Your SEO optimized title

पर्यटन स्थल

अभ्यास एजुकेशन के 110 विद्यार्थी पिकनिक में शामिल हुए

अभ्यास एजुकेशन के 110 विद्यार्थी पिकनिक में शामिल हुए

देवघर/शेखर सुमन। सोमवार को त्रिकूट पर्वत पर अभ्यास एजुकेशन के लगभग 110 विद्यार्थी पिकनिक शामिल हुए। यह आयोजन कोचिंग के संचालक सुमन शौर्य के नेतृत्व में हुआ। सहयोगी शिक्षक आजाद लालू रोहित, रंजीत व अन्य अतिथि के रूप में मां सरस्वती ज्ञान केंद्र के अध्यक्ष मानिक कुमार,प्रचार्य दीपक कुमार, सोनू कुमार, शशि मिश्रा, आरव राज व अन्य शामिल थे।

सभी विद्यार्थी के लिए कई खेलकूद, पिकनिक व डांस का आयोजन हुआ। विद्यार्थी श्रृंखला में एक साथ पर्वत पर चढ़कर प्राकृतिक दृश्य का आनंद लिया व इस क्रम में सभी विद्यार्थी उत्साहित थे, इस अवसर पर सभी बच्चे ने इस आयोजन के लिए सभी शिक्षक को धन्यवाद दिया एवं त्रिकूट पर्वत की खूब तारीफ किया।

विलुप्त होने के कगार में फुलजोरी पहाड़ की जड़ी-बूटियां

विलुप्त होने के कगार में फुलजोरी पहाड़ की जड़ी-बूटियां

पालोजोरी/संवाददाता। प्रखंड मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित फुलजोड़ी पहाड़ जिसका नजारा काफी मनमोहक वादियों में से एक है। इसका छटा उमड़ते-घुमड़ते बादलों के बीच ओर भी काफी अतिसुंदर दिखते हैं। जिसको लेकर फुलजोड़ी पहाड़ के मनोरम दृश्य को देखने को लेकर लोग बाहर के अलावा यहां के आसपास के इलाकों से भी लोगों का भी आना जाना लगा रहता है। लोगों का कहना है की यहां पर लोग पिकनिक स्पॉट के तौर पर मुख्य रूप से आते है। यहां के मनोरम दृश्य देखने योग्य है।

वहीं लोगों का कहना है की पहले फुलजोरी पहाड़ की रोनक काफी कुछ बयां करती हैं साथ ही फुलजोरी पहाड़ में बैशकिमती लकड़ीया हुआ करते थे जिससे पहाड़ की हरे भरे वातावरण देखने को मिलते थे। आये दिन फुलजोरी पहाड़ की बेशकीमती लकड़ियों को प्रतिदिन लकड़ी माफियाओं द्वारा काट लिया जाता है। साथ ही इससे वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है व इस मनमोहन वादियों को भी नष्ट की जा रही है। जहां सरकार का कहना है की जल जंगल जमीन बचाया जाय वहीं वन विभाग इस तरह के कार्यों को नजरंदाज कर विभाग की इस लापरवाही से फुलजोड़ी पहाड़ की बेशकीमती लकड़ियों को लकड़ी माफियाओं द्वारा काट ले जाते हैं।

यहां के लोगों ने बताया की इस क्षेत्र में कई विधायक सांसद आये गये लेकिन इस फुलजोरी पहाड़ को किसी ने इसे निखारने का प्रयास नहीं किया। वहीं इसकी जानकारी व आपबिति बताते समाजसेवी दिलीप कुमार गोस्वामी,अनुप सिंह, बिक्रम तिवारी, तपन तिवारी, मनोज कुमार तिवारी, फुरकान अंसारी, आदि लोगों ने कहा ।

भारत में स्कीइंग के शौकीनों के लिए बेहतरीन गंतव्य स्थल

भारत में स्कीइंग के शौकीनों के लिए बेहतरीन गंतव्य स्थल


स्कीइंग, मनोरंजन, खेल, और परिवहन का एक तरीका है, जिसमें एक जोड़ी लंबे, सपाट रनर्स का उपयोग करके बर्फ पर चलना शामिल होता है, जिसे स्की कहा जाता है और यह आपके जूते या बूट से जुड़ा होता है। प्रतिस्पर्धी स्कीइंग को अल्पाइन, नॉर्डिक और फ्रीस्टाइल घटनाओं में विभाजित किया गया है। स्पीड स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसी प्रतियोगिताओं में भी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। सीधे शब्दों में स्कीइंग बर्फ पर फिसलने के लिए स्की का उपयोग करके परिवहन का एक साधन है। कई प्रकार की स्कीइंग स्पर्धाओं को अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति और अंतर्राष्ट्रीय स्की महासंघ द्वारा मान्यता प्राप्त है।

उत्तरी भारत में शक्तिशाली हिमालय है, जो लोगों को यहां स्कीइंग करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। भारत में प्रमुख स्कीइंग गंतव्य हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और जम्मू और कश्मीर में स्थित हैं। यदि आप बर्फ से प्यार करते हैं और स्कीइंग का आनंद लेना चाहते हैं, तो हम आपको भारत के शीर्ष स्कीइंग स्थलों के बारे में बताते हैं, जो आपको एक अद्भुत और साहसिक अनुभव प्रदान करते हैं।
भारत में सर्वश्रेष्ठ स्कीइंग गंतव्य

पहलगाम
पहलगाम जम्मू और कश्मीर में अनंतनाग जिले का एक ख़ूबसूरत शहर है। यह शहर हिमालय के पश्चिमी क्षेत्र से घिरा हुआ है। पहलगाम यहाँ के शानदार मार्गों के कारण ट्रेकर्स के लिए प्रसिद्ध है। सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है, जो इसे एक आदर्श स्कीइंग स्पॉट में बदल देती है। पहलगाम में मुख्य स्कीइंग बिंदु अरु है जो थोड़ी दूरी पर स्थित है और यहां स्कीइंग करते समय परमानंद को महसूस करने के लिए एक आदर्श स्थान है।
स्कीइंग के लिए पहलगाम जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के बीच का होता है।

गुलमर्ग
गुलमर्ग एक शहर, एक हिल स्टेशन, एक लोकप्रिय स्कीइंग गंतव्य और भारत के जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित एक अधिसूचित क्षेत्र समिति है। यह शहर पश्चिमी हिमालय में पीर पंजाल रेंज में स्थित है और गुलमर्ग वन्यजीव अभ्यारण्य की सीमाओं के भीतर स्थित है।
गुलमर्ग भारत में सर्वश्रेष्ठ स्कीइंग की पेशकश के लिए जाना जाता है और यह एशिया में 7 वें सर्वश्रेष्ठ स्कीइंग गंतव्य के रूप में शुमार है। गुलमर्ग में आप गुलमर्ग गोंडोला नामक उच्च केबल कार की सवारी भी कर सकते हैं।
स्कीइंग के लिए गुलमर्ग जाने का सबसे अच्छा समय दिसंबर से मार्च महीने के बीच का है।

रोहतांग पॉस
मनाली का दौरा करते समय रोहतांग पॉस सभी शौकीनों और पेशेवर स्कीयरों के लिए भारत में एक लोकप्रिय स्कीइंग गंतव्य के रूप में जाना जाता है। 3978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, रोहतांग दर्रा वास्तव में एक आनंददायक स्कीइंग का शानदार अनुभव प्रदान करता है। यह मनाली से 51 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहाँ चढ़ाई वाली आकर्षक और मनमोहक वादियों से गुजरते हुए पहुँचा जा सकता है।
स्कीइंग के लिए रोहतांग दर्रा घूमने का सबसे अच्छा समय दिसंबर से फरवरी का होता है।

नारकंडा
नारकंडा हिंदुस्तान तिब्बत रोड पर समुद्र तल से 2708 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक छोटा सा एकांत शहर है। उच्च बर्फ़ से ढके पहाड़ शहर की पृष्ठभूमि बनाते हैं, जिससे इसके आगंतुक अपनी सुंदरता से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। भारत के कई स्कीइंग गंतव्यों में से एक, नारकंडा हिमाचल में एक आदर्श स्थान है, जहाँ स्कीयर बर्फ के माध्यम से सवारी का आनंद ले सकते हैं।
स्कीइंग के लिए नारकंडा जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के बीच का होता है।

कुफरी
कुफरी हिमाचल प्रदेश में छिपा एक रत्न है। यह स्थान कई पर्यटकों को आकर्षित करता है, विशेषकर स्कीयर। कुफरी की बर्फ से ढकी ढलान स्कीइंग के लिए आदर्श हैं। कुफरी निश्चित रूप से भारत में स्नो स्कीइंग के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य है और हर साल देश भर के सैकड़ों स्कीयर यहां स्की करने और कुछ साहसिक कार्य करने के लिए आते हैं।
स्कीइंग के लिए कुफरी जाने का सबसे अच्छा समय दिसंबर से फरवरी का है।

मुनस्यारी
मुनस्यारी भारत में एक और प्रसिद्ध स्कीइंग गंतव्य है, जो जोहर घाटी के प्रवेश द्वार पर स्थित है। मुनस्यारी पर्वतारोहियों, ग्लेशियर के प्रति उत्साही लोगों और उच्च ऊंचाई वाले ट्रेकर्स के लिए एक आकर्षक केंद्र बनाता है। स्नो-क्लेड ढलान भी आपके स्कीइंग कौशल को परखने का एक शानदार अवसर प्रदान करते हैं।
मुनस्यारी, तिब्बत की सीमा से लगे उत्तराखंड के पूर्वी पहाड़ी जिले पिथौरागढ़ में स्थित है, जिसे ‘लिटिल कश्मीर’ के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और साहसिक लोगों के लिए एक स्वर्ग है। यहाँ से हिमालय की चोटी, पंचचूली का लुभावना दृश्य दिखाई देता है।
स्कीइंग के लिए मुनस्यारी जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी का होता है।

औली
औली समुद्र तल से 2500 से 3000 मीटर की ऊँचाई पर घरवाली पहाड़ियों के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है। यह शहर ज्यादातर आम जनता से अछूता रहता है और बेहद साफ-सुथरा है। भारत के सर्वश्रेष्ठ स्कीइंग गंतव्यों में से एक होने के अलावा, औली हर स्कीयर को कई स्नो-क्लैड चोटियों जैसे डुनागिरी, माउंट नंदा देवी, नर पर्वत, मैना पर्वत, घोड़ी पर्वत, नीलकंठ, बीथरटोली और हाथी पर्वत के भी शानदार दृश्य प्रदान करता है। औली ऋषिकेश से लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो सभी अनुभवी स्कीइंग पेशेवरों द्वारा अच्छी तरह से जाना जाता है।
स्कीइंग के लिए औली जाने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च का होता है।

मनाली
मनाली से लगभग 12 किमी दूर सोलंग वैली नाम का एक शानदार स्कीइंग गंतव्य है। जब कोई ये कहता है कि आप मनाली में स्की कर सकते हैं, तो इसका मतलब वास्तव में सोलंग वैली ही होता है। यह सोलांग नाला के रूप में भी जाना जाता है, जो अपने सही स्की ढलानों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ हर साल शीतकालीन स्कीइंग उत्सव का आयोजन होता है, जिसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आने वाले प्रतिभागी हिस्सा लेते हैं।
मनाली / सोलंग घाटी की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय दिसंबर और फरवरी के बीच होता है, जब बर्फ की परतें मोटी हो जाती हैं और उत्कृष्ट स्कीइंग का आनंद प्रदान करती हैं।

दयारा बुग्याल
दयारा बुग्याल भारत के सबसे दर्शनीय स्कीइंग स्थानों में से एक है। यह उत्तराखंड राज्य में स्थित है। दयारा बुग्याल में घास के मैदान और खड़ी बर्फीली ढलान हैं। यह दो हिमाच्छादित चोटियों के बीच स्थित है – बंदर पुंछ और सफेद चोटी। हालाँकि, दयारा बुग्याल ग्रीष्मकाल में एक हरे-भरे घास का मैदान है, यह सर्दियों में एक अद्भुत स्कीइंग गंतव्य में बदल जाता है, क्योंकि यह पूरी तरह से मोटी बर्फ में ढंका हुआ होता है और सबसे अच्छा स्कीइंग अनुभव के लिए लोकप्रिय है।
दयारा बुग्याल जाने का सबसे अच्छा समय मध्य अक्टूबर से जनवरी के बीच का होता है।

युमथांग
उत्तर सिक्किम में युमथांग भारत में एक और प्रसिद्ध स्कीइंग गंतव्य है और इसे अन्य गतिविधियों जैसे माउंटेन बाइकिंग, ट्रेकिंग और हाइकिंग के लिए भी जाना जाता है। सर्दियों में पूरी घाटी बर्फ से ढँक जाती है और जब आप युमथांग घाटी में स्कीइंग करते हैं तो आपको एक असली अनुभव मिलता है।
युमथांग घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च के बीच का होता है।

क्या आप भी बना रहें हैं दिसम्बर में घूमने का प्लान, यह रहीं बेहतरीन लोकेशन्स

क्या आप भी बना रहें हैं दिसम्बर में घूमने का प्लान, यह रहीं बेहतरीन लोकेशन्स

घूमने-फिरने के शौकीन लोगों को सिर्फ एक मौके का इंतजार होता है। ये तरह-तरह के रोमांचक जगहों की तलाश करते रहते हैं। जहां कुछ लोग मौसम को ध्यान में रखते हुए घूमना पसंद करते हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो सिर्फ अपना मूड सही करने के लिए टूर पर जाना पसंद करते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो दिसम्बर माह में घूमना ज्यादा पसंद करते हैं। इस माह के आखिरी पांच-सात दिन मजेदार रहते हैं। 25 दिसम्बर से ही पार्टी एंड एन्जॉयमेंट की शुरुआत हो जाती है।


अगर आप भी इन्हीं में से एक हैं जो दिसम्बर मे घूमने का प्लान बना रहे हैं, या ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं जहां आप अपने नए साल की शुरुआत करना चाहते हैं। तो आइए आपको उन जगहों के बारे में बताने हैं जो देखने में खूबसूरत, रोमांचक और आनंद पूर्वक होने के साथ नए साल मनाने के लिए काफी अच्छी मानी जाती है…

गोवा
छुट्टियां मनाने के लिए गोवा शानदार जगहों में से एक मानी जाती है। यहां दिसम्बर में अगर आप जाने का प्लान बनाते हैं तो आपको 25 दिसम्बर और नये साल की पार्टी का जश्न देखने को मिल सकता है। यहां पर काफी लोग नाइट पार्टी का लुत्फ उठाने आते हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो बीच के किनारे बैठकर मजे करते हैं। अगर खर्चे की बात की जाए तो यहां कम पैसे में भी काफी मजे उठाए जा सकते हैं। दिसम्बर माह में यहां विदेशी लोग ज्यादा नजर आते हैं। ये जगह कपल और दोस्तों के साथ घूमने के लिए बेहतरीन मानी जाती है।

केरल
केरल एक ऐसी जगह है जहां सुकून के पल बीताए जा सकते हैं। यहां दिसम्बर के महीने में कई लोग घूमने आते हैं। ये जगह नए साल मनाने के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। यहां के सुबह और शाम का नजारा देखने में काफी अच्छा लगता है। यहां आपको चारों ओर हरियाली ही हरियाली देखने को मिल सकती है। इतना ही नहीं, यहां का भोजन भी काफी स्वादिष्ट होता है। अगर बात करें खर्चे की तो यहां आपके जेब पर ज्यादा भार नहीं पड़ेगा।

दुबई
दुबई में आप दिसम्बर में जाकर नए साल का मजा उठा सकते हैं। यहां कपल, दोस्त या परिवार के सदस्य भी ज्यादा जाते हैं। यहां घूमने के साथ शॉपिंग भी की जा सकती है। यहां कई तरह से प्राकृतिक खूबसूरती देखने को मिलती है। इसके अलावा सन बॉथ से लेकर अन्य जगहों पर भी आप इंजॉय कर सकते है।

मनाली
आप चाहें तो दिसम्बर में मनाली भी जा सकते हैं। यहां पहाड़ों के बीच रहकर पुराने साल को अलविदा कर नए साल का स्वागत कर सकते हैं। यहां आप अपने पूरे परिवार के साथ भी जा सकते हैं। यहां न्यू ईयर सेलिब्रेट कर आप अपने न्यू ईयर को यादगार बना सकते हैं। दिसम्बर के महीने में यहां बर्फबारी का भी आनंद उठाने का अपना एक अलग ही मजा है। बता दें कि यहां पर कई ऐसे होटल हैं जो न्यू ईयर पार्टी आयोजित करते हैं, जहां आप रुककर पार्टी एन्जॉय कर सकते हैं।

हरला जोड़ी मंदिर, मैं स्वच्छता अभियान के अंतर्गत सैल्यूट तिरंगा के सदस्यों के द्वारा साफ सफाई की गई

हरला जोड़ी मंदिर, मैं स्वच्छता अभियान के अंतर्गत सैल्यूट तिरंगा के सदस्यों के द्वारा साफ सफाई की गई

देवघर/शेखर सुमन। आज रविवार को सैल्यूट तिरंगा, के बैनर तले देवघर जिला अध्यक्ष हेमंत झा, की अध्यक्षता में हरला जोड़ी मंदिर, मैं स्वच्छता अभियान के अंतर्गत सैल्यूट तिरंगा के सदस्यों के द्वारा साफ सफाई की गई सेल्यूट तिरंगा के जिला अध्यक्ष हेमंत झा ने कहा देवघर के हर मंदिर की साफ सफाई सैल्यूट तिरंगा के सदस्यों के द्वारा की जाएगी एवं सैल्यूट तिरंगा के बैनर तले शहर के चौक चौराहे पर कोरोना महामारी को देखते हुए मास्क का भी वितरण किया जाएगा।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सैल्यूट तिरंगा प्रदेश के महामंत्री सचिन सुल्तानिया, प्रदेश महामंत्री विजया सिंह, अलका सोनी, मल्लिका झा, सुमन देवी, माया केसरी, उत्तम कुमार साह, विकास कुमार एवं सैल्यूट तिरंगा के कई कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी गण मौजूद थे।

अडवेंचर ट्रिप का लेना है मजा तो बनाइए तत्तापानी का प्लान

अडवेंचर ट्रिप का लेना है मजा तो बनाइए तत्तापानी का प्लान

नई दिल्ली : अडवेंचर ट्रिप को पसंद करने वालों के लिए हिमाचल प्रदेश का तत्तापानी बेस्ट प्लेस है। शिमला से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तत्तापानी जाकर अडवेंचर के साथ जीने की इच्छा को पूरा कर सकते हैं। यहां सतलुज नदी की ठंडी धारा के बीच गर्म पानी का सोता बहता रहता है। इसलिए भी लोग इसको तत्तापानी के नाम से जानते हैं, क्योंकि तत्तापानी का मतलब गर्म पानी होता है।
ऐसा कहा जाता है कि कुछ साल पहले तक यहां के लोकल लोगों के अलावा इस जगह के बारे में कोई नहीं जानता है। बता दें कि तत्तापानी की ट्रिप बजट में होने वाली अडवेंचर ट्रिप है। यहां काफी संख्या में सैलानी आते हैं। वैसे तत्तापानी का दौरा कभी भी किया जा सकता है लेकिन खास कर सर्दियों के मौसम में जब पतझड़ का समय होता है, तब यहां जाने का मजा ही कुछ और है।
अडवेंचर ड्राइव
शिमला से तत्तापानी के बीच लगभग 50 किलोमीटर की दूरी में अडवेंचर ड्राइव का पूरा मजा लिया जा सकता है। इस पूरे रास्ते में यात्रा का दौरान पहाड़ों के आकर्षक नजारे देखने को मिलते हैं कि मन खुश हो जाता है। इसके अलावा रास्ते में धार्मिक स्थल भी पड़ते हैं। यहां देश भर से बाइकर ग्रुप्स ड्राइव के लिए आते हैं। इसके साथ ही लोग सतलुज नदी के किनारे साइकलिंग का मजा भी लेते हैं।

ट्रेकिंग का मजा
अगर ट्रेकिंग का शौक रखते हैं तो आपके लिए जगह बिल्कुल पर्फेक्ट है। देवदार के जंगलों के बीच ट्रेकिंग करने का अलग ही मजा आता है। ट्रेकिंग करने के दौरान रास्ते में कई वाटरफॉल मिलते हैं, जिन्हें देखकर मन मुग्ध हो जाता है। तत्तापानी में ट्रेकिंग का काफी चर्चित स्पोर्ट एक्टीविटी है।
रिवर राफ्टिंग का रोमांच
तत्तापानी में देश भर के लोग रिवर राफ्टिंग करने के लिए आते हैं। सतलुज नदी में लोटी से शुरू होकर चाबा तक के ट्रैक रिवर राफ्टिंग होती है। यहां नीले रंग के चमचमाते पानी में राफ्टिंग करने का अलग ही रोमांच है। इसके अलावा तत्तापानी में वोटिंग करने का आनंद भी ले सकते हैं।

थेक्कडी में मिलता है जंगली जानवरों के बीच झील में नाव सफारी करने का मौका

थेक्कडी में मिलता है जंगली जानवरों के बीच झील में नाव सफारी करने का मौका

भारत के केरल राज्य में एक अद्भुत जगह है जहां चारों ओर तो घना जंगल है, जंगल के बीचों-बीच एक शांत झील… जहां जंगल के जंगली और खतरनाक जानवर पानी पीने आते हैं, कई बार हाथियों का झुंड झील में नहाने निकलता है। ये पूरा दृश्य आपको केरल के थेक्कडी में देखने को मिलेगा।
आपने अकसर वाइल्डलाइफ फिल्मों में देखा होगा कि लोग किसी नदी के अंदर से अपनी नाव लेकर गुजर रहे होते हैं और नदी के किनारे जंगली जानवर पानी पीने आये हुए होते हैं… इस नजारे को देखकर वाइल्डलाइफ को पसंद करने वाले लोग जरूर ये सोचते होंगे की ये कौन सी जगह है? क्या ये शूटिंग भारत में हुई है या विदेश में… तो हम आपको बताना चाहते हैं कि भारत में कुछ ऐसी जगह है जहां की खूबसूरती को कैमरे में कैद करने के लिए लोग विदेशों से आते हैं।
भारत के केरल राज्य में एक अद्भुत जगह है जहां चारों ओर तो घना जंगल है, जंगल के बीचों-बीच एक शांत झील… जहां जंगल के जंगली और खतरनाक जानवर पानी पीने आते हैं, कई बार हाथियों का झुंड झील में नहाने निकलता है। ये पूरा दृश्य आपको केरल के थेक्कडी में देखने को मिलेगा।

केरल के सफर पर अगर आप आये हैं तो केरल के थेक्कडी को देखना बिलकुल न भूले, जंगल के बीच में बने रिजॉर्ट में रुके और सुबह नाव सफारी करें साथ ही प्रकृति की खूबसूरती को नजदीक से महसूस करें… यकीन मानिए आप इस एहसास को कभी नहीं भूल पाएंगे।
थेक्कडी में बसा पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य केरल का प्रसिद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य है। इस वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को देखने के लिए भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर से लोग आते हैं। हाथियों के लिए मशहूर ये सेंचुरी 777 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है। 777 वर्ग में से 360 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा घने जंगलों से ढका हुआ है तो कुछ हिस्से में पानी है। मानसिक तनाव, मेट्रो सिटी की जिंदगी से बिलकुल हटकर प्रकृति से प्यार करने वालों को ये जगह अपनी ओर आकर्षित करती हैं। सन् 1978 में पेरियार को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
कोची एयरपोर्ट से थेक्कडी की दूरी लगभग 145 किलोमीटर की दूरी है। अगर आप केरल के सफर पर हैं तो और मुनार में दो दिन ठहरने के बाद थेक्कडी आ सकते हैं। यहां आप अगर अक्टूबर से जून के बीच आते हैं तो काफी मजेदार सफर होता है। जंगल में नाव की सफारी करने के लिए आपको निर्देशों का पालन करना जरूरी होता है। नाव सफारी की टिकट लेते समय निर्देशों को अच्छे से बता दिया जाता है, क्योंकि ये टाइगर रिसर्व जंगल है छोटी सी गलती भी कभी-कभी भारी पड़ सकती हैं।
राज्य – केरल
जगह- थेक्कडी (पेरियार वन्यजीव अभ्यारण्य)
एयरपोर्ट- कोचीन एयरपोर्ट
सीजन- अक्टूबर से जून

श्रावण मास की शिवरात्रि व्रत से होती हैं सभी मनोकामनाएं पूरी

श्रावण मास की शिवरात्रि व्रत से होती हैं सभी मनोकामनाएं पूरी

हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि आती है लेकिन हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार सावन की शिवरात्रि विशेष महत्व है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हर साल अगस्‍त-सितंबर के महीने में सावन की शिवरात्रि मनाई जाती है। सावन महीने में आने वाली शिवरात्रि का खास महत्व है, इस दिन भक्त गण शिवालयों में शिव को जल अर्पित कर उन्हें प्रसन्न कर वरदान मांगते हैं तो आइए हम आपको सावन की शिवरात्रि के बारे में कुछ जानकारी देते हैं।
हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि आती है लेकिन हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार सावन की शिवरात्रि विशेष महत्व है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार हर साल अगस्‍त-सितंबर के महीने में सावन की शिवरात्रि मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि फाल्‍गुन महीने में आने वाली महाशिवरात्रि के समान ही सावन शिवरात्रि भी फलदायी है। हिन्दू धर्म में माना जाता है कि भगवान शिव का दिन सोमवार है और सावन उनकी पूजा के लिए अच्छा महीना माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी और अपने शिवगणों सहित पूरे महीने धरती पर रहते हैं। इसी कारण सावन की शिवरात्रि के दिन भगवान शंकर की खास पूजा की जाती है।
वैसे तो वर्ष भर में शिवरात्रि 12 से 13 बार आती है। यह तिथि पूर्णिमा से एक दिन पहले त्रयोदशी को आती है। इसमें दो शिवरात्रि विशेष है उनमें सावन तथा फाल्गुन शामिल हैं। इस शिवरात्रि को अन्य नामों से बुलाया जाता है जैसे कांवर यात्रा, त्रयोदशी, शिवतरेश, भोला उपवास और महाशिवरात्रि। सावन की शिवरात्रि को खास इसलिए भी माना जाता है क्योंकि इस दिन कांवर यात्रा सम्पन्न होती है। इस दिन हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख और सुल्तनागंज जैसे पवित्र स्थलों से गंगा जल भर कर भक्त अपने आसपास के स्थानीय शिवालयों में चढ़ाते हैं। यही नहीं देश भर में स्थित बारह ज्योर्तिलिंगों में भी जल अर्पित किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन की शिवरात्रि के दिन जो भक्‍त शिव शंकर की पूजा करते हैं भगवान उनकी सभी कामनाएं पूरी करते हैं।
जानें पूजा की विधि

  1. सावन की शिवरात्रि को प्रातः उठकर स्नान से निवृत्त होकर साफ कपड़े धारण करें।
  2. मंदिर या शिवालय जाकर शिवलिंग के पास जाकर प्रार्थना करें और पंचामृत जो दूध, दही, 3. विशेष फल की प्राप्ति के लिए चने की दाल का इस्तेमाल करें।
  3. ऐसा माना जाता है कि सावन की शिवरात्रि पर भगवान शंकर को तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
  4. घर में समृद्धि के लिए धतूरे के फूल या फल का भोग लगा सकते हैं।
  5. अब ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए शिवलिंग पर बेल पत्र, फल-फूल चढ़ाएं।
    हिन्दू धर्म में ऐसा माना जाता है कि शिव जब जीव-जन्तुओं का संहार करते हैं, तो महाकाल बन जाते हैं, यही शिव महामृत्युंजय बनकर उन जीवों की रक्षा करते हैं तो शंकर बनकर जीव का भरण-पोषण भी करते हैं। यही योगियों के सूक्ष्मतत्व महारूद्र बनकर योगियों-साधकों जीवात्माओं के अंतस्थल में विराजते हैं और रूद्र बनकर महाविनाश लीला भी करते हैं। इन्ही महादेव की आराधना करने के लिए शिवरात्रि का पावन पर्व 30 जुलाई को मनाया जाता है।
    ऐसे करें अभिषेक
    शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले स्नान करें। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर मंदिर जाएं। मंदिर जाते समय जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, इत्र, चंदन, केसर, भांग सभी को एक ही बर्तन में साथ ले जाएं और शिवलिंग का अभिषेक करें।
    लगाएं शिव को भोग
    शिव को गेहूं से बनी चीजें अर्पित करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि ऐश्वर्य पाने के लिए शिव को मूंग का भोग लगाया जाना चाहिए। वहीं ये भी कहा जाता है कि मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए शिव को चने की दाल का भोग लगाया जाना चाहिए। शिव को तिल चढ़ाने की भी मान्यता है। कहा जाता है कि शिव को तिल चढ़ाने से पापों का नाश होता है।
पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है विजयवाड़ा का मां भवानी टापू

पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है विजयवाड़ा का मां भवानी टापू


आंध्र प्रदेश में बहने वाली भारत की विख्यात नदी कृष्णा और इसकी सहायक बुडमेरू नदी के बीच के क्षेत्र में विजयवाड़ा शहर कई किवदंतियों को अपने में समेटे हुए है। यह सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक चिंतन का केंद्र भी माना जाता है। यहां के लोग तेलुगू भाषा बोलते हैं।
यहां के दर्शनीय स्थलों की बात करें तो सबसे पहला नाम गांधी हिल का आता है। इस पहाड़ी के शिखर पर 15.8 ऊंचा गांधी स्तूप खड़ा है जो विजयवाड़ा का सबसे ऊंचा स्थल है। इसे 1968 में बनाया गया था। अन्य देखने योग्य स्थलों में गांधी मेमोरियल लाइब्रेरी, तारामंडल, टॉयट्रेन हैं जो गांधी पहाड़ी के किनारे−किनारे स्थित हैं। पहाड़ी के शिखर पर चढ़ कर पूरे विजयवाड़ा शहर को देखने का लुत्फ भी आप उठा सकते हैं।
भोगल राजपुरम गुफा भी देखने योग्य है। यहां तीन मनमोहक गुफाएं हैं जिनका संबंध 5वीं शताब्दी से है। एक गुफा को तो बहुत ही अच्छे ढंग से पुनर्जीवित किया गया है जहां नटराज, विनायक और अर्द्धनारीश्वर की मूर्तियां हैं। दूसरी गुफा उनडावल्ली है जो विजयवाड़ा से आठ किलोमीटर दूर है। यहां 7वीं शताब्दी में एक ही पत्थर पर खोद कर बनाई गई भगवान श्रीविष्णु की विशाल आकृति है। वह सोए हुए अवस्था में हैं।
मां भवानी टापू भी आप देखने जा सकते हैं। कृष्णा के उद्गम की ओर प्रकाशम बांध के पास भवानी टापू फैला हुआ है। यह मनोहारी टापू किसी भी पर्यटक का दिल जीत लेने में सक्षम है। प्रकाशम बांध की भी अलग ही बात है। कृष्णा नदी पर स्थित 1,223.5 मीटर लंबा यह बांध न केवल विजयवाड़ा बल्कि भारत का भी एक लैंडमार्क है। प्रकाशम बांध से तीन नहरें निकाली गई हैं जो विजयवाड़ा से होकर गुजरती हैं और उसे इटली के वेनिस शहर सा रूप प्रदान करती हैं।
अगर आपको आसमान में उड़ते, हवा में कलाबाजी करते और धरती की ओर गोते लगाते रंग−बिरंगे सुंदर पक्षियों को देखने का शौक है तो आपका यह शौक कोलेरू झील पर पूरा हो सकता है। कोलेरू झील विविध रंगों और जातियों के पक्षियों की आरामगाह है। इस झील का पानी भी मीठा है।
यदि आपको खरीददारी करनी है तो आप मछलीपट्टनम जा सकते हैं। आप यहां बहुत सी घरेलू चीजों की खरीददारी आराम से कर सकते हैं। यहां पर पास ही में मैंगीनपुडी बीच है जोकि पर्यटकों और गोताखोरों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
विजयवाड़ा जाएं तो अमरावती की सैर करना नहीं भूले। हैदराबाद से विजयवाड़ा 275 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां के निकटतम हवाई अड्डे हैदराबाद और विशाखापट्टनम हैं। हैदराबाद, चेन्नई, विशाखापट्टनम आदि से यहां के लिए यातायात की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं। स्थानीय परिवहन सेवाओं में टैक्सी, बस सेवाएं, आटोरिक्शा आदि की अच्छी सुविधा है।

वीकेंड पर जाने के लिए बेस्ट हैं यह जगहें

वीकेंड पर जाने के लिए बेस्ट हैं यह जगहें

काम से ब्रेक लेकर 2-3 दिन की छुट्टियों में मूड फ्रेश करना चाहते हैं तो मुंबई के आसपास कई खूबसूरत जगहें हैं. काम के तनाव से रिलैक्स होने के लिए ये जगहें बेस्ट हैं, तो चलिए इस वीकेंड घूमने के लिए तैयार हो जाइए.
लोनावला
मुंबई से 96 किलोमीटर दूर यह हिलस्टेशन बेहद सुंदर है. यहां की चिक्की बहुत मशहूर है. वीकेंड के लिए यह बेस्ट पिकनिक स्पॉट है और यह खासतौर पर उन ‘पॉइंट्स’ के लिए जाना जाता है जो पिकनिक मनाने वालों को खूबसूरत पहाड़ियों और घाटियों के अद्भुत नज़ारें दिखाते हैं. राजमाची पॉइंट कई लोगों का फेवरेट डेस्टिनेशन है। इसके अलावा टाइगर्स पॉइंट जिसे टाइगर्स लीप भी कहा जाता है, मशहूर दर्शनीय स्थल है. मॉनसून में लोनावला और भी खूबसूरत लगता है.
माथेरान
माथेरान, मुंबई के पास स्थित सबसे पुराने हिल स्टेशनों और पसंदीदा टूरिस्ट प्लेस में से एक है। यहां का दृश्य वैसे तो बारिश के मौसम में सुहाना लगता है, लेकिन वीकेंड पर आप कभी भी यहां पिकनिक मनाने जा सकते हैं. नेरल-माथेरान टॉय ट्रेन की सवारी का यहां अलग ही मज़ा है.
अलीबाग
बीचों के लिए मशहूर अलीबाग आप फेरी से जा सकते हैं. यह बहुत मशहूर टूरिस्ट स्पॉट हैं और यहां वीकेंड पर लोगों की खूब भीड़ रहती है. यहां पहुंचने के लिए आप गेटवे ऑफ इंडिया के बीच से फेरी ले सकते हैं और समुद्र की सैर का मज़ा लेते हुए अलीबाग पहुंच सकते हैं. यदि आप लॉन्ग ड्राइव करना चाहते हैं तो भी सड़के अच्छी है.
पंचगनी
पंचगनी मुंबई और पुणे के लोगों के लिए बेहतरीन पिकनिक स्पॉट बन चुका है. यह मुंबई से 285 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और अपने सुहाने मौसम के लिए मशहूर है. यहां आने पर सिडनी पॉइंट ज़रूर जाएं, यहां से आप धोम डैम; द डेविल्स किचन का नज़ारा देख सकते हैं. पुरानी कथाओं के अनुसार यह वही स्थान है जहां पांडवों ने कुछ पल बिताए थे. साथ ही पारसी पॉइंट भी देखें, जो आपको कृष्णा घाटी का एक शानदार नज़ारा दिखाता है.
कर्नाला पक्षी अभयारण्य
मुंबई-गोवा हाइवे पर स्थित कर्नाला पक्षी अभयारण्य मुंबईकरों के लिए एक सुंदर और सुकूनभरा वीकेंड डेस्टीनेशन है। खूबसूरत सह्याद्रि पर्वतमाला पर स्थित, यह 4.8 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ घना जंगल है. आप यहां 150 से अधिक प्रकार के पक्षियों की प्रजातियों और लगभग 37 प्रकार के एवियन प्रवासियों को देख सकते हैं. आकर्षक पिकनिक स्पॉट होने के साथ ही यह जगह मुंबई के पास ट्रैकिंग के लिए दिलचस्प है.

error: Content is protected !!