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शरीर का कण-कण और समय का क्षण-क्षण वार्ड के विकास को समर्पित : कैलाश चौधरी

देवघर : कहते हैं दुनिया की हर चीज ठोकर खाने से टूट जाती है, लेकिन एक कामयाबी ही है जो ठोकर खाकर ही मिलती है इसी वाक्य को अपने जीवन का मूलमंत्र मानता है बड़ा बाजार निवासी कैलाश चौधरी। और इसी मूलमंत्र के सहारे कैलाश आगामी देवघर नगर निगम चुनाव में वार्ड 20 से अपनी जीत सुनिश्चित करने की तैयारी में जुट गए हैं। 2015 के चुनाव की चर्चा करते हुए कैलाश कहते हैं गरीबों के लिए चुनाव लड़ना हिमालय को पिघला कर हटाने जैसा दुष्कर कार्य था। लेकिन क्षेत्र की जनता के द्वारा बार बार किये आग्रह को मैं ठुकरा नहीं पाया। और मैंने चुनाव लड़ने का मन बना लिया। लेकिन हालात ऐसी बनी की रोटेशन में वार्ड 20 महिला के लिए आरक्षित हो गया। मैं असमंजस में था क्या करूं और क्या न करूं। एक बार फिर वार्ड की जनता ने ही हौसला दिया और मैंने अपनी पत्नी चांदनी चौधरी को चुनाव मैदान में उतार दिया। और देखते ही देखते वार्ड 20 के इस चुनावी रण में चारों तरफ सिर्फ कैलाश की ही चर्चा हो रही थी। चुनाव की इस महाभारत में अभिमन्यु भी कैलाश थे तो अर्जुन की भूमिका में भी वही थे। बकौल कैलाश चुनाव को वे जंग नहीं त्यौहार के रूप में ले रहे थे। विरोधियों से भी उसने मित्रवत व्यवहार रखा। और देखते ही देखते अपने परिश्रम की महक से पूरे वार्ड को महका दिया। न सिर्फ कैलाश ही बल्कि उस क्षेत्र की जनता भी कैलाश की जीत के प्रति आश्वस्त थे। और इस आश्वस्त के पीछे कैलाश की सादगी, सही राजनीति, सोशल एक्टिविज्म, वाकपटुता, भाषण देने की कला में माहिर, भविष्य की योजनाओं का सही सही निर्धारण आदि खूबियों का समन्वय था। कहते हैं न कि काबिलियत इतनी बढ़ाओ कि तुम्हें हराने के लिए कोशिश नहीं साजिश करनी पड़े। और हुआ भी वैसा ही। इलेवन्थ आवार में चुनाव में धन-तंत्र ने अपना असर दिखा ही दिया। फलस्वरूप संघर्ष, चुनावी सकारात्मकता और साहस के धनी कैलाश ने लोकतंत्र में जनता के फैसले को अंतिम फैसला मान हार को सहर्ष स्वीकार किया।

कैलाश के द्वारा लाये इस चुनाव में 810 मतों ने यह दर्शा दिया कि भले ही वे चुनाव नैरो इस्केप से हार गये लेकिन जनता का दिल जीतने में वे कामयाब हो गये। कैलाश ने उम्मीद नहीं छोड़ी और न खुद को हार मानने की अनुमति दी। कैलाश जानता था कि बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा ही नहीं होती है क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ती है जितनी दूरी आगे की ओर तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। फिर क्या था कैलाश ने मंत्री बादल पत्रलेख की राह पर चलने का मन बनाया। एक साधारण आदमी से प्रसिद्ध आदमी बनना आसान नहीं है। इसके लिये न जाने कितनी कुर्बानियां देनी पड़ती है। इन्होंने अपने शरीर का कण-कण और समय का क्षण-क्षण 20 नम्बर वार्ड की जनता और वार्ड के विकास के लिये आहूत कर दिया है।और एक बार फिर कैलाश ने बेहतरीन कार्य कर जनता का दिल जीत लिया है। और आज कैलाश जहां तक पहुंचा है उसके यहां तक पहुंचने की यात्रा निश्चित ही किसी तिलिस्म से कम नहीं है। चुनावी रणभेरी बज चुकी है। तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए कैलाश ने न सिर्फ अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की है बल्कि अपने द्वारा खुले आंखों से देखे सपने को संकल्पों में बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के इस सोच के साथ कि “मैं एक छोटा आदमी हूँ और मैं छोटे-छोटे लोगों के लिए बड़े-बड़े काम करना चाहता हूँ” के साथ जुट गया है।

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