बम्पास टाउन निवासी विष्णुकांत झा की शिकायत पर दर्ज हुई प्राथमिकी


देवघर/संवाददाता। जब से गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे विवादों में घिरे हैं। तब से ही उनके ऊपर एक के बाद एक कर कई प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। निशिकांत दुबे की मुश्किलें अब कम होने का नाम नहीं ले रही है। जमीन की खरीद में अनियमितता व धोखाधड़ी, सहित फर्जी डिग्री के विवाद में उनके ऊपर पूर्व में भी कई प्राथमिकी दर्ज ही चुकी है। इसी क्रम में गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के विरुद्ध फर्जी डिग्री से संबंधित एक और प्राथमिकी देवघर नगर थाना में दर्ज करायी गयी है। यह प्राथमिकी बंपास टाउन निवासी विष्णुकांत झा की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। जिक्र है कि 28 जुलाई को झारखंड मुक्ति मोर्चा के ट्विटर हैंडल से गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के सांसद निशिकांत दुबे के संबंध में संवाद प्रकाशित हुआ है। जिसमें जिक्र है कि जब से सांसद निशिकांत दुबे के कुकर्म की परत दर परत खुल जनता के समक्ष सामने आने लगे हैं। तो कभी एक असहाय व्यक्ति को अपने पैर की धोवन पिलाने से गुरेज ना करने वाले सांसद दूसरों पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। ट्विटर हैंडल में सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री प्राप्त करने संबंधित तथ्य का भी उल्लेख किया गया है।

उक्त संवाद में दिल्ली विश्वविद्यालय फैकेल्टी आफ मैनेजमेंट स्टडीज द्वारा जारी पत्र का भी उल्लेख है। जिसमें निशिकांत दुबे नाम के किसी व्यक्ति के वर्ष 1993 में फैकल्टी आॅफ मैनेजमेंट स्टडीज यूनिवर्सिटी आफ दिल्ली से नामांकन या उत्तीर्ण नहीं होने का उल्लेख किया गया है। साथ ही निशिकांत दुबे की एमबीए की डिग्री के संबंध में वर्ष 2016 में अपने निर्गत पत्र 5 जनवरी 2016 को सही बताया गया है। 28 जुलाई को झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा ट्विटर हैंडल पर जारी संवाद को उन्होंने ट्विटर हैंडल से डाउनलोड कर संलग्न किया है। जिक्र है कि सांसद निशिकांत दुबे अपनी चुनावी सभाओं में अपने को दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 1993 में एमबीए की डिग्री प्राप्त करने से संबंधित भ्रामक घोषणा करते रहते हैं कि वह एमबीए जैसी उच्च डिग्री धारक है व बड़ी-बड़ी कंपनियों में उनके पैठ व संपर्क है। ईससे वह काफी लोगों को रोजगार दिला सकते हैं। भ्रामक घोषणा कर सीधे-सादे लोगों को बरगलाते रहते हैं। झूठा दिलासा देकर लोगों को अपनी ओर आकृष्ट करते हैं। फैक्लटी आॅफ मैनेजमेंट स्टडीज यूनिवर्सिटी आॅफ दिल्ली द्वारा निर्गत पत्र से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे द्वारा वर्ष 1993 में प्राप्त एमबीए डिग्री फर्जी व अवैध है। उसी फर्जी व अवैध डिग्री के आधार पर वह गलत व भ्रामक जानकारी प्रेषण करते रहते हैं। स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे द्वारा फैकल्टी आॅफ मैनेजमेंट स्टडीज यूनिवर्सिटी आफ दिल्ली द्वारा वर्ष 1993 में प्राप्त एमबीए की फर्जी डिग्री का उल्लेख सार्वजनिक रूप से करना, यह बताना कि वह उच्च एमबीए डिग्रीधारक हैं।

उस फर्जी डिग्री को सही डिग्री के रूप में प्रचार-प्रसार करते हुए लोगों को बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का प्रलोभन देना व फर्जी दस्तावेज का विभिन्न स्थानों पर व्यक्तिगत लाभ हेतु प्रयोग करना दंडनीय अपराध है। जिक्र है कि इस बात की भी संभावना है कि उनके द्वारा अन्य फर्जी डिग्रियां भी प्राप्त की गई हों जिनके संबंध में भी जांच किए जाने की आवश्यकता है। मामले में स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे के विरुद्ध भादवि की धारा 468, 471, 420 भादवि के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी। उसी आधार पर केस दर्ज कर पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। बहरहाल अब देखना यह है कि जिस तरह विरोधी उनपर लगातार कई तरह के आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराकर उन्हें घेरने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में क्या निशिकांत दुबे विरोधियों द्वारा रचे जा रहे इस चक्रव्यूह से अर्जुन की तरह बाहर निकल जाएंगे या अभिमन्यु की तरह वह चक्रव्यूह में फंस जाएंगे। खैर यह तो अब समय ही बताएगा कि उनपर लगाए गए आरोपों में वह अपने आप को निर्दोष साबित कर आरोप मुक्त हो जाएंगे या फिर उनपर लगे यह आरोप उनके लिए मुशीबत साबित होती है।