Your SEO optimized title

अमित शाह द्वारा पेश किया गया ऐसा बिल जो 70 सालों से विस्थापित कश्मीरियों को अधिकार और प्रतिनिधित्व देगा

 

 

पटना। आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर में जब राजा हरि सिंह का भारतीय संघ के साथ विलय हुआ, उस वक्त से लेकर अब तक कई उतार-चढ़ाव हुए। 80 के दशक के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का एक दौर आय। सदियों से जो लोग अपनी भूमि पर रहते थे, वो मूल समेत उखड़ गए। किसी भी सरकार ने इनकी चिंता नहीं की। अगर सटीक उपाय और शक्ति के साथ उस वक्त उगते हुए आतंकवाद को खत्म कर दिया गया होता तो किसी को अपना प्रदेश छोड़कर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

 

ऐसे तमाम विस्थापित कश्मीरियों को उनका हक दिलाने के लिए अंत्योदय की राजनीति करने वाले अमित शाह ने शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 को पारित करने के लिए लोकसभा में पेश किया। किसी भी समाज में जो पिछड़े लोग होते हैं उन्हें सम्मान के साथ आगे बढ़ाना भारतीय संविधान की मूल भावना है।

 

पिछड़ों को आगे बढ़ाने के लिए मदद से ज्यादा जरूरी सम्मान होता है। सम्मान से उसका आत्म विश्वास बढ़ता है जो आगे बढ़ने में उसकी मदद करता है। जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम के अंदर सुधार करने के बिल के साथ-साथ कमजोर की जगह एक संवैधानिक नाम ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ देकर उन्हें सम्मान देने की भी पहल भी मोदी सरकार ने किया है।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई में 5 और 6 अगस्त 2019 को धारा 370 हटाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन सभी वंचितों की आवाज सुनी है, जिन्हें सालों से कोई नहीं सुन रहा था। पूरा देश जानता है कि धारा 370 हटाने के बाद कश्मीर में आतंकी घटनाओं में भारी कमी आई है। सुरक्षा बलों की मृत्यु दर में गिरावट आई है।

Leave a Comment

error: Content is protected !!