर होता है। आज यूटेरिन फाइब्रोइड्स, यूटेरिन एडेनोमायोसिस, अन-आॅपरेबल लीवर ट्यूमर, लीवर एब्सेसस, अवरुद्ध फेलोपियन ट्यूब खुलने, ब्रेन एन्यूरिज्म और फेफड़ों तथा पेट से रक्त की उल्टी जैसी कई बीमारियों के इलाज इंटरवेंशनल रेडियोलोजिस्ट के द्वारा किया जा सकता है।

डॉ.प्रदीप मुले
हेड इंटरवेशनल रेडियोलोजिस्ट
फोर्टिस हास्पिटल वंसतकुंज, नई दिल्ली

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण मेंटल हेल्थ पर पड़ता है विपरीत असर

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण मेंटल हेल्थ पर पड़ता है विपरीत असर



आज के समय में लोग कई तरह की फिजिकल और मेंटल हेल्थ समस्याओं की शिकायत करते नजर आते हैं। बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के पीछे एक मुख्य कारण लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ गलतियां होती हैं। जिन पर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक साबित होती हैं। तो चलिए आज हम आपको ऐसी ही कुछ लाइफस्टाइल मिसटेक्टस के बारे में बता रहे हैं, जिसके कारण आपकी मेंटल हेल्थ पर विपरीत असर पड़ता है−

कम या अधिक नींद
कुछ लोग काम के चक्कर में देर रात जागते हैं और बेहद कम नींद लेते हैं या फिर अगर आप जरूरत से ज्यादा सोते हैं तो यह भी आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। दरअसल, इनसोमनिया और ओवरस्लीपिंग दोनों ही डिप्रेशन के लक्षण है। बेहतर होगा कि आप गुड स्लीप हाईजीन को फॉलो करें और सही मात्रा में नींद लें।
सोशल मीडिया का प्रभाव
सोशल मीडिया आज के समय में हर किसी की लाइफ का एक अहम् हिस्सा बन गया है। लेकिन सोशल मीडिया का ऑब्सेशन आपकी मेंटल हेल्थ को बहुत अधिक प्रभावित करता है। आपको शायद पता ना हो लेकिन सोशल मीडिया और आपके मूड का आपस में सीधा संबंध है। जब आप सोशल मीडिया पर अपनी कोई फोटो या मैसेज पोस्ट करते हैं और लोग उस पर रिस्पॉन्स ना करें तो इससे आपका मूड ऑफ हो जाता है। कई बार तो दूसरों के सोशल मीडिया को देखकर भी व्यक्ति खुद को डिप्रेस्ड फील करते हैं।

नेगेटिव थिंकिंग
यह भी एक ऐसी लाइफस्टाइल मिसटेक है, जो आपके मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालती है। आजकल अधिकतर व्यक्ति पॉजिटिव थिंकिंग से ज्यादा नेगेटिव थिंकिंग रखते हैं। जब आप नकारात्मक सोचते हैं तो इससे आपका दिमाग परेशान होता है और तनाव, अवसाद जैसी मानसिक परेशानियां शुरू हो जाती हैं।
जंक फूड का सेवन
कुछ लोग अपनी हैप्पीनेस को खाने से जोड़ते हैं। मसलन, जब वह परेशान होते हैं तो जंक फूड या बाहर का खाना खाते हैं। इससे उन्हें उस समय के लिए भले ही अच्छा लगे, लेकिन लॉन्ग रन में यह नुकसानदायक साबित होता है। एक अध्ययन के अनुसार, जंक फूड और डिप्रेशन का आपस में सीधा संबंध है। वैसे भी जंक फूड से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं जो बाद में मानसिक परेशानियों की भी वजह बनता है।



कोरोना वायरस से बचाव के लिए आवश्यक दिशा निर्देश : उपायुक्त

कोरोना वायरस से बचाव के लिए आवश्यक दिशा निर्देश : उपायुक्त

देवघर : उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी श्रीमती नैन्सी सहाय ने सभी सरकारी व निजी अस्पतालों के चिकित्सकों को नोवल कोरोना वायरस से बचाव व सुरक्षा हेतु आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिया है। इसके अलावा उन्होंने जानकारी दी कि भारत के केरल, दिल्ली, तेलंगाना, जयपुर शहरों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है। झारखण्ड में कोरोनावायरस की पुष्टि नहीं हुई है, किन्तु राज्य में सावधानी बरतने एवं सतर्क रहने की जरूरत है। अतः इस संदर्भ में निम्नलिखित बिन्दुओं पर आवश्यक कदम उठाते हुए कोरोनावायरस के प्रसार एवं रोकथाम हेतु अपील की है।

  1. चीन राष्ट्र, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, इटली, ईरान, वियतनाम, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैण्ड, हांगकांग, नेपाल से आये हुए Travelling Passengers की सूचना प्राप्त होने पर यात्रियों के स्वास्थ्य की सतत् निगरानी हेतु संभावित लक्षण दिखने पर उनका उपचार कर सूचना जिला अस्पताल, सिविल सर्जन कार्यालय, जिला सर्विलेंस ईकाई-एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम, Integrate Diseasse Survellance Programme (IDSP) को ईमेल-idspjharkhand2@gmail.com पर सूचित करेंगे।
  2. उपरोक्त देश से आये हुए यात्रियों के स्वास्थ्य जांच की सतत् निगरानी के दृष्टिकोण से 28 दिनों तक पृथक देखभाल (Home Quaranatine) में रखा जाना अपेक्षित है।
  3. अपने अस्पताल तथा निजि क्लिनिक के खास जगहों यथा-Hand railings, Desktop, Switches, Plastic items, Reception counter, Door knobs तथा अन्य toch Surfaces को प्रतिदिन ।Alcohol based sanitizer से साफ-सुथरा रखवाना सुनिश्चित करेंगे।
  4. उपर्युक्त वर्णित देशों के यात्रा किये हुए अथवा संभावित बीमारी के लक्षण दिखने पर अग्रतर जांच हेतु तत्काल दूरभाष संख्या – 2261000/2261856 एवं मोबाईल नम्बर 9955837428 पर आई0डी0एस0पी0 कार्यक्रम को सूचित करें।
    इसके अलावे उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नवीन कोरोनावायरस से बचाव एवं रोकथाम हेतु संभावित यात्रियों की सतत् निगरानी करते हुए कृत कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे।
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