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नगर निगम चुनाव 2020

प्रखंड सभागार में बीडीओ ने  बीएलओ  को लगाया फटकार

प्रखंड सभागार में बीडीओ ने बीएलओ को लगाया फटकार

 

खबरों की तह तक

देवघर। प्रखंड विकास पदाधिकारी देवघर जितेंद्र कुमार यादव ने देवघर प्रखंड अंतर्गत देवघर विधानसभा एवं मधुपुर विधानसभा के सभी बीएलओ के साथ बैठक कर मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम 2023 के अंतर्गत सभी बीएलओ को अपने बूथ पर जनसंख्या के अनुसार फॉर्म 6 कम से कम 50 की संख्या में भरने का दिया आदेश। उन्होंने बताया कि जिनका जन्म 1 अक्टूबर 2005 से पहले एवं 1 अक्टूबर 2023 तक जिनका उम्र 18 वर्ष हो रहा है ,वैसे छूटे हुए लोगों का नाम मतदाता सूची में हर हाल में जुड़ना चाहिए ।

 

 

 

 

अगर किसी बूथ पर एक भी मतदाता बिना नाम चढ़ाए हुए मिल जाता है ,चेकिंग एवं सुपर चेकिंग के दरमियान तो सभी बीएलओ के ऊपर एवं संबंधित बीएलओ सुपरवाइजर के ऊपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी बीएलओ से चुनाव आयोग द्वारा निर्गत शपथ पत्र भरवा कर लिया जाएगा ।जिसमें उन्हें बताना होगा कि उनके बूथ पर अब कोई भी मतदाता नहीं छूटा है ।जिनका उम्र 18 वर्ष से अधिक है ।

 

 

 

साथ ही बीएलओ सुपरवाइजर को भी लिखित देना होगा कि उनके अंतर्गत पड़ने वाले सभी बूथों पर अब कोई भी मतदाता नहीं छूटा है, जिनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है ।बीडीओ श्री यादव ने बताया कि सभी बीएलओ यह सुनिश्चित कर लें ,कि उन्हें बीएलओ रजिस्टर में सभी नाम को चढ़ाना है और उसे सुरक्षित रखना है। उसमें यह दिखाना है की मतदाता का क्या नाम है? किस गांव का है? और उनकी उम्र क्या है ?साथही form-7 भरने के लिए चेक सिलिप भी भरना सुनिश्चित करेंगे ।1 अक्टूबर 2023 तक जिनका भी 18 वर्ष पूरा हो जा रहा है, हर हाल में उनका नाम जोङना सुनिश्चित करें ।बैठक में मुख्य रूप से सभी बीएलओ सुपरवाइजर उपस्थित थे। जिसमें सुनील कुमार, गणेश लाल वर्णवाल ,शशांक शेखर ,सोनल, संगीता मिश्रा ,राजहंस पांडे, आशीष रंजन, लक्ष्मी नारायण रावत ,शशिकांत पाठक, विश्वजीत ,आलमगीर अंसारी के साथ-साथ सभी बीएलओ उपस्थित थे।

सिकंदर खान ने वार्ड नंबर 36 में किया मास्क वितरण और लोगों को कोरोना से बचने के उपाय भी बताएं

सिकंदर खान ने वार्ड नंबर 36 में किया मास्क वितरण और लोगों को कोरोना से बचने के उपाय भी बताएं


देवघर : समाजसेवी सिकंदर खान ने वार्ड नंबर 36 में भ्रमण कर लोगों को कोरोना के प्रति सजग किया। उन्होंने वार्ड नंबर 36 के सभी मोहल्ले में जाकर लोगों को बताया की कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है। इससे लड़ने की जरूरत है। बताया कि इससे कैसे बचा जा सकता है। जब कभी भी आप बाहर से घर आते हैं। तो सबसे पहले आप हाथ पांव धोए कपड़ा चेंज करें फिर आप घर में कोई काम करें। या आप किसी के नजदीक ना जाएं या किसी से बात ना करें। बात करें तो दूरी बनाए रखें।

समय-समय पर साबुन से हाथ अच्छी तरह धोते रहें। लोगों से कम से कम 1 मीटर की दूरी बनाए रखें। हमेशा मास्क पहने रखें। आपकी सावधानी ही आपका बचाव है। और साथ ही साथ मास्क भी उपलब्ध कराया। उन्होंने वार्ड नंबर 36 के बांदी, कुंडा, कुंडा मोड़, हथगढ़ लगभग एक दर्जन मोहल्ले में 1000 से अधिक लोगों को मासिक वितरण किया। इसे सफल बनाने में रिंकू गुप्ता, सूरज सिंदुरिया, इदरीश खान, आयशा बेगम, विजय बरनवाल, जफर अंसारी,सरफराज आदि ने सराहनीय भूमिका निभाई।

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शरीर का कण-कण और समय का क्षण-क्षण वार्ड के विकास को समर्पित : कैलाश चौधरी

शरीर का कण-कण और समय का क्षण-क्षण वार्ड के विकास को समर्पित : कैलाश चौधरी

देवघर : कहते हैं दुनिया की हर चीज ठोकर खाने से टूट जाती है, लेकिन एक कामयाबी ही है जो ठोकर खाकर ही मिलती है इसी वाक्य को अपने जीवन का मूलमंत्र मानता है बड़ा बाजार निवासी कैलाश चौधरी। और इसी मूलमंत्र के सहारे कैलाश आगामी देवघर नगर निगम चुनाव में वार्ड 20 से अपनी जीत सुनिश्चित करने की तैयारी में जुट गए हैं। 2015 के चुनाव की चर्चा करते हुए कैलाश कहते हैं गरीबों के लिए चुनाव लड़ना हिमालय को पिघला कर हटाने जैसा दुष्कर कार्य था। लेकिन क्षेत्र की जनता के द्वारा बार बार किये आग्रह को मैं ठुकरा नहीं पाया। और मैंने चुनाव लड़ने का मन बना लिया। लेकिन हालात ऐसी बनी की रोटेशन में वार्ड 20 महिला के लिए आरक्षित हो गया। मैं असमंजस में था क्या करूं और क्या न करूं। एक बार फिर वार्ड की जनता ने ही हौसला दिया और मैंने अपनी पत्नी चांदनी चौधरी को चुनाव मैदान में उतार दिया। और देखते ही देखते वार्ड 20 के इस चुनावी रण में चारों तरफ सिर्फ कैलाश की ही चर्चा हो रही थी। चुनाव की इस महाभारत में अभिमन्यु भी कैलाश थे तो अर्जुन की भूमिका में भी वही थे। बकौल कैलाश चुनाव को वे जंग नहीं त्यौहार के रूप में ले रहे थे। विरोधियों से भी उसने मित्रवत व्यवहार रखा। और देखते ही देखते अपने परिश्रम की महक से पूरे वार्ड को महका दिया। न सिर्फ कैलाश ही बल्कि उस क्षेत्र की जनता भी कैलाश की जीत के प्रति आश्वस्त थे। और इस आश्वस्त के पीछे कैलाश की सादगी, सही राजनीति, सोशल एक्टिविज्म, वाकपटुता, भाषण देने की कला में माहिर, भविष्य की योजनाओं का सही सही निर्धारण आदि खूबियों का समन्वय था। कहते हैं न कि काबिलियत इतनी बढ़ाओ कि तुम्हें हराने के लिए कोशिश नहीं साजिश करनी पड़े। और हुआ भी वैसा ही। इलेवन्थ आवार में चुनाव में धन-तंत्र ने अपना असर दिखा ही दिया। फलस्वरूप संघर्ष, चुनावी सकारात्मकता और साहस के धनी कैलाश ने लोकतंत्र में जनता के फैसले को अंतिम फैसला मान हार को सहर्ष स्वीकार किया।

कैलाश के द्वारा लाये इस चुनाव में 810 मतों ने यह दर्शा दिया कि भले ही वे चुनाव नैरो इस्केप से हार गये लेकिन जनता का दिल जीतने में वे कामयाब हो गये। कैलाश ने उम्मीद नहीं छोड़ी और न खुद को हार मानने की अनुमति दी। कैलाश जानता था कि बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा ही नहीं होती है क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ती है जितनी दूरी आगे की ओर तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। फिर क्या था कैलाश ने मंत्री बादल पत्रलेख की राह पर चलने का मन बनाया। एक साधारण आदमी से प्रसिद्ध आदमी बनना आसान नहीं है। इसके लिये न जाने कितनी कुर्बानियां देनी पड़ती है। इन्होंने अपने शरीर का कण-कण और समय का क्षण-क्षण 20 नम्बर वार्ड की जनता और वार्ड के विकास के लिये आहूत कर दिया है।और एक बार फिर कैलाश ने बेहतरीन कार्य कर जनता का दिल जीत लिया है। और आज कैलाश जहां तक पहुंचा है उसके यहां तक पहुंचने की यात्रा निश्चित ही किसी तिलिस्म से कम नहीं है। चुनावी रणभेरी बज चुकी है। तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए कैलाश ने न सिर्फ अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है बल्कि अपने द्वारा खुले आंखों से देखे सपने को संकल्पों में बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के इस सोच के साथ कि “मैं एक छोटा आदमी हूँ और मैं छोटे-छोटे लोगों के लिए बड़े-बड़े काम करना चाहता हूँ” के साथ जुट गया है।

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