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Sawan 2023 Date: इस बार दो महीने का होगा सावन, वर्षों बाद बना है बेहद शुभ संयोग

Sawan 2023 Date: इस बार दो महीने का होगा सावन, वर्षों बाद बना है बेहद शुभ संयोग

 

 

सावन का महीना महादेव को समर्पित है। इस पवित्र महीने में भगवान शिव की उपासना की जाती है। कहा जाता है कि सावन के महीने में हर एक सोमवार को भगवान शिव की उपासना करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है। साथ ही व्यक्ति की मनोकामना भी पूरी होती है। कहा जाता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। श्रावण मास की शुरुआत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस बार सावन का महीना करीब 2 महीने का रहने वाला है। आइए जानते हैं कब से शुरू होगा सावन का महीना। इस बार सावन में 8 सोमवार पड़ने वाले हैं। यानी इस बार सावन का महीना 2 महीने का रहने वाला है। आइए जानते हैं सावन कब से शुरू हो रहा है और शुभ संयोग।

 

 

 

कब से शुरू हो रहा है सावन 2023?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन का महीना करीब 2 महीने का होने वाला है। सावन मास की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से होगी और 31 अगस्त 2023 तक रहेगा। यानी इस बार भक्तों को भगवान शिव की उपासना के लिए कुल 58 दिन मिलने वाले हैं। कहा जाता है कि यह शुभ संयोग 19 साल बाद बना है।

 

दरअसल, इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक सावन अधिकमास रहने वाला है। यानी इस बार 18 जुलाई से 16 अगस्त तक मलमास रहेगा। यानी इस बार सावन में भगवान शिव के साथ साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होगी।

 

 

बता दें कि वैदिन पंचांग की गणना सौर मास और चंद्रमास के आधार पर की जाती है। चंद्रमास 354 दिनों का होता है। और सौर मास 365 दिन का। ऐसे में 11 दिन का अंतर आता है और 3 साल के अंदर यह अंतर 33 दिन का हो जाता है। जिसे अधिकमास कहा जाता है। इस बार सावन एक की बजाय दो महीना का होने वाला है। यानी इस बार भोलेनाथ के भक्तों को उनकी उपासना करने के लिए 8 सोमवार मिलेंगे।

 

सावन सोमवार का महत्व

कहा जाता है कि जो व्यक्ति सावन के सोमवार का व्रत करता है उसके वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है साथ ही जीवन में सुख समृद्धि की कमी भी नहीं रहती है। सावन के महीने में भगवान शिव पर धतूरा, बेलपत्र चावल चंदन, शहद आदि जरूर चढ़ाना चाहिए। सावन के महीने में की गई पूजा से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा सावन के सोमवार का व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। साथ ही आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

वट सावित्री पूजा कि तैयारी, महिला सुखमय जीवन, अखंड सुहाग के लिए, करेंगी पूजा

वट सावित्री पूजा कि तैयारी, महिला सुखमय जीवन, अखंड सुहाग के लिए, करेंगी पूजा

Bhagalpur : हिंदू धर्म से संबंधित महिलाएं अपने पति के अखंड सुहाग, सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन, पति की लंबी आयु की कामना सहित अनेक व्रतों का पालन और आयोजन करती है। उसी क्रम में वट सावित्री का व्रत भी महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला बताया जाता है। मूल रूप से यह सत्यवान सावित्री कथा पर आधारित है। जिस प्रकार सावित्री ने अपने तप के बल पर अपने पति सत्यवान को यमराज के मुंह से छीन करके लाई उसी प्रकार भारतीय महिला भी ऐसा कर सकती है। यह बात बद्री विशाल शास्त्र उर्फ पप्पू बाबा ने बताया।

 

 

उन्होंने यह भी कहा कि इस व्रत के साथ सावित्री सत्यवान कथा जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि बट के वृक्ष में माता लक्ष्मी का वास रहता है। अतः बरगद के वृक्ष की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होती है। मान्यता यह भी है कि मार्कंडेय ऋषि को भगवान कृष्ण बरगद के पत्ते पर ही दर्शन दिया थे,बरगद का विश्व पर्यावरण संरक्षण में योगदान माना जाता है। उसे उत्सर्जन का केंद्र माना जाता है। एक जानकारी के अनुसार आम के पेड़ के अपेक्षा बरगद का पेड़ 20 घंटे तक ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है।

 

इसीलिए सुहागिन महिलाएं बट सावित्री व्रत के दिन पूजा करती है। भगवान को भी बरगद के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। धार्मिक लोक कल्याण की कामना के लिए, अखंड सौभाग्य की रक्षा के लिए पूजन करेगी । वट सावित्री के पूजन के लिए महिलाएं अभी सही तैयारी में लगी हुई है।

Happy Baisakhi 2023 Wishes: बैसाखी के पावन पर्व पर दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजें ये शुभकामना संदेश

Happy Baisakhi 2023 Wishes: बैसाखी के पावन पर्व पर दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजें ये शुभकामना संदेश

 

Happy Baisakhi 2023 Wishes: 14 अप्रैल 2023 को बैसाखी का पर्व है। हर साल यह त्योहार बहुत ही धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व से कई मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। सिख धर्म के लोग इस दिन को नव वर्ष के रूप में मनाते हैं। बैसाखी का पर्व खासतौर पर पंजाब और हरियाणा में धूमधाम से मनाया जाता है। इसे खुशहाली और समृद्धि का भी पर्व माना जाता है। इस दिन लोग नए-नए कपड़े पहनते हैं और गुरूद्वारे में जाकर पूजा करते हैं। कई जगहों पर इस दिन लंगर का आयोजन भी किया जाता है। साथ ही बैसाखी के पावन अवसर पर लोग अपने करीबियों को शुभकामनाएं भी देते हैं। ऐसे में आज हम आपके लिए बैसाखी की शुभकामना संदेश लेकर आए हैं। यहां से आप डाउनलोड करके व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए एक दूसरे को हैप्पी बैसाखी विश करते हैं।

दिवाली: बनी रहे आप की मुस्कान दीवाली मनाइए, लेकिन साथ ही कुछ एहतियात भी बरतें

दिवाली: बनी रहे आप की मुस्कान दीवाली मनाइए, लेकिन साथ ही कुछ एहतियात भी बरतें

दिवाली: बनी रहे आप की मुस्कान
दीवाली मनाइए, लेकिन साथ ही कुछ एहतियात भी बरतें
उमेश कुमार सिंह
दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। दिवाली का त्योहार प्रकाश और उजाले का प्रतीक माना जाता है। इसे बड़ी ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिवाली वैसे पांच दिनों का त्योहार माना जाता है। इस दिन घरों में दिवाली की परंपरा के अनुसार हम सभी लोग घर के हर कोने में चारों ओर दीपक और मोमबत्तियां जलाते हैं। सभी दोस्तों और रिश्तेदारों को मुबारकबाद देते हैं। धनतेरस, दीपावली, भैया दूज। जाहिर है दिवाली साल का सबसे बढ़ा त्यौहार है तो इसकी तैयारियां भी जोर शोर से ही होती है, भले ही वो पटाखे हो, मिठाइयाँ हो या फिर नए कपड़ो की खरीदारी। दिवाली पर हर कोई अपनों के चेहरों पर खुशी देखना चाहता है और हर वर्ष अपनों के साथ शुभ और सुरक्षित दिवाली मानाने की कामना करता है, परन्तु क्या इतना ही काफी है ? इस दिवाली आप अपना और अपने प्रियजनों की सेहत को ख्याल रखते हुई, छोटी छोटी सावधानी बरतकर इस दीवाली का दोगुना मजा उठा सकते हैं। दिवाली के दिन बड़े हो या छोटे हर कोई खुल कर एंजॉय करना चाहता है, लेकिन छोटे बच्चों को अपनी निगरानी में ही पटाखे जलाने दें। उन्हें ज्यादा धमाके व लाइटिंग वाले बम बिल्कुल न दें, क्योंकि इनसे जलने का डर रहता है। अगर आपके बच्चे की उम्र 7 साल से कम है, तो आप खुद उसका हाथ पकड़ कर फुलझड़ी जला सकते हैं। हर साल दिवाली मनाते हुए हजारो लोग जलने, आंखों की रोशनी जाने या फिर कानों के पर्दे फटने की समस्या का शिकार होते है। अगर डॉक्टर की माने तो दिवाली से जुडी दुर्घटनाओ में लगभग 85 प्रतिशत, 15 साल से कम उम्र के बच्चे और महिलायें होती है। आप दीवाली बेशक मनाइए, लेकिन साथ ही कुछ एहतियात भी बरतें। ताकि बम पटाखे जलाते वक्त आप किसी दुर्घटना के शिकार न हों। वैसे भी दीवाली पर किसी भी तरह की दुर्घटना हो सकती है। ऐसे में एतिहातन तौर पर आप फर्स्ट एड बॉक्स घर में जरूर तैयार रखें।
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दिवाली से पहले बेहतर है कि आप पहले से तैयार रहें ताकि एन मौके पर आपको परेशानियों का सामना न करना पड़े। किट में ये सामान जरूर होना चाहिए सिल्वर सल्फाडाइजीन क्रीम, डिटॉल या सेवलॉन, जाली वाली पट्टी, पेन किलर, कॉटन, बैंडेज, एंटिसेप्टिक क्रीम, एंटिसेप्टिक साबुन, कुछ एंटिबायोटिक दवा, कैंची (सीजर), प्लास्टिक ट्विजर्स (प्लास्टिक का पतला-सा चिमटा) अगर घर पर किसी सदस्य को अस्थमा की शिकायत है तो इन्हेलेर्स किट मे अवश्य रखे आदि। प्राथमिक चिकित्सा के बाद जरुरी है डॉक्टर को दिखाया जाये। जले का घर पर खुद इलाज करने में खतरा यह है कि आप तय नहीं कर सकते कि कितने फीसदी जला है। चोट लग जाए तो बच्चे को डांटें नहीं, क्यूंकि ऐसा करने से बच्चा घबरा जायेगा। बच्चे को प्यार से पुचकारें और उसका साहस बढ़ाने का काम करें। सबसे पहले बच्चे की चोट को देखें और जरूरत के अनुसार उसका प्राथमिक इलाज करें। अगर जलने की चोट सामान्य है तो उस हिस्से को तब तक बहते हुए नल के पानी में रखें, जब तक जलन पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाए। फिर उस पर सिल्वरेक्स या बरनोल का लेप लगाएं। इसके बाद मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सक को दिखाएं। चिकित्सक की सलाह के मुताबिक दवाओं का सेवन करें। डॉक्टर को अवश्य दिखाना चाहिए।
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तेज पटाखे की आवाज कान के परदे और आंतो को फाड़ सकती है। वहीं कई मामलों में कान की नसें फटने के मामले भी सामने आयी है, जिससे सुनने की क्षमता जा सकती है। इसलिए अगर पटाखे तेज आवाज वाले हैं तो कान बंद कर लेना चाहिए। दीपावली में पटाखों के धुएं से प्रदूषण बढ़ जाता है और इससे टॉक्सिन भी अत्यधिक बढ़ जाते हैं। इन टॉक्सिनों की वजह से आंखों पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। आंखों में जलन और उससे पानी आने की समस्याओं में भी बढ़ोतरी होती है। इसलिए आंखों का खास ध्यान रखें। बाहर से आने के बाद अपनी आंखों को साफ पानी से अच्छी तरह छींटे मारकर धो लें। अगर आंख में पटाखों से या किसी अन्य तरह से जख्म आ जाए तो खुद साफ या ठीक करने की बजाए तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। नेत्र विशेषज्ञ का कहना है कि किसी भी आंख की चोट को मामूली न समझें क्यों कि छोटी सी चोट भी हमेशा के लिए आंखों की दृष्टि को हानि पहुंचा सकती है। ये छोटी-छोटी बातें और जानकारी आंखों के इलाज में मदद करती हैं, जिससे पीडित जल्दी ही ठीक हो सकता है। ये याद रखिए कि आंखें भगवान का अमूल्य उपहार हैं और उनका ख्याल रखना हमारा परम कर्तव्य है। आंख संबंधी किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए डाक्टर से तुरंत संपर्क करें।
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अस्थमा रोगी भी रहें सावधान दिवाली अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए मुसीबत भरा साबित हो सकता है। घर की साफ-सफाई से धूल और गंदगी, पटाखों और दीए का धुआं प्रदूषण और साथ में ठंड बढ़ने से अस्थमा पीड़ितों को मुसीबतों का सामना करना पढ़ सकता है और अटैक की आशंका भी अधिक हो जाती है। इसीलिए जरुरी है की अस्थमा रोगी फ्लू वक्सीनेशन लगवा ले और इनहेलर आसपास ही रखे। आप अपने प्रियेजनो की मुस्कराहट बनाये रखने के कुछ आसान बातो का ध्यान रखते हुए दुर्घटना होने से रोक सकते हैं। पटाखे छोड़ने से पहले खुली जगह तलाश लें। पटाखे हमेशा अच्छे ब्रैंड के ही खरीदें। कुछ लोग घर पर अनार और अन्य पटाखे बनाकर मार्किट में बेचते हैं। जिसमे बारुद्ध में कम कागज लपेटा होता है, ऐसे पटाखे अक्सर दुर्घटना का कारण बनते हैं। वही पटाखे खरीदें, जो बच्चों की उम्र के अनुकूल हों। पटाखे छुड़ाते समय बच्चों के साथ रहें और उन्हें पटाखे चलाने का सुरक्षित तरीका बताएं। पटाखे जलाने के लिए मोमबत्ती या लंबी लकड़ी, अगरबत्ती का इस्तेमाल करें। माचिस से आग लगाना खतरनाक हो सकता है। हवा वाले पटाखे जैसे रॉकिट वगैरह छोड़ते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसकी दिशा सही हो। दीवाली की रात को घर की सभी खिड़कियां बंद कर दें, वरना खिड़की से अंदर आकर कोई पटाखा घर में आग लगा सकता है।
कटिहार: सात दिवसीय भागवत कथा को लेकर डूमर में भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई

कटिहार: सात दिवसीय भागवत कथा को लेकर डूमर में भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई

कटिहार: सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा मंदिर डूमर परिसर में सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ को लेकर सोमवार को भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने डुमर दुर्गा मंदिर परिसर से शोभायात्रा में भाग लिया। इसमें क्षेत्र की लगभग 1001 कुंवारी कन्याओं ने भाग लिया।

 

कलश शोभायात्रा बरंडी नदी से नये कलश में जल भरकर पूरे डूमर गांव का भ्रमण किया गया, वही कलश यात्रा की अगुवाई दुर्गा पूजा समिति के कार्यकर्ता कर रहे थे। कलश में जल भरकर श्रद्धालुओं का जत्था डूमर गांव होते हुए मंदिर परिसर पहुंची। हर साल यहां दुर्गा पूजा के मौके पर नौ दिवसीय महा रासलीला का आयोजन होता है। दूर-दूर से यहां लोग रासलीला सुनने और देखने को पहुंचते हैं। हर वर्ष साप्ताहिक कथा का आयोजन किया जाता है।

 

कथा का आयोजन 27 सितम्बर से हर दिन सन्ध्या 6 बजे से होगी, कथा का समापन 4 अक्टूबर को होगा। 5 एवं 6 अक्टूबर को भक्तिमय जागरण एवं झांकी का आयोजन किया जायेगा। इस भव्य आयोजन को लेकर गांव में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। इस मौके पर दुर्गा पूजा समिति अध्यक्ष सह पूर्व मुखिया विनोद कुमार चौधरी, उपाध्यक्ष दिनेश मंडल, राजकुमार आजाद, भैरव शर्मा, अखिलेश साह, समाज सेवी, मो. सिराजुल, सुबोध मंडल, मंगल मंडल, राज कुमार पोद्दार, कृष्ण कुमार मंडल, अवधेश जायसवाल, रवि कुमार मिश्र एवं अन्य ग्रामीणों का सहयोग रहा।

कटिहार: दुर्गा पूजा को लेकर शान्ति समिति की बैठक की गई, बलि वाले स्थान पर पुलिस की रहेगी पैनी नजर

कटिहार: दुर्गा पूजा को लेकर शान्ति समिति की बैठक की गई, बलि वाले स्थान पर पुलिस की रहेगी पैनी नजर

कटिहार

दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने को लेकर पोठिया ओपी परिसर में शांति समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता ओपी अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने किया। बैठक में समेली बीडीओ सुनील कुमार, फलका के राजस्व अधिकारी आरिफ हुसैन ने पूजा समिति से जुड़े लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने वाले पूजा समिति से जुड़े लोगों को लाइसेंस लेना अनिवार्य है। वैष्णवी दुर्गा मंदिर डूमर, श्री श्री 108 सार्वजनिक दुर्गा मंदिर छोहार, श्री श्री 108 दुर्गा मंदिर पोठिया, दुर्गा मंदिर भंगहा गांव में प्रतिमा स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है। इनमें से छोहार एवं पोठिया में बलि प्रथा भी है, ऐसी जगह पर पुलिस की पैनी नजर भी रहेगी। शांति समिति की बैठक में पदाधिकारियों ने पूजा समिति से जुड़े 10 लोगों का नाम मोबाइल नंबर के साथ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। शांति समिति की बैठक में विशेष रूप से पूजा पंडाल, विसर्जन स्थान एवं मार्ग को चिन्हित कर थाना को दो दिनों के अंदर सूचित करने के लिए कहा गया है। पूजा पंडाल मेला परिसर आदि का वीडियोग्राफी भी कराने का निर्देश दिया गया है। प्रतिमा का विसर्जन सरकारी गाइडलाइन के अनुरूप विजयादशमी की रात पांच अक्टूबर बुधवार को कर देने के लिए कहा गया। बैठक में अंचलाधिकारी गुलाम शाहिद, जिला परिषद परिषद प्रतिनिधि रौशन कुमार मंडल, सुनील कुमार शर्मा, उमा नाथ पटेल, संतोष कुमार पप्पू, पोठिया दुर्गा पूजा कमिटी कोषाध्यक्ष दुःख हरण पंडित, विमल कुमार राय, होनी यादव, दीपक मंडल, मधुकर कुमार, धीरेंद्र यादव, मिथुन यादव, अन्य मेला कमिटी के सदस्य एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

धनतरेस की खरीदारी का शुभ मुहूर्त, जाने क्या खरीदें और क्या नहीं

धनतरेस की खरीदारी का शुभ मुहूर्त, जाने क्या खरीदें और क्या नहीं

हिंदू धर्म में कार्तिक माह को बहुत पवित्र महीना माना जाता है.

इस माह में पूजा-पाठ का करने का विधान है साथ ही इस महीने सालभर के कई बड़े त्योहार पड़ते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का त्योहार होता है. इस साल 2 नवंबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान सोने का घड़ा लेकर प्रकट हुए थे. धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतिर के अलावा भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन माता लक्ष्मी-गणेश जी के साथ कुबेर भगवान की मूर्ति की खरीदी जाती है.

धनतेरस के दिन लोग सोने-चांदी से बनी चीजों को भी खरीदते हैं और इसके साथ ही

इस खास दिन नए बर्तन और खील-बताशे खरीदने का भी विधान है.

धनतेरस 2021 तिथि और शुभ मुहूर्त धनतेरस 2021- 02 नवंबर, मंगलवारधनतेरस मुहूर्त – शाम 06 बजकर 18 मिनट से लेकर रात के 08 बजकर 11 मिनट तक धनतेरस पर शुभ खरीदारी की अवधि :1 घंटे 52 मिनट तकप्रदोष काल :17:35 मिनट से 20:11 मिनट तकवृषभ काल :18:18 मिनट से 20:14: मिनट तक धनतेरस पूजा विधिि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है.

भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान सोने का कलश लेकर प्रकट हुए थे. ऐसे में दिवाली के दो दिन धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए. धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार, आंगन और घर के दक्षिण दिशा में दीपक जरूर जलाएं. धनतेरस के दिन यम के नाम से भी दीपक रखे जाते हैं. इस दिन पूजा करने से घर सुख-सुविधा और धन-धान्य से भरा हुआ रहता है.धनतेरस का महत्वधनतेरस पर लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं.

इस दिन विशेष रूप से लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा करते है. मान्यता है जो भी धनतेरस पर भगवान कुबेर, मां लक्ष्मी संग धन्वंतरि की पूजा करता है उसका घर हमेशा धन-धान्य, सुख-सुविधा और वैभव से भरा हुआ रहता है.

धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या नहीं धनतेरस के दिन खरीदारी का विशेष महत्व होता है. इस दिन सोना, चांदी, पीतल की चीजें और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है.

हालांकि धनतेरस पर काले रंग की वस्तुएं, कांच, एल्युमीनियम और लोहे से बनी चीजें बिल्कुल नहीं खरीदनी चाहिए

बुढैय पहाड़ नव्वान मेला के अवसर पर साथ ही कोविड संक्रमण को देखते हुए मेला के आयोजन पर रोक लगा दिया गया

बुढैय पहाड़ नव्वान मेला के अवसर पर साथ ही कोविड संक्रमण को देखते हुए मेला के आयोजन पर रोक लगा दिया गया

देवीपुर/ सवांददाता। देवघर अनुमंडल पदाधिकारी दिनेश कुमार यादव ,के निर्देश पर देवीपुर सीओ सुनील कुमार सिंह, थाना प्रभारी करूणा सिंह, प्रशिक्षु सुमन कुमार, एएसआई प्रवीण कुमार शमार्, प्रमोद सिंह, गिरिवर महतो, समेत दर्जनों से अधिक सुरक्षा बलों एवं पुलिस पदाधिकारीयों के साथ बुढैय पहाड़ नव्वान मेला के अवसर पर साथ ही कोविड संक्रमण को देखते हुए मेला के आयोजन पर रोक लगा दिया गया है। इसके लिए बुढैश्वरी मंदिर,तिलेश्वरी मंदिर, काशीडीह चौक तिलौना चौक बारवां पंचायत भवन के पास पयॉप्त संख्या में महिला और पुरुष सुरक्षा बल को तैनात कर दिया गया है। पहाड़ पर गुरुवार को एक दो दुकान लगाने के प्रयास को विफल कर दिया गया है ।

जानकारी हो कि देवघर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, ने कोविड संक्रमण को लेकर मधुपुर एसडीओ योगेन्द्र प्रसाद, देवघर एसडीओ दिनेश कुमार यादव, को पयॉप्त संख्या में सुरक्षा बलों के साथ चार दिसम्बर और पांच दिसम्बर को बुढैय पहाड़ पर आयोजित होने वाले मेले को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस गंभीरता को लेते हुए पुलिस प्रशासन के लिए चार दिसम्बर को आयोजित होने वाले आज के मेले का आयोजन पर रोक लगाने की बड़ी चुनौती होगी आज बुढेश्वरी मंदिर और तिलेश्वरी मंदिर में पाठा और काड़ा की बली देने की परंपरा है वहीं हर वर्ष पहाड़ मेला में चार लाख से अधिक भीड़ लगता था इस मेले से बड़े छोटे दुकानदारों को अच्छी रोजगार का इनकम होता था, कोरोना महामारी को लेकर सभी दुकानदारों चेहरे पर मावशी छाए हुए हैं। इस मौके पर डीटीओ फिलवियुष बारला ने सत्संग व भीरखीबाद मुख्य सड़क मार्ग में सभी बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार देवघर के हरिलाजोरी का कुंड,काफी बदहाल

प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार देवघर के हरिलाजोरी का कुंड,काफी बदहाल

देवघर/संवाददाता। देवघर के हरिला जोरी का कुंड की स्थिति इन दिनों काफी बदहाल हो गई है। न ही यहां पर साफ-सफाई की व्यव्स्था है, ना ही इस कुंड का जीर्णोद्धार हुआ है, जिसके कारण यहां के लोगों को काफी परेशानी हो रही है.देवघर जिला का हरिला जोरी का कुंड काफी विख्यात है ,और इस कुंड की रावण और शिव से जुड़ी आस्था है. लेकिन अभी तक इस कुंड का ना ही जीर्णोद्धार हुआ है और ना ही इसकी साफ-सफाई हुई है, जिसके कारण श्रद्धालु मजबूरन गंदगी से भरे इस कुंड में नहाने को मजबूर हैं। लेकिन फिर भी जिला प्रशासन ने इसपर कोई कार्रवाई नहीं की है, जिसके कारण अब लोग इसके जीर्णोद्धार और साफ-सफाई पर सवाल उठा रहे हैं। मान्यता :मान्यताओं के मुताबिक रावण की ओर से शिवलिंग को लंका ले जाने के क्रम में हरिला जोरी में ही रुके थे, जहां चरवाहे के रूप में मौजूद भगवान विष्णु को शिवलिंग को रखने दिया था, जिसको हरि और हर के मिलन के रूप में माना गया है और रावण के उदर में भगवान बरुन समाये हुए थे और रावण लघुशंका के लिए चले गए। तभी भगवान विष्णु की ओर से शिवलिंग को यही स्थापित कर दिया गया था और बाबा बैद्यनाथ यहीं स्थापित होने के बाद रावण का पेट दर्द ठीक नहीं हो रहा था और रावण ने बाबा भोले से पेट दर्द का उपाय मांगा था, तभी बाबा भोले की ओर से हरिला जोरी स्थित कुंड में गोमुख होकर मिट्टी चखने और पानी पीने का उपाय बताया, जिसके बाद रावण की ओर से इस क्रिया को करते वक्त वरुण देवता बाहर निकले और रावण का पेट दर्द खत्म हुआ। उसी समय से आज तक यह परंपरा चली आ रही है, और प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दूसरे दिन आसपास सहित दूर दराज के लोग यहां पहुंच कर इस कुंड में स्नान करते हैं, जिससे चर्म रोग सहित कई बीमारियों का क्षय होता है और मनोकामना पूर्ण होने पर यहां पर स्थित त्रिशूल की पूजा अर्चना पूरी विधि-विधान के साथ की जाती है।

छठ पूजा के अवसर पर उदीयमान सूर्य को उपायुक्त ने दिया अर्घ्य

छठ पूजा के अवसर पर उदीयमान सूर्य को उपायुक्त ने दिया अर्घ्य

देवघर/सवांदददाता। विश्वास, त्याग, तपस्या और लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा शांतिपूर्ण व श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने उपायुक्त कार्यालय में कार्यरत अनुसेविका श्रीमती चंदा देवी के परिवार के साथ सुबह अर्घ्य में शामिल हुए। इस दौरान उपायुक्त ने हृदला कुंड तट पर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। अर्घ्य देने के पश्चात उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि सूर्य देव अपनी असीम ऊर्जा से सभी के जीवन को प्रकाशवान एवं ऊजार्वान बनाएं, यही कामना करता हूं। शनिवार की सुबह लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
छठ घाटों पर सुरक्षा व सुविधा के रहे व्यापक इंतजाम महापर्व छठ शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न हो,

इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा और सुविधा के इंतजाम किये गए थे। इसके अलावा सादे वर्दी में भी पुलिसकर्मी को घाटों पर तैनात किया गया था। अहले सुबह से जिला प्रशासन के अधिकारी, पुलिस पदाधिकारी पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य पर मुस्तैद दिखे।

साथ ही शिवगंगा सरोवर एवं नंदन पहाड़ तालाब में एनडीआरएफ के जवानों की टीम भी सुबह से अपने चिन्हित स्थल पर प्रतिनियुक्त दिखे। इससे पहले उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री द्वारा मुख्यमंत्री के निदेर्शानुसार कोविड नियमों के अनुपालन को लेकर विभिन्न छठ घाटों का निरीक्षण कर छठ पूजा समिति के सदस्यों व श्रद्धालुओं से नियमों के अनुपालन के साथ जिला प्रशासन के सहयोग की अपील की गई।
इस मौके पर उपरोक्त के अलावे परमेश्वर मुंडा, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी रोहित कुमार विद्यार्थी एवं संबंधित अधिकारी आदि उपस्थित थे।

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