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प्रदीप यादव और निशिकांत दुबे के बीच आमने-सामने की टक्कर

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गोड्डा/संवाददाता : प्रदीप यादव और निशिकांत दुबे के बीच आमने सामने की टक्कर, आंकड़ों के हिसाब से प्रदीप यादव की दावेदारी मजबूत. गोड्डा लोकसभा सीट पर बीजेपी, महागठबंधन के अलावा निर्दलीय भी ताल ठोक रहे हैं. 19 मई को गोड्डा लोकसभा की सीट के लिए मतदान किया जाना है. यहां महागठबंधन से प्रदीप यादव जबकि बीजेपी से निशिकांत दुबे के बीच आमने सामने की टक्कर बताई जा रही है. खैर परिणाम जो भी होंगे, लेकिन चुनावी गणित के आंकड़ों के अनुसार महागठबंधन के प्रदीप यादव का पलड़ा भारी माना जा रहा है.

2019 का गणित क्या है?
2019 में गोड्डा लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक होने वाला है. यहां जीत-हार के साथ साथ वोटों के अंतर पर नजरें रहेंगी. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी लहर के बावजूद संथाल परगना प्रमंडल की तीन लोकसभा सीट में भाजपा एकमात्र गोड्डा सीट ही जीत सकी थी. हालांकि 2014 की अपेक्षा 2019 के चुनावी समीकरण में भारी उलटफेर हुआ है. 2014 में कांग्रेस के फुरकान अंसारी और झाविमो के प्रदीप यादव दोनों चुनावी मैदान में थे. जबकि इस बार झाविमो के प्रदीप यादव महागठबंधन के प्रत्याशी हैं. महागठबंधन प्रत्याशी को झाविमो के अलावा, कांग्रेस, झामुमो और राजद का समर्थन प्राप्त है. गोड्डा लोकसभा में महागठबंधन के इन दलों के पास अच्छा खासा वोट बैंक है, जबकि भाजपा की सहयोगी दल जदयू और आजसू का संथाल परगना इलाके में कमजोर संगठन है. यहां तक कि 2014 में जदयू के उम्मीदवार और आजसू के उम्मीदवार अपनी जमानत तक बचा पाने में नाकाम रहे थे. जानकारों के अनुसार, इस बार मोदी लहर का असर कम होने से भाजपा के वोट पर्सेंटेज में भी कमी आ सकती है. कुल मिलाकर यहां सीधा मुकाबला महागठबंधन और बीजेपी में होना है.

गोड्डा का जातिय समीकरण :
गोड्डा लोकसभा सीट पर 7वें चरण में यानि 19 मई के दिन वोट डाले जाएंगे. यहां के जातीय समीकरण को देखें तो मुस्लिम, यादव और आदिवासी मतदाता काफी निर्णायक भूमिका में हैं. करीब 3 लाख मुस्लिम, 2.5 लाख यादव, 1.5 लाख आदिवासी के साथ कुल 16 लाख 91 हजार 410 मतदाता हैं. जातिगत लिहाज से इस सीट पर मुस्लिम, यादव और आदिवासी का वोट बैंक असरदायक माना जाता है.

2014 में 60682 वोट से जीते थे निशिकांत दुबे:
2014 लोकसभा चुनाव में निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार फुरकान अंसारी को 60682 वोटों के अंतर से हराया था. निशिकांत दुबे को कुल 3,80,500 वोट मिले थे, जबकि फुरकान अंसारी को 319,818 मत मिले. झाविमो प्रत्याशी प्रदीप यादव 1,93506 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे. 2014 में नोटा में भी तकरीबन 1 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया.

लहर के बावजूद लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा मात्र तीन विधानसभा पर बना पाई थी बढ़त:
2019 के उस गोड्डा लोकसभा चुनाव के संभावित परिणाम के अध्ययन के लिए साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के परिणामों पर नजर डालना जरुरी है. गोड्डा लोकसभा के अंदर छह विधानसभा सीट हैं- देवघर, मधुपुर, जरमुंडी, गोड्डा, पौड़ेयाहाट और महागामा. 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद भाजपा प्रत्याशी निशिकांत मात्र तीन विधानसभा देवघर, गोड्डा और जरमुंडी में ही बढ़त बना सके थे जबकि कांग्रेस प्रत्याशी रहे फुरकान अंसारी मधुपुर और महागामा और झाविमो प्रत्याशी प्रदीप यादव ने पौड़ेयाहाट विधानसभा से बढ़त हासिल की थी. 2014 के इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने देवघर से 48889 वोट, गोड्डा से 11238 वोट और जरमुंडी विधानसभा 5292 मतों से बढ़त हासिल की थी. वहीं कांग्रेस के फुरकान अंसारी ने मधुपुर से 10575 वोट और महागामा विधानसभा से 2394 वोट से बढ़त बनाई थी. झाविमो के प्रदीप यादव ने पौड़ेयाहाट विधानसभा से 3596 मत से बढ़त बनाई थी. बहरहाल अंतिम फैसला गोड्डा लोकसभा की जनता को करना है. 19 मई को वोट डालने के साथ ही प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला ईवीएम में बन्द हो जाएगा.

By ख़बरों की तह तक

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