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बांका के शिक्षक को प्रयागराज में मिला सम्मान 

Banka : बांका के शिक्षक प्रवीण कुमार प्रणव को दो दिवसीय राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में प्रयागराज में मिला सम्मान । प्रयागराज के संगम तट पर श्री आद्यशंकराचार्य धर्म संसद से सम्मान मिलने पर प्रवीण कुमार प्रणव ने भी अपनी पांचवीं पुस्तक जीवन चक्र स्वामी जी जगतगुरु शंकराचार्य जी को बांका की ओर से सादर सप्रेम सहृदय समर्पित करते हुए आशीर्वाद लिया।

 

बांका आने का निमंत्रण भी शुभ अवसर पर दे दिया। जिससे स्वामी जी ने स्वीकार किए । स्वामी जी बताए कि माता गंगा यमुना और सरस्वती जिसको बुलाती हैं वहीं इस शुभ घड़ी में यहां जप तप ध्यान स्नान दान पुण्य और जगत कल्याणकारी योजनाएं लेकर पहुंचते हैं।पर्यावरण के क्षेत्र में वर्षों से लगातार कार्य कर रहे प्रवीण कुमार प्रणव को यह सम्मान इसलिए दिया गया कि अधिक से अधिक परोपकारी काम अनवरत करते रहें। पुरस्कार मिलने पर प्रवीण कुमार प्रणव ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हरेक नागरिकों को सरकार के साथ संज्ञान लेने की जरूरत है।

 

मानव ही प्रदूषण नियंत्रण कर सकता है। पर्यावरण में हो रहे दुष्प्रभाव से हमारी धरती माता बीमार हो रही हैं और भूकंप के रूप में कांप रही है तथा दिन-प्रतिदिन प्रदूषण में वृद्धि से मानव सहित अन्य जीवधारियों में बीमारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। अधिकांश बीमारियों का मुख्य कारण असंतुलित पर्यावरण ही है। बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में समुद्री कोरल रीफ़ और जंगल घटती जा रही है।वर्तमान समय में हमारे पर्यावरण में प्राणवायु ऑक्सीजन गैस की मात्रा प्रदूषण के चलते घटती जा रही है। जिससे राजरोग डायबिटीज बीमारी बढ़ती जा रही है।

 

क्योंकि जिस अनुपात में लोग कार्बोहाइड्रेट्स वाले भोजन करते हैं, उस अनुपात में जब प्राणवायु ऑक्सीजन गैस सांस द्वारा नहीं ले पाते तथा साथ- ही -साथ पेंक्रियाज के बीटा कोशिका से इंसुलिन कम निकलने लगता है तो मुश्किलें बढ़ जाती है।हम अपने बीटा कोशिका के उपर हानिकारक चर्बी नहीं बनने दें।अन्यथा इंसुलिन निकलने में परेशानी होगी और डायबिटीज से ग्रसित हो जाएंगे। मैदानी क्षेत्रों में तैंतीस प्रतिशत वन अच्छादित क्षेत्र होना चाहिए और पहाड़ी क्षेत्र में साठ प्रतिशत से कम नहीं रहना चाहिए। धरती पर सभी जीवों को हरे पौधे वृक्षों के साथ समुद्र में मौजूद कोरल रीफ़ से प्राण वायु ऑक्सीजन गैस मिलती है। जिस रफ्तार से जीवधारियों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है उस हिसाब से प्राणवायु ऑक्सीजन गैस पूर्ति हेतु ध्यान देने की जरूरत है।

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